Janmashtami- जन्माष्टमी पर निबंध औऱ स्पीच-कविता

Janmashtami- जन्माष्टमी का उत्सव भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में बहुत ही उत्साह से मनाया जाता हैं जिसे जन्मोत्सव व जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता हैं यह भारत के सबसे प्रमुख त्योहार में से एक है जिसे पूरे भारत मे बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता हैं।

भगवान श्रीकृष्ण को हिंदू धर्म में पूरी श्रष्टि का स्वामी माना जाता है जिसका उलेख श्रीमद्भागवत गीता में देखने को भी मिलता हैं और भारत मे ही नही बल्कि दुनिया के बहुत सारे देशों भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति की जाती हैं।

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अक़्सर हमें स्कूलों व कॉलेजों में निबंध व भाषण लिखने के लिए दिए जाते है इसलिए आज हम आपको Janmashtami- जन्माष्टमी की जानकारी प्रदान करने वाले है औऱ साथ ही Janmashtami- जन्माष्टमी पर छोटा, मीडियम औऱ लंबा हर तरह की लम्बाई के निबंध प्रदान करने वाले हैं उम्मीद है आपको हमारे द्वारा लिखे गए निबंध पसंद आयगे।

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जन्माष्टमी पर निबंध 10 लाइन के साथ

1. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हिंदुओं का एक प्रसिद्ध त्योहार है।

2. जन्माष्टमी के त्यौहार को श्री कृष्ण भगवान का जन्मदिन मनाया जाता हैं।

3. जन्माष्टमी का त्योहार हिंदू माह के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाते हैं।

4. भारत के महाराष्ट्र में यह त्योहार देखने योग्य होता है जन्माष्टमी को वहां दही हांडी के नाम से जानते हैं।

5. मथुरा और वृंदावन में इस त्यौहार को मनाने का मुख्य केंद्र होते हैं यहां की जन्माष्टमी की रौनक की चर्चा विश्व विख्यात है।

6. जन्माष्टमी के दिन सभी मंदिरों में श्री कृष्ण की सुंदर-सुंदर झांकियां बनाई जाती हैं और समारोह किए जाते हैं।

7. जन्माष्टमी का त्योहार बहुत हर्षोल्लास के साथ हर वर्ष मनाया जाता है।

8. जन्माष्टमी को कृष्णाष्टमी के नाम से भी जानते हैं।

9. जन्माष्टमी के दिन लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं तथा रात को 12:00 बजे कृष्ण जी का जन्मदिन मना कर आरती करते हैं।

10. आरती करने के बाद उपवास खोलते हैं तथा प्रसाद वितरण करते हैं।


जन्माष्टमी पर निबंध
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Janmashtami-जन्माष्टमी को सभी लोग भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस के रुप में मनाते है कहां जाता है, भगवान श्री कृष्ण विष्णु भगवान के अवतार थे औऱ उनका जन्म 5000 साल पहले द्वापर युग में, मथुरा में हुआ था। कृष्ण जन्माष्टमी को कृष्णाष्टमी, अष्टमी रोहिणी, श्रीकृष्ण जयंती आदि नामों से भी जाना जाता है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है। जन्माष्टमी पर पूरे दिन व्रत रखा जाता है औऱ इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती है और भगवान श्री कृष्ण को झूला झूलाते हैं।

यह पर्व भगवान श्री कृष्ण के दिखाएं पथ पर चलने व उनके आदर्शों का पालन कर मानव जाति के कल्याण के लिए अपना योगदान देने की ओर अग्रसर होने का संदेश देता है।


जन्माष्टमी पर निबंध
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Janmashtami-जन्माष्टमी का त्योहार जो पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है जिसे श्री कृष्ण का जन्मदिन कहा जाता है यह हिंदुओं का सुप्रसिद्ध त्यौहार है जो रक्षाबंधन के बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाते हैं।

भगवान श्री कृष्ण वासुदेव और देवकी के आठवें पुत्र थे जिनका जन्म रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी तिथि को हुआ था इस दिन चंद्रमा वृष राशि और सूर्य सिंह राशि में प्रवेश हुए थे इसलिए इसी काल में श्री कृष्ण के जन्म की खुशी मनाई जाती है और इस दिन श्री कृष्ण को मुख्य रूप से माखन मिश्री का भोग लगाते हैं।

श्री कृष्ण के जन्म से जुड़ी कथा

श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का सबसे शक्तिशाली मानव अवतार कहा जाता है जिनका जन्म पृथ्वी से राक्षसों की बुराई खत्म करने के लिए हुआ था कहा जाता है 5200 साल पहले श्री कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था।

