Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी पर निबंध औऱ स्पीच-कविता

Ganesh Chaturthi- यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र श्री गणेश भगवान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता हैं जिसे भारतवर्ष में बहुत ही धूमधाम और ख़ुसी के साथ मनाया जाता हैं क्योंकि Ganesh Chaturthi भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक हैं।

वैसे तो गणेश चतुर्थी पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है लेकिन खासकर मुंबई शहर में गणेश चतुर्थी के त्यौहार का आकर्षण का केंद्र होता है जहाँ बहुत ही धूमधाम से इस त्यौहार को मनाया जाता हैं यह त्यौहार 11 दिन तक चलता हैं जिसकी रौनक पूरे देश मे दिखाई देती है।

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अक़्सर हमें स्कूलों व कॉलेजों में निबंध व भाषण-कविता लिखने के लिए दिए जाते है इसलिए आज हम आपको Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी की जानकारी प्रदान करने वाले है औऱ साथ ही Ganesh Chaturthi पर छोटा, मीडियम औऱ लंबा हर तरह की लम्बाई के निबंध प्रदान करने वाले हैं उम्मीद है आपको हमारे द्वारा लिखे गए निबंध पसंद आयगे।

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Ganesh Chaturthi- गणेश चतुर्थी पर 10 लाइन-

1. गणेश चतुर्थी का त्यौहार भगवान गणेश के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।

2. भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं।

3. यह पर्व हिंदू धर्म का एक लोकप्रिय पर्व है।

4. गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण त्यौहार है।

5. इस त्यौहार को हर साल अगस्त या सितंबर के माह में बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।

6. इस दिन सभी कार्यालयों और शिक्षा संस्थाओं को बंद रखा जाता है और गणेश भगवान की पूजा की जाती है।

7. भगवान गणेश बुद्धि और समृद्धि के भगवान हैं इसलिए इन दोनों को पाने के लिए लोग यह पूजा करते हैं।

8. गणेश उत्सव के भगवान गणेश को विघ्न हरता के नाम से भी बुलाया जाता है अर्थात भक्तों की सभी बाधाओं को मिटाने वाले माने जाते हैं।

9. गणेश चतुर्थी 11 दिनों का लंबा हिंदू उत्सव है जो चतुर्थी के दिन मूर्ति स्थापना से शुरू होता है तथा गणेश विसर्जन के साथ अनंत चतुर्दशी पर खत्म होता है।

10. गणेश चतुर्थी के दौरान सुबह और शाम गणेश जी की आरती की जाती है और लड्डू और मोदक का भोग लगाया जाता है।


गणेश चतुर्थी पर निबंध
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हम उस देश के वासी हैं जहां त्योहारों के रंग ही रंग बिखरे हुए हैं जिसमें से एक Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी के त्योहार का रंग है यहां पर प्रतिदिन ही कोई न कोई त्योहार मनाया जाता है जैसे पूरे भारत में होली, दिवाली, ईद, कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार सभी देशवासी मिलकर मनाते हैं उसी प्रकार गणेश चतुर्थी का त्यौहार भी सब मिलकर बड़ी धूमधाम से मनाते हैं।

यह त्यौहार 11 दिन तक चलता है औऱ गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान श्री गणेश के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है जिसकी मुंबई में रौनक देखने योग्य होती है जिसे लोग विदेशों तक से देखने आते हैं।

Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी का त्योहार अंग्रेजी माह के अनुसार अगस्त या सितंबर में आता है और हिंदू पंचाग के अनुसार भाद्रपद माह की चतुर्थी को मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घरों में गणेश जी की मूर्ति लेकर आते हैं और 10 दिन तक उनकी पूजा करके 11वे दिन गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन कर देते हैं।


गणेश चतुर्थी पर निबंध
Ganesh Chaturthi Essay Hindi Word 300

भारत में गणेश चतुर्थी बहुत ही धूमधाम से मनाया जाने वाला त्यौहार है इस दिन कार्यालयों और स्कूलों की छुट्टी रखी जाती है। गणेश चतुर्थी के त्योहार का इंतजार लोग बहुत उत्साह के साथ करते हैं।

Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी हिंदुओं का बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है जिसकी तैयारी करने मात्र से ही लोगों के अंदर एक नई चेतना और उत्साह पैदा होता है वैसे तो यह त्योहार संपूर्ण देश में मनाया जाता है परंतु महाराष्ट्र में इसको मनाने का रंग कुछ अलग ही होता है।

