Holi- होली कब है औऱ क्यो मनाई जाती है

Holi- होली आने से पहले ही बच्चों से लेकर बड़ो तक उत्साह भर जाता हैं क्योंकि यह रंगों का त्योहार जीवन मे नया उत्साह और नई उमंग लेकर आता हैं इसलिए हर कोई जाना चाहता है कि “Holi Kab Hai” औऱ कितनी तारीख़ को हैं।

क्योंकि होली का त्योहार है ही ऐसा जिसमें मौज-मस्ती, गाना-बजाना, नाच-कूद, खाना-पीना आदि सभी प्रकार की चीजें शामिल होती है जो होली के त्योहार को बच्चों से लेकर बड़ो तक ख़ास बनता है।

Holi Kab Hai kyo manai jati hai hindi

इसलिए हम सबको होली का बेसब्री से इंतजार होता हैं और हमारे मन मे होली से जुड़े कोई सवाल भी आते है जैसे Holi कब है, क्यो मनाई जाती है, कैसे मनाते है, होली का महत्व क्या है और होली का इतिहास इत्यादि

इसलिए आज हम आपको Holi की सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करने वाले हैं जिसमें आपको होली से जुड़े सभी प्रकार के सवालों का जवाब दिया गया हैं इसलिए आपको इस आर्टिकल को एक बार पूरा पढ़ना चाहिए।

होली की जानकारी

Holi-होली भारतीय और नेपाली लोगों द्वारा मनाया जाने वाला रंगों का त्योहार है यह त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली भारत में मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक प्रमुख एवं प्रसिद्ध त्योहार है ना सिर्फ भारत में बल्कि पूरे विश्व भर में यह त्यौहार मनाया जाता है।

यह रंगों का त्योहार मुख्य रूप से 2 दिन मनाया जाता है जिसमें पहले दिन होलिका जलाई जाती है जिसे होलिका दहन भी कहते हैं और दूसरे दिन सभी लोग एक दूसरे को रंग-गुलाल आदि लगाते हैं नाच गाना करते हैं औऱ घर-घर जाकर एक दूसरे को होली की बधाई देते हैं।

इस त्योहार पर मीठे में मुख्य रूप से गुजिया बनाई जाती है गुजिया के साथ इस त्योहार पर विभिन्न प्रकार की नमकीन, ठंडाई बनाने का भी रिवाज देखा जाता है। होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले लग जाते हैं और नए रिश्ते की शुरुआत करते हैं।

दूसरे दिन का कार्यक्रम जैसे- नाच गाना करना, रंग लगाना आदि दोपहर तक चलता है और फिर नहा कर लोग नए कपड़े पहनते हैं फाल्गुन मास में आने के कारण बहुत से लोग इसे फाल्गुनी भी कहते हैं इस त्योहार को मनाने के लिए मानो, जैसे- पेड़ पौधे ,पशु पक्षी और मनुष्य सब बहुत उत्साहित होते हैं।

होली क्यों मनाई जाती है

प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक राजा हुआ करता था हिरण्यकश्यप खुद को ही भगवान समझता था और राजा को ब्रह्मा से यह वरदान प्राप्त था कि उसे कोई नही मार सकता न आगे से, न पीछे से, न दाये से, न बाये से, न ऊपर से, न नीचे से, न दिन में, न रात में इस कारण से वह अपने आप को अमर मानता था और अपने आप को ईश्वर बताता था

हिरण्यकश्यप का प्रहलाद नाम का एक पुत्र था जो विष्णु भगवान का भक्त था हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को विष्णु भक्ति करने से बहुत रोका परंतु वह नहीं मानता था और जब वह नहीं माना तो हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र पहलाद को मारने के कई प्रयास किया परन्तु वह सब प्रयास में असफ़ल रहा।

फ़िर हिरण्यकश्यप की होलिका नामक एक बहन थीं जिसको अग्नि से ना जलने का वरदान प्राप्त था तो हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने के लिए होलिका के इसी वरदान का सहारा लिया।