श्री कृष्ण का जन्म कंस नामक राजा के संरक्षण में जेल में हुआ था उनके जन्म के माता-पिता तो देवकी और वासुदेव थे परन्तु पालन-पोषण उनका नंद और यशोदा ने किया था। वासुदेव ने श्री कृष्ण का जन्म होते ही उन्हें नंद को सौंप दिया ताकि वह अपने पुत्र को कंस नामक राक्षस से बचा सके इसीलिए कृष्ण गोकुल में ही पले बढ़े और बड़े होकर श्री कृष्ण ने कंस का वध किया और इस संसार को उसके जुल्म से बचाया।

श्री कृष्ण के जन्मदिन के लिए लोग पूरा दिन उपवास रखते हैं और श्री कृष्ण के लिए विभिन्न प्रकार के भोग तैयार किए जाते हैं। जन्माष्टमी के दिन कान्हा जी की मूर्ति को दूध, घी, शहद, गंगाजल तथा तुलसी के पत्तों से बने पंचामृत से स्नान कराया जाता है।

भगवान कृष्ण के जन्म से भारतीय संस्कृति का गहरा जुड़ाव है औऱ भगवान कृष्ण ने भगवत गीता में मानव जीवन को सफल बनाने के बहुत से उपदेश दिए हैं। अतः जन्माष्टमी नामक त्योहार लोगों को बहुत भाता है जिसे बड़े ,बूढ़े और आजकल तो बच्चे भी बहुत उत्साह के साथ मनाते है।


जन्माष्टमी पर निबंध
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कब हुआ श्री कृष्ण का जन्म

मान्यता है कि कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि के समय हुआ था जिसको भगवान कृष्ण के जन्म उत्सव के रूप में मनाते हैं औऱ कृष्ण जन्माष्टमी को कृष्णाष्टमी, अष्टमी रोहिणी, श्रीकृष्ण जयंती आदि नामों से भी जाना जाता है।

Janmashtami-जन्माष्टमी क्यों मनाते हैं

श्री कृष्ण को सनातन धर्म के बहुत लोकप्रिय भगवान में से एक कहा जाता है उनके जीवन से जुड़ी घटनाओं तथा घटनाओं से जुड़ी प्रेरणाओ को याद करते हुए जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाता है।

भगवान श्री कृष्ण के कथना अनुसार जब-जब संसार मे धर्म की हानि होती है औऱ अधर्म की विर्द्धि होती है तब-तब भगवान श्री कृष्ण मानव के रूप में अवतार धारण कर फ़िर से संसार मे धर्म को स्थापित करते हैं इसलिए जन्माष्टमी को हर साल बनाया जाता है।

कृष्ण जन्माष्टमी पर बाजारों में रौनक

Janmashtami-जन्माष्टमी के त्योहार से 10-15 दिन पहले बाजारों में रौनक दिखनी शुरू हो जाती है जगह-जगह कृष्ण भगवान की अलग-अलग रूप से तैयार मूर्ति तथा सुंदर-सुंदर वस्त्र बिकते नजर आते हैं।

इसके अलावा लोग फूल माला, पूजा सामग्री, सजावट का सामान भी बहुत शौक से खरीदते हैं तथा आजकल तो लोग अपने बच्चों को भी राधा कृष्ण के रूप में तैयार करते हैं जिसके लिए जन्माष्टमी से पहले बाजार में विभिन्न प्रकार के राधा कृष्ण के कपड़े बिकते नजर आते हैं और आकर्षण का केंद्र बनते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी पर्व का महत्व

कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार हमारी सभ्यता व संस्कृति को दर्शाता है आजकल की युवा पीढ़ी को भारतीय सभ्यता ,संस्कृति से अवगत कराने के लिए इस लोकप्रिय पर्व को बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है।

इस पर्व के माध्यम से निरंतर आजकल की युवा पीढ़ी तथा घर के बड़े बुजुर्गों की पीढ़ी में आ रहे अंतर को रोकने तथा युवा पीढ़ी में आराध्य गुणों को देने का प्रयास होता है इस प्रकार के पर्व सनातन धर्म के आत्मा के रूप में देखे जाते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी की धूम पूरे भारत में

भारत देश में हिंदू समाज के लोग अलग-अलग रीति रिवाज को मानते हैं इसलिए यहां जन्माष्टमी के भी बहुत से रूप देखने को मिलते हैं जो पूरे देश को इस दिन रंगीन बना देते हैं।