हिंदू मान्यता के अनुसार यह त्यौहार भगवान गणेश के जन्म दिवस पर मनाया जाता है भगवान गणेश सभी को प्रिय हैं खासतौर से बच्चों को, बच्चों में यह गणेशा नाम से बहुत ही प्रसिद्ध है। भगवान गणेश ज्ञान और संपत्ति के भगवान हैं जोकि भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं।

गणेश चतुर्थी कैसे मनाते हैं:-

Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी 11 दिनों तक मनाया जाने वाला एक लंबा हिंदू उत्सव है जो चतुर्थी के दिन मूर्ति स्थापना से शुरू होता है तथा गणेश विसर्जन के साथ अनंत चतुर्दशी पर खत्म होता है इन 11 दिनों में भक्तजन सुबह शाम गणेश भगवान की आरती करते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं ,हवन करते हैं, विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर गणेश जी को भोग लगाए जाते हैं। जिनमें मोदक विशेष रूप से गणेश भगवान के लिए बनाए जाते हैं क्योंकि कहा जाता है गणेश भगवान को मोदक बहुत पसंद है।

भगवान गणेश अपने भक्तों को बुद्धि समृद्धि तथा संपत्ति का आशीर्वाद देते हैं। भगवान गणेश अच्छाई की रक्षा करने वाले और सभी बाधाओं को दूर करने वाले विघ्न हरता कहे जाते हैं। 10 दिनों की पूजा के दौरान कपूर, लाल चंदन, लाल फल फूल, नारियल, मोदक और दुराव घास चढ़ाने की प्रथा है।

10 दिनों की पूजा समाप्ति के बाद ग्यारहवें दिन गणेश विसर्जन में लोगों की भारी भीड़ विघ्न हरता को खुशी-खुशी विदा करती हैं और कहा जाता है विघ्न हरता जाते जाते अपने साथ हमारे सारे विघ्न ले जाते हैं और खुशियां ही खुशियां चारों ओर बिखेर जाते हैं।


गणेश चतुर्थी पर निबंध
Ganesh Chaturthi Essay Hindi Word 500

Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी क्या है:-

Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है औऱ पुराणों के अनुसार इसी दिन गणेश जी का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। यह त्योहार भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है किंतु महाराष्ट्र में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है औऱ जगह-जगह पर भगवान गणेश की बड़ी-बड़ी प्रतिमा स्थापित की जाती है। 10 दिन तक प्रतिमा का पूजन किया जाता है तथा 11वे दिन गाजे बाजे के साथ नाचते झूमते श्री गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।

गणेश उत्सव 10 दिनों तक क्यों मनाते हैं:-

कहा जाता है कि एक बार वेदव्यास जी गणेश जी को महाभारत की कथा सुना रहे थे उस कथा को सुनाने में वेदव्यास जी को 10 दिन लग गए उन 10 दिन तक गणेश जी ने अपने नेत्र बंद कर लिए और जब 10 दिन बाद गणेश जी ने आंखें खोली तो भगवान गणेश का तापमान बहुत बढ़ गया था।

उसी समय वेदव्यास जी ने गणेश जी को पास में स्थित एक कुंड में स्नान करवा दिया जिसके बाद गणेश जी के शरीर का तापमान कम होता हुआ प्रतीत हुआ यही कारण है की गणेश जी की मूर्ति की स्थापना करने के बाद 10 दिन तक गणेश जी को विराजमान रखा जाता है और उनकी पूजा की जाती है और फिर 11वे दिन उनका विसर्जन किया जाता है।

Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी से जुड़ी कथा:-

एक बार पार्वती माता ने अपने तन के मैल से एक पुतला बनाया और उसका नाम गणेश रखा तब महादेव जी स्नान करने के लिए भोगावती गए थे तब पार्वती ने गणेश से कहा-‘ हे पुत्र! तुम द्वार पर जाकर खड़े हो जाओ। मैं भीतर स्नान करने जा रही हूं जब तक मैं स्नान करूं, तब तक तुम किसी भी पुरुष को भीतर मत आने देना।’