होलिका प्रहलाद को लेकर चिता में जा बैठी परंतु विष्णु भगवान की कृपा से प्रहलाद को कुछ भी ना हुआ और होलिका जल कर राख हो गई उसी दिन से होलिका जलाने तथा अगले दिन होली मनाने की प्रथा शुरू हुई जो बुराई पर अच्छाई की जीत का उदाहरण है इसलिए आज भी लोग पूर्णिमा को होली जलाते हैं।

Holi Kab Hai- होली कब मनाई जाती है

हिंदू पंचांग के अनुसार होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है जो होली का पहला दिन भी कहा जाता है। इस दिन होलिका दहन की रीत निभाए जाती है और दूसरे दिन रंगों से खेलने की परंपरा पूरी की जाती है जिसे धुलंडी या धूलि भी कहते हैं।

Holi-होली हर साल मनाये जाने वाला त्योहार हैं जिसमें रंगों का इस्तेमाल किया जाता हैं होली कब-कब है औऱ होली के दिन का शुभ व अशुभ मुहूर्त क्या है चलिये जानतें है।

Holi Kab Hai 2021
Date- 28 मार्च
होलिका दहन मुहूर्त- 18:32 से 20:54
भद्रा पूंछ- 10:12 से 11:15
भद्रा मुख- 11:15 से 12:59
रंगवाली होली- 29 मार्च
पूर्णिमा तिथि आरंभ- 03:26 (28 मार्च)
Holi Kab Hai 2022
Date- 17 मार्च
होलिका दहन मुहूर्त- 21:03 से 22:13
भद्रा पूंछ- 21:03 से 22:13
भद्रा मुख- 22:13 से 00:09
रंगवाली होली- 18 मार्च
पूर्णिमा तिथि आरंभ- 13:29 (17 मार्च)
Holi Kab Hai 2023
Date- 7 मार्च
होलिका दहन मुहूर्त- 18:20 से 20:49
भद्रा पूंछ- 00:41 से 01:58
भद्रा मुख- 01:58 से 04:08
रंगवाली होली- 8 मार्च
पूर्णिमा तिथि आरंभ-  16:16 (6 मार्च)
Holi Kab Hai 2024
Date- 24 मार्च
होलिका दहन मुहूर्त- 23:12 से 00:26+
भद्रा पूंछ-  18:32 से 19:52
भद्रा मुख- 19:52 से 22:05
रंगवाली होली- 25 मार्च
पूर्णिमा तिथि आरंभ- 09:54 (24 मार्च)
Holi Kab Hai 2025
Date- 13 मार्च
होलिका दहन मुहूर्त- 23:26 से 00:30
भद्रा पूंछ- 18:58 से 20:15
भद्रा मुख- 20:15 से 22:24
रंगवाली होली- 14 मार्च
पूर्णिमा तिथि आरंभ- 10:35 (13 मार्च)

इस त्योहार को हम बसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करने के लिए मनाते हैं वसंत ऋतु में प्रकृति में विभिन्न रंगों की छटा दिखाई देती है तथा इस छठा को दर्शाने के लिए यह होली नामक रंगों का त्योहार मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस पर्व का बहुत अधिक महत्व होता है औऱ यह त्यौहार वसंत ऋतु में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है इसलिए इसे वसंतोत्सव और काम महोत्सव भी कहते हैं।

होली का इतिहास क्या है

Holi-होली भारतीय त्योहारों में से एक मुख्य त्योहार है जो वसंत ऋतु में मनाया जाता है यह त्यौहार हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

इस त्योहार का वर्णन अनेक पुराने धार्मिक पुस्तकों में भी किया गया है। नारद पुराण और भविष्य पुराण जैसे पुराणों की प्राचीन हस्तलिपियो और ग्रंथों में भी इस पर का उल्लेख किया है। वही विंध्य क्षेत्र के रामगढ़ स्थान पर स्थित ईसा से 300 वर्ष पुराने एक अभिलेख में भी इसका उल्लेख है।

भारत के अनेक मुस्लिम कवियों ने भी अपनी बहुत सी कविताओं में होली के त्यौहार का उल्लेख दिया है जो इस बात का प्रमाण है कि होली बस हिंदू ही नहीं मुस्लिम लोग भी मनाते हैं। मुगल काल के राजा महाराजा भी जैसे -अकबर, हुमायूं, जहांगीर कई राजा होली के आगमन से बहुत पहले ही इस उत्सव की तैयारियां शुरू करवा देते थे।