जैसे- महाराष्ट्र मैं इस त्यौहार को दही हांडी के नाम से जानते हैं जगह-जगह दही हांडी फोड़ने का कार्यक्रम किया जाता है मथुरा वृंदावन, जो जन्माष्टमी का मुख्य केंद्र है यहां जन्माष्टमी के दिन रासलीला का आयोजन किया जाता है जिसको देखने लोग बहुत दूर-दूर से जाते हैं जिसकी चर्चा विदेशों तक होती है।

भारत के बड़े-बड़े मंदिरों में भी अलग-अलग कार्यक्रम के आयोजन किए जाते हैं विशेषकर एस्कॉन मंदिरों में इसकी रौनक दिल को भाती है तथा एस्कॉन मंदिरों में विदेशियों द्वारा भगवान श्री कृष्ण की आराधना को देखना आकर्षण का केंद्र बनती है।

निष्कर्ष:-

श्री कृष्ण ने जब धरती पर अवतार लिया तो बहुत से ऐसे कार्य किए जिसकी वजह से उड़ीसा में जगन्नाथ जी, राजस्थान में ठाकुर जी तथा और भी कई नामों से पूरे विश्व मे प्रसिद्ध हो गए श्री कृष्ण ने एक बहुत बड़ा उपदेश दिया जिसे हर व्यक्ति को अपने जीवन में उतारना चाहिए कि-” चाहे जो कुछ हो जाए व्यक्ति को सदैव अपने कर्म पथ पर चलते रहना चाहिए।”

संदेश:-

जैसे हर पर्व अपने आप में उल्लास से भरा हुआ और कोई संदेश देने वाला होता है वैसे ही जन्माष्टमी का त्योहार भी है कि मानव को जीवन के सभी रंगों को स्वीकारना चाहिए चाहे वह रंग प्रेम का हो, चाहे साहस का हो, कर्म करने का हो, अपने जीवन पथ पर चलते रहना चाहिए।

सीख:-

Janmashtami-जन्माष्टमी का पर्व श्री कृष्ण से जुड़ा है और यह हमें समय-समय पर भगवान श्री कृष्ण की दी गई सीख का ज्ञान कराता है जैसे कि श्री कृष्ण ने गीता में कहा है -“ना कोई मरता है और ना कोई मारता है, सभी निमित्त मात्र है। सभी प्राणी जन्म से पहले शरीर के बिना थे और मरने के बाद शरीर ही तो जाना है तो फिर शोक किस बात का?”


जन्माष्टमी पर निबंध
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जन्माष्टमी क्या है:-

Janmashtami-जन्माष्टमी पर्व को भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है जन्माष्टमी को भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी बहुत आस्था व उल्लास से मनाते हैं यह पर्व  पूरी दुनिया में पूर्ण श्रद्धा के साथ मनाते हैं श्री कृष्ण युगो-युगो से हमारी आस्था का केंद्र रहे हैं।

कैसे और कब मनाते हैं यह पर्व:-

हिंदू धर्म के शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण रोहिणी  नक्षत्र में अंतिम तिथि को जन्मे थे जो रक्षाबंधन के बाद आता है ज्योतिषों की माने तो इस दिन चंद्रमा वृक्ष राशि और सूर्य सिंह राशि में पहुंचा था ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्रीकृष्ण के श्रद्धा पूर्वक जन्म दिवस मनाने से खुशियां घर में वास करती हैं।

इस दौरान श्री कृष्ण के लिए झूले सजाए जाते हैं भक्तजन भजन-कीर्तन करते हैं उनके लिए विभिन्न प्रकार के भोग बनाए जाते हैं विशेष रूप से माखन मिश्री का प्रसाद बनाकर भोग लगाया जाता है तथा यह प्रसाद सभी भक्तजन में भी बांटा जाता है।

भगवान श्री कृष्ण का बचपन:-

जैसा कि हम सब जानते हैं कि जन्माष्टमी का त्योहार ना सिर्फ भारत में अपितु संपूर्ण विश्व में ना सिर्फ हिंदू बल्कि बहुत से विदेशियों द्वारा भी धूमधाम से मनाया जाता है कहा जाता है कि श्री कृष्ण देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र थे, परंतु देवकी और वासुदेव ने उन्हें यशोदा और नंद बाबा को सौंप दिया था।

क्योंकि श्री कृष्ण के मामा जो मथुरा नगरी का राजा था जिसका नाम कंस था वह बहुत ही अत्याचारी था। एक भविष्यवाणी को गलत साबित करने के लिए कंस देवकी और वासुदेव की सात संतानों का वध कर चुका था वह भविष्यवाणी यह थी कि कंस का विनाश देवकी और वासुदेव का पुत्र करेगा।