अपनी माता के आदेशानुसार जब महादेव भोगावती से वापस आए तब गणेश जी ने उन्हें द्वार पर रोक लिया इससे शिवजी को क्रोध आ गया और उन्होंने क्रोध में गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया और अंदर चले गए। पार्वती जी ने महादेव को आया देखकर, तुरंत भोजन परोस दिया और एक थाली गणेश के लिए भी लगा दी। तो शिव जी ने पूछा-” यह एक और थाली किसकी है ?” तब पार्वती बोली-” यह मेरे पुत्र गणेश के लिए है जो बाहर द्वार पर पहरा दे रहा था।”

तब शिवजी ने अपने और गणेश के बीच हुई घटना के बारे में पार्वती को बताया यह सुनकर पार्वती जी बहुत दुखी हुई उनके विलाप को कम करने के लिए शिवजी ने एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर, बालक के धड़ से जोड़ दिया। पार्वती जी इस प्रकार पुत्र गणेश को दोबारा पाकर बहुत प्रसन्न हो गई। यह घटना भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को हुई थी इसलिए यह तिथि पर्व के रूप में मनाई जाती है।

निष्कर्ष:-

Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी आने से पहले बाजारों में चारों ओर गणेश जी की अलग-अलग तरह की मूर्तियों के दर्शन करने को मिलते हैं ऐसा प्रतीत होता है मानो बाजार में कोई मेला सा लग जाता है। गणेश चतुर्थी हर एक मंदिर के नजारे देखने लायक होते हैं ऐसा प्रतीत होता है मानो जैसे घर में किसी बालक के जन्म पर कोई खुशियां मनाई जाती है वैसे ही खुशियां इन 11 दिन में भी हर एक घर में देखने को मिलती हैं।

संदेश:-

जब भगवान गणेश बाल अवस्था में थे तो उनका युद्ध ब्रह्म ऋषि परशुराम से हो गया। युद्ध में परशुराम ने क्रोध में आकर गणेश के ऊपर प्रहार किया और गणेश का एक दांत कट गया। एक दांत कट जाने के कारण गणेश का नाम एकदंत कहा जाने लगा परंतु गणेश जी ने उस टूटे हुए दांत का भी एक सदुपयोग ढूंढा जो उनकी कुशाग्र बुद्धि का प्रतीक है उन्होंने उस टूटे हुए दांत का इस्तेमाल लेखन में किया और और यह संदेश दिया कि सरात्मक के साथ कैसे जीवन मे आगे बढ़ा जा सकता है।

सीख:-

गणेश जी का प्रत्येक अंग कुछ ना कुछ सीख देता है जैसे उनकी छोटी-छोटी आंखें जो जीवन में सूक्ष्म लेकिन तीक्ष्ण दृष्टि रखने की प्रेरणा देती हैं।


गणेश चतुर्थी पर निबंध
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भारत देश में गणेश चतुर्थी का त्यौहार भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष में चतुर्थी में मनाया जाता है यह त्यौहार भगवान गणेश के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व संपूर्ण भारत देश में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है खासकर महाराष्ट्र में यह पर्व सबसे ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है यह महाराष्ट्र में सबसे बड़ा त्यौहार कहा जाता है और गणेश चतुर्थी 11 दिनो का एक विशाल महोत्सव होता है।

Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी आने से पहले ही बाजारों में इसकी रौनक दिखनी शुरू हो जाती है। श्री गणेश की सुंदर-सुंदर मूर्तियां और उनके चित्र बाजारों में बिकने शुरू हो जाते हैं। मिट्टी से बनी श्री गणेश की मूर्तियां बहुत ही भव्य तथा अलग-अलग रूप में तैयार की जाती है हर कोई अपने घर सुंदर से सुंदर मूर्ति स्थापित करना चाहता है।

गणेश भगवान को स्थापित और कैसे मनाते हैं:-

• जिस दिन गणेश महाराज घर में पधारते हैं तब से घरों का माहौल भक्तिमय हो जाता है।

• सभी लोग गणेश चतुर्थी के दिन गणेश भगवान की प्रतिमा को अपने घरों में उचित स्थान पर विराजमान या स्थापित करते हैं।

• यह 11 दिन का पर्व होता है इन 11 दिनों में रोजाना लोग मंत्रों का उच्चारण करते हैं। गणेश आरती गाते हैं ,गणेश जी की पूजा करते हैं तथा सभी कष्ट हर कर खुशियां देने की कामना करते हैं।

• भगवान गणेश की पूजा में लाल चंदन ,कपूर, नारियल ,गुड, दुराव घास और मोदक विशेष होते हैं।