होली कैसे मनाते हैं

Holi-होली उत्साह, उमंग और उल्लास के साथ भाईचारे की भावना बिखेरने का त्योहार है। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दिखाने के लिए हर गली मोहल्ले में लोग होलिका दहन की रीत निभाते हैं और रंग गुलाल उड़ा कर खुशियां बांटी जाती है।

हर गली मोहल्ले में रंगों के त्यौहार का रंग रमा होता है धार्मिक एवं सामाजिक एकता का पर्व होली होलिका दहन से शुरू होता है औऱ होलिका दहन के लिए हर चौराहे व गली मोहल्ले में गूलरी, कंडो व लकड़ियों से बड़ी-बड़ी होलिका सजाई जाती है

होलिका के दहन से पूर्व पूरे नीति-नियम से उसकी पूजा की जाती है तथा अंत में होलिका की 3 परिक्रमा करके अंत में उसे अग्नि दी जाती है।

और अगले दिन सब लोग एक दूसरे को रंग लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं इस त्योहार पर गाने-बजाने का भी रंग कुछ अलग ही दिखाई देता है मुख्य रूप से खाने पीने में गुजिया, पापड़, विभिन्न प्रकार की नमकीन तथा विशेष ठंडाई का प्रबंध लोग करते हैं।

होली का महत्व क्या है

Holi-होली का त्योहार रंगों का त्योहार है ना सिर्फ रंगों का बल्कि यह विभिन्न प्रकार की भावनाओं का भी मेल है जैसे- स्नेह, भाईचारा, एकता, अपनेपन आदि भावनाओं की धारा इस त्योहार पर बहती दिखाई देती है होली को भारत देश में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।

भारतीय वर्ष में जब वसंत ऋतु का आगमन होता है तब होली का त्योहार मनाया जाता है हमारे समाज में इस त्यौहार को आपसी मनमुटाव खत्म करके, एक नए रिश्ते की शुरुआत करने का दिन कहा जाता है जिस दिन चारों ओर खुशियां ही खुशियां बटती नजर आती है और पुराने गिले-शिकवे को खत्म किये जाते है।

Holi-होली के दिन छोटे, बड़े और युवा सब एक समान हो जाते हैं सब मिलकर इस रंगो भरे त्यौहार का आनंद लेते हैं। रंगो के इस त्योहार पर सभी लोग ना सिर्फ गुलाल अबीर का रंग लगाते हैं बल्कि आपसी प्रेम स्नेह के रंग भी एक दूसरे पर भरपूर बरसाते है जिससे लोगों के बीच की दूरियां भी खत्म हो जाती हैं और उनके बीच प्यार बढ़ता है।

इस त्यौहार के बहाने सभी लोगों को एक आनंद से परिपूर्ण छुट्टी का दिन मिलता है लोग इस त्यौहार को अपने परिवार और मित्रों के साथ बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। यह मान्यता है कि होलिका दहन की रसम जो भी व्यक्ति पूरे पारंपारिक रूप से पूर्ण करता है उसके जीवन की सभी बुराई नकारात्मक चीजें उसके जीवन से दूर हो जाती हैं और एक नई ऊर्जा के साथ एक नई शुरुआत होती है।

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तो दोस्तों हमनें आपको Holi-होली के बारे में सारी जानकारी प्रदान की है जैसे होली क्या है? होली कब है और होली कैसे मनाते है इत्यादि की जानकारी प्रदान की गई हैं।

हम उम्मीद करते है कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा औऱ अगर आपको इसे कुछ मद्त मिलती है तो इसे अपने सभी दोस्तों के साथ Share जरूर करें जिस यह उनके लिए भी फायदेमंद रहे।

वैसे तो हमनें होली से जुड़ी सभी जानकारी प्रदान की है परंतु अगर होली से समन्धित कोई भी सवाल या सुझाव हो तो आप कमेंट में पूछ सकते हैं ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारी को पढने के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करते रहे।

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