इसलिए श्री कृष्ण के जन्म के तुरंत बाद ही वासुदेव ने उन्हें नंद बाबा और यशोदा को सौंप दिया था जो गोकुल में रहते थे। श्री कृष्ण भगवान विष्णु का रूप है बस तभी से ही जन्माष्टमी का पर्व मनाने का रिवाज शुरू हुआ जो मथुरा और वृंदावन दोनों ही जगह बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।

जन्माष्टमी विश्व भर में मनाया जाता है:-

कृष्ण भगवान का जन्म दिन सिर्फ भारत में ही नहीं पूरे विश्व में बहुत धूमधाम से उल्लास के साथ मनाया जाता है जैसे- बांग्लादेश पर ढाकेश्वर मंदिर ,पाकिस्तान के कराची में स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर तथा अन्य बहुत से देश हैं जहां एस्कॉन मंदिर बने हुए हैं वहाँ भी यह उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। बांग्लादेश में तो यह उत्सव राष्ट्रीय उत्सव घोषित किया जा चुका है और इस दिन यहां राष्ट्रीय छुट्टी भी होती है।

कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत की पूजा की विधि:-

• कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार संपूर्ण भारत में अलग-अलग तरीकों से मनाते हैं।

• इस दिन का इंतजार तो बड़ो से ज्यादा बच्चे करते हैं।

• बच्चों को कृष्ण एवं राधा स्वरुप में झांकियां करना बहुत अच्छा लगता है।

• इस उत्सव पर ज्यादातर लोग पूरा दिन व्रत करते हैं।

• शाम को श्री कृष्ण भगवान के भजन गाते हैं औऱ घरों में सुंदर-सुंदर झूले तैयार किए जाते हैं जिनमें कृष्ण की प्रतिमा विराजमान की जाती है।

• पूरा दिन उपवास करके रात को 12 बजे, जो कृष्ण भगवान के जन्म का समय कहा जाता है उन्हें विभिन्न प्रकार के भोग लगाकर, सभी उपवास खोलते हैं।

• पूजा तथा भोग के लिए इस पर्व पर दूध, मक्खन, दही, पंचामृत,पंजीरी ,विभिन्न प्रकार के हलवे, चंदन, रोली, गंगाजल, तुलसी ,मिश्री आदि सामान चाहिए होता है।

• कहा जाता है कि जन्माष्टमी के व्रत का विधिपूर्वक पूजन करने से मनुष्य मोक्ष प्राप्त कर बैकुंठधाम जाता है।

• यह उपवास अपनी सामर्थ्य के अनुसार रखना चाहिए यह जरूरी नहीं कि पूरा दिन निर्जला उपवास रखें, फलाहार के आधार पर भी उपवास रखा जा सकता है, भगवान भक्ति करने को कहते हैं, भूखा रहने को नहीं।

निष्कर्ष:- अतः कृष्ण भगवान को द्वापर युग का युगपुरुष कहा जाता है और श्रीकृष्ण ने धरती पर अवतार लेकर बुराई का नाश किया इस अच्छाई को याद करने के लिए दुनिया भर में कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव, हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

संदेश:- Janmashtami-जन्माष्टमी हमें यह संदेश देती है कि जब भगवान स्वयं धरती पर अवतार लेते हैं तो इस धरती का कल्याण निश्चित है जैसे- भगवान के जन्म लेते ही कारागार के सभी ताले खुद खुल गए औऱ यमुना जी भी स्वयं भगवान का स्पर्श करने से शांत हो गई।

सीख:- कृष्ण भगवान ने भगवत गीता के द्वारा हमें बहुत ही सीख दी है जिनमें से एक मुख्य सीख यह भी है कि मुसीबत में या सफलता न मिलने पर हिम्मत मत हारो, समस्याओं का डटकर सामना करो। तभी इस मनुष्य जीवन को सफल बना सकते हो।


जन्माष्टमी पर निबंध
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प्रस्तावना:- भारत एक ऐसा देश है जहां सभी पर्व बहुत धूमधाम से मनाए जाते हैं जिनमें से जन्माष्टमी भी एक मुख्य त्योहार है जिसे मुख्य रूप से हिंदू धर्म के लोग मनाते हैं।

जनमाष्टमी के अलग-अलग रूप:-

Janmashtami-जन्माष्टमी मुंबई और पुणे में दही हांडी के नाम से प्रसिद्ध है यह बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है युवाओं के समूह, जिन्हें  गोविंदा पथक कहा जाता है ट्रकों में यात्रा करते हैं और फिर यही गोविंदा मिलकर दही हांडी फोड़ते हैं।