• घरों में एक अलग ही माहौल बन जाता है विभिन्न प्रकार के पकवान तथा मिठाइयां बनाई जाती है जिन सबका गणेश भगवान को भोग लगाया जाता है। इन मिठाइयों में लड्डू और मोदक विशेष होते हैं।

• गणेश चतुर्थी पर जगह-जगह पर लोग गणेश पूजा के लिए पंडाल तैयार करते हैं।

• सभी पंडाल लगाने वाले अपने पंडाल को सबसे ज्यादा सुंदर तैयार करना चाहते हैं इन पंडालों की सजावट दिल को भाती है।

• हिंदू धर्म की रीति अनुसार गणेश जी की रोजाना पूजा की जाती है।

• इस उत्सव पर कोई अमीर ,गरीब ,जातिवादी का भेदभाव नहीं होता सभी के लिए यह उत्सव विशेष होता है।

• पूरे 10 दिनों तक उत्सव चलता है नाच-गाना होता है अंत में ग्यारहवें दिन गणेश जी की मूर्ति को विसर्जित किया जाता है।

• गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन समुद्रों या नदियों में किया जाता है।

• इस दिन का नजारा देखने लायक होता है। मान्यता यह भी है कि गणेश जी की पूजा के बिना कोई कार्य पूर्ण नहीं होता।

गणेश चतुर्थी का उत्सव क्यों मनाया जाता है:-

भगवान गणेश का सिर भगवान शिव ने क्रोध में आकर काट दिया फिर पार्वती जी के विलाप करने पर शिव जी ने एक हाथी का सिर गणेश के धड़ से जोड़ दिया। इस तरह गणेश भगवान को दोबारा जीवन मिला तब से ही उस दिन को गणेश चतुर्थी के उत्सव के रूप में मनाते हैं।

निष्कर्ष:-

अतः यह त्यौहार खुशियां बिखेरने वाले त्योहारों में से एक है गणपति विसर्जन के समय भजन कीर्तन करते हुए गणेश भगवान को ले जाया जाता है। लोग गुलाल उड़ाते हैं, पटाखे जलाते हैं, सबके मुंह पर बस यही नारे होते हैं – “गणपति बप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ।”

संदेश:-

पहले की अपेक्षा आजकल पूरे देश में गणेश उत्सव और भी अधिक धूमधाम से मनाया जाता है परंतु यह धूमधाम करने और सजावट करने में ,दिखावे के भाव ज्यादा और भक्ति के भाव कम दिखाई देते हैं। आपसी भाईचारे की भावना भी कहीं नहीं दिखती पहले गणेश उत्सव से कई प्रेरणा मिलती थी परंतु अब तो बस सभी पंडाल एक दूसरे के विरोधी बनकर दिखावे में ज्यादा लगाते हैं और एकता में नहीं।

इसलिए हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि इस वर्ष से गणेश उत्सव को एकता और भाईचारे के साथ मनाएंगे कोई प्रतिस्पर्धा का भाव मन में नहीं आने देंगे तभी यह पर्व सही मायने में सार्थक होगा।

          अपना अपना भूलकर,
सब मिलकर यह उत्सव मनाओ।
गणपति बप्पा मोरिया के नारे,
सब मिलकर, सच्चे दिल से कहो”
गणपति बप्पा मोरिया

सीख:-

गणेश भगवान की सूड, जो हर गंध को दूर से पहचान लेती है औऱ गणेश भगवान कहते हैं, कि हमें भी इतनी क्षमता रखनी चाहिए कि हम अपनी आने वाली हर एक परिस्थिति को दूर से भाप सकें और उसको पहचान सके।


गणेश चतुर्थी पर निबंध
Ganesh Chaturthi Essay Hindi Word 1000

प्रस्तावना:-

भगवान गणेश हिंदू धर्म के सबसे प्रिय भगवान हैं जो भक्तों को ज्ञान और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं गणेश चतुर्थी नाम का त्यौहार हिंदुओं का त्योहार है जो भगवान गणेश के जन्मदिन पर उनके स्वागत के लिए मनाया जाता है हिंदू धर्म के लोगों का मानना है कि हर साल गणेश जी पृथ्वी पर आते हैं और लोगों को बहुत से इच्छित आशीर्वाद देते हैं।