गुजरात के द्वारका शहर में स्थित द्वारकाधीश मंदिर में भी इसके नजारे देखने वाले होते हैं। पूर्वी राज्य उड़ीसा में, नवद्वीप में पुरी और पश्चिम बंगाल के आसपास लोग इसे उपवास के साथ मनाते हैं और आधी रात को पूजा करते हैं।

कैसे मनाते हैं जन्माष्टमी:- 

हिंदू मंदिरों ,घरों और सामुदायिक केंद्रों में दो दिनों में जन्माष्टमी का त्योहार मनाते हैं आधी रात से शुरू होने वाले उत्सव से पहले भक्तों द्वारा पूरे दिन का उपवास रखा जाता है इस अवसर पर कृष्णा जी की मूर्ति को पालने में रखकर दूध, घी, शहद, गंगाजल और तुलसी के पत्तों से बने पंचामृत से स्नान कराया जाता है।

फिर इस पंचामृत को भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। भजन कीर्तन, आरती, विभिन्न झांकियों का दृश्य मंदिरों की सजावट दिल को मोहने वाली होती है औऱ मंदिरों को इतना रोशन किया जाता है कि हर एक मंदिर की सुंदर आकृति आंखों में बसाने योग्य होती है।

कृष्ण जन्माष्टमी चेतना को जगाने का उत्सव है :-

श्री कृष्ण की समस्त लीलाएं हमारा मार्गदर्शन करती हुई जीवन की विषमताओं से सामंजस्य स्थापित करना सिखाती है कि हमें अनाचारी व्यवस्था का लोकतांत्रिक ढंग से विरोध करना आना चाहिए।

श्री कृष्ण भगवान गीता में स्वयं कहते हैं-‘ मैं अव्यक्त हूँ, अजन्मा हूँ’ इसलिए जन्माष्टमी का उत्सव स्वयं के भीतर भी कृष्ण जन्मोत्सव मनाने का ढंग यानी कृष्ण चेतना को जगाने का उत्सव है।

श्री कृष्ण ने जीवन के सभी रंगों को स्वीकारा:-

कृष्ण ने सदैव जीवन के सभी रंगों को अपनाया है वह प्रेम से कभी भागे नहीं। उन्होंने प्रेम को दिखाने के लिए रासलीला और संन्यास जैसे गंभीर विषय को भी समरसता देने का कार्य अपने जीवन में किया। इसलिए सनातन संस्कृति मे कृष्ण जी को पूर्ण अवतार मानते हुए परम पुरुष कहा है। कृष्ण सदैव कर्म के प्रति प्रतिबद्ध रहे इसलिए दूसरों को भी कर्म फल की चिंता से मुक्त रहने का संदेश देते हैं।

भगवान श्री कृष्ण के जन्म से जुड़ी कुछ बातें:-

1. श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद में कृष्ण अष्टमी को रात के 12 बजे हुआ था।

2. इनके जन्म के माता-पिता देवकी और वासुदेव थे।

3. इनका पालन-पोषण यशोदा और नंद बाबा ने किया था।

4. श्री कृष्ण को जन्म के तुरंत बाद ही वासुदेव ने उनको ले जाकर नंद बाबा और यशोदा को सौंप दिया था।

5. कंस को अपनी मृत्यु का भय था तथा इस भय के कारण कंस अपनी स्वयं की बहन की सारी संतानों को मारे जा रहा था।

6. श्री कृष्ण की मां देवकी, कंस की ही बहन थी।

7. भगवान विष्णु के आदेशानुसार, वासुदेव अपने आठवें पुत्र श्री कृष्ण को माता यशोदा और नंद बाबा को सौंप आए ताकि श्री कृष्ण कंस से सुरक्षित बच पाए।

8. तभी से उनके जन्म की खुशी को हर साल इतनी धूमधाम से मनाते हैं।

कंस के वध से जुड़ी आकाशवाणी:-

आज से लगभग 5000 वर्ष पूर्व श्री कृष्ण का जन्म हुआ था तब मथुरा में कंस नामक राजा राज्य करता था उसको अपनी बहन देवकी प्राणों से भी प्रिय थी औऱ देवकी का विवाह कंस के मित्र वासुदेव के साथ हुआ।

देवकी, कंस को इतनी प्रिय थी कि कंस स्वयं अपनी बहन का रथ हांक कर अपनी बहन को ससुराल छोड़ने जा रहा था तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र उसका काल बनेगा। इतना सुनते ही उसने रथ को वापस मोड़ लिया तथा देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया इसके बाद समय-समय पर एक-एक करके उसने देवकी की 7 संतानों को मार डाला।

श्री कृष्ण के व्यक्तित्व से मिलती है कितनी सीख:-