भगवान गणेश भगवान शिव और माता पार्वती के प्यारे पुत्र हैं यह हिंदुओं का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है जिसे हर व्यक्ति हर साल बड़ी तैयारी और उत्साह के साथ मनाता है। यह देश के विभिन्न राज्यों में मनाया जाने वाला एक बहुत बड़ा उत्सव है परंतु महाराष्ट्र में इसका रूप कुछ अलग ही देखा जाता है। बच्चों में गणेश भगवान की एक अलग ही जगह होती है यह बच्चों के सबसे पसंदीदा भगवान है इसलिए बच्चे प्यारे से उन्हें गणेशा कहते हैं।

Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी के उत्सव से जुड़े तथ्य:-

• यह एक हिंदू त्यौहार है जो हर वर्ष अंग्रेजी माह के अनुसार अगस्त या सितंबर के महीने में आता है।

• यह त्यौहार सभी लोग भगवान गणेश के जन्मदिन के रुप में मनाते हैं।

• इस पर्व पर लोग अपने घरों में गणेश जी की मूर्ति लाते हैं और श्रद्धा और आस्था के साथ 10 दिनों तक गणेश भगवान का पूजन किया जाता है।

• 11 वे दिन गणेश भगवान को विदाई दी जाती है और गणेशा जाते-जाते सबकी आंखें नम कर जाते हैं क्योंकि उन 10 दिनों में कुछ ऐसा माहौल बन चुका होता है जैसे कोई परिवार का सदस्य जा रहा हो।

• यह त्यौहार भाद्रपद के हिंदी महीने में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से मनाना शुरू किया जाता है।

• यह त्यौहार हर साल हिंदू धर्म के लोगों द्वारा नए-नए तरीकों की सजावट के साथ मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी के पर्व से जुड़ी कथा:-

Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी मनाने के पीछे की कथा यह है कि एक बार की बात है माता पार्वती स्नान करने जाने लगी तो उन्होंने स्नान करने जाने से पूर्व अपनी मैल से एक बालक को उत्पन्न किया और उसे द्वार पर पहरा देने के लिए खड़ा कर दिया बोली -“किसी को अंदर ना आने देना।”

तभी वहां भोलेनाथ आ गए उन्होंने अंदर प्रवेश करना चाहा, तो बालक ने रोक दिया शिव जी भगवान और बालक के बीच युद्ध शुरू हो गया और क्रोध में आकर भगवान शिव ने बालक का सिर काट दिया इससे पार्वती माता को भी बहुत क्रोध आ गया उन्होंने अपने क्रोध में आकर प्रलय से सब कुछ नाश करने की सोच ली।

पार्वती माता का क्रोध देखकर देवतागढ़ भी भयभीत होने लग गए तभी शिव जी ने विष्णु जी को आदेश दिया कि-” जाओ और उत्तर दिशा में सबसे पहले जो जीव मिले उसका सिर काट कर ले आना उसे इस धड़ से जोड़ दिया जाएगा।”

शिव जी के आदेश अनुसार, विष्णु जी उत्तर दिशा में चल पड़े तभी वहां पर उन्हें एक हाथी का बच्चा दिखा उन्होंने उस हाथी के बच्चे का सिर काटा और अपने साथ ले आए शिवजी भगवान ने उस बालक के धड़ से हाथी के बच्चे का सिर जोड़ दिया और उसे पुनर्जीवित कर दिया।

तभी पार्वती माता बोली-“सब मेरे पुत्र की हंसी बनाएंगे, ऐसा मुंह होता है भला किसी का?” तभी पार्वती माता की बातें सुनकर ब्रहमा, विष्णु, महेश ने उस बालक को सबसे पहले पूजा जाने का वरदान दे दिया।

और भगवान शंकर बोले-” गणपति, तुम भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा के उदय होने पर उत्पन्न हुए हो अतः इस स्थिति पर जो कोई भी व्रत करेगा उसके परिवार में सुख, समृद्धि आएगी। तुम उसके सभी विघ्नों का नाश करना और गणेश चतुर्थी का व्रत करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी की पूजा:-

1. लाल रंग इस पूजा में बहुत महत्व रखता है सबसे पहले सुबह स्नान करके लोग कोशिश करते हैं कि वह लाल रंग के वस्त्र पहने क्योकि लाल रंग गणेश भगवान का प्रिय रंग है।

2. मूर्ति स्थापित करते हुए दिशा का भी अलग ही महत्व है क्योंकि पूजा के समय गणेश जी का मुख पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए।

3. सर्वप्रथम पंचामृत से गणेश भगवान का अभिषेक किया जाता है।

4. पंचामृत के लिए दूध, दही, घी ,शहद और गंगा जल की आवश्यकता होती है।

5. गणेश भगवान को लाल सिंदूर और लाल कलावा चढ़ाया जाता है।

6. तत्पश्चात फल और फूल का चढ़ावा रखा जाता है जिसके साथ में ही दो सुपारी और पान के पत्ते भी चढ़ाए जाते हैं।

7. भगवान गणेशा को भोग लगाने के लिए बहुत सी मिठाई बनाते हैं परंतु गणेशा के भोग में मुख्य स्थान मोदक का होता है।

8. यह सारी विधि करने के बाद परिवार जन एक-एक करके गणेश भगवान की आरती उतारते हैं और गणेश भगवान के 12 नामों का उच्चारण करते हैं।

Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी पर चांद देखना अशुभ:-

गणेश भगवान का संपूर्ण शरीर अद्भुत है चाहे वह उनके बड़े-बड़े कान हो, चाहे वह उनका टूटा दांत, उनकी लंबी नाक (सूंड )और चाहे उनका मोटा सा बड़ा सा पेट।

कहा जाता है कि चंद्रमा ने गणेश जी के मोटे पेट का मजाक बना दिया तो गणेश जी को बर्दाश्त ना हुआ और उन्होंने गुस्से में आकर चंद्रमा को श्राप दे दिया कि जो तुमको देखेगा उस पर चोरी का आरोप लगेगा वह कलंक का भागीदार होगा इसलिए गणेश जी के श्राप से चंद्रमा काला पड़ गया था।

पर चंद्रमा को उस श्राप से मुक्त होना था इसलिए चंद्रमा ने गणेश जी की आराधना करनी शुरू कर दी जिससे भगवान गणेश प्रसन्न हो गए और चंद्रमा को अपने द्वारा दिए गए श्राप से मुक्त कर दिया परंतु शाप से मुक्त करते समय एक दिन छोड़ दिया वह था भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना अशुभ माना जाता है।

निष्कर्ष:-

अतः मान्यता के अनुसार हर कोई गणेश भगवान को घर में लाकर अपने सभी विघ्न समाप्त करवाता है और कहा जाता है कि गणेश भगवान में हर एक गुण विद्यमान है जैसे बुद्धि बल धैर्य आदि अतः यह पूजा करके हर कोई यह सभी गुण पाने की प्रार्थना करता है।

संदेश:-

हर एक त्यौहार हमें कोई ना कोई संदेश देता है परंतु अब Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थी का संदेश प्रकृति को बचाना है क्योंकि लोग पहले तो गणेश को घर में विराजमान करते हैं और फिर विसर्जन कर आते हैं।

परंतु विसर्जन के बाद नदियों, समुद्रों तथा तालाबों की स्थिति बहुत ही खराब हो जाती है। मूर्तियों के ढेर लग जाते हैं जिससे यह जल स्रोत प्रदूषित होते हैं और साथी इधर-उधर मूर्तियां पड़े रहने से भगवान का निरादर भी होता है।

इसलिए हमें मिट्टी की प्रतिमा लेनी चाहिए ऐसी प्रतिमा जिसका विसर्जन हम घर में ही कर सकते हैं किसी साफ बड़े बर्तन में मूर्ति विसर्जित कर दें तथा जब यह मिट्टी पानी में घुल जाएगी तो यह पानी हम पौधों को दे सकते हैं जिससे भगवान का निरादर भी नहीं होगा और जल स्रोत भी प्रदूषित नहीं होंगे।

सीख:-

गणेश भगवान हमेशा से हिम्मत की सीख देते रहे हैं उनसे हमेशा यही सीख मिलती है कि यह जरूरी नहीं कि अगर किसी का शरीर बेडौल है तो उसके अंदर गुण नहीं। बस अपने गुणों को पहचानने की आवश्यकता है क्या पता हमारे अंदर गुणों का खजाना भरा हो।

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तो दोस्तों हमने आपको Ganesh Chaturthi-गणेश चतुर्थीके बारे में अलग-अलग लंबाई के निबंध लिखे हैं अगर आपको हमारे यह निबंध पसंद आते हैं तो आप अपनी आवश्यकता के अनुसार स्कूलों में इनका इस्तेमाल कर सकते हैं और साथ ही आपको भी इसके बारे में लोगों को अवगत करना चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया गणेश चतुर्थी पर निबंध काफी पसंद आए होंगे तो अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आता है तो उसे सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल है तो हमे कमेंट करें

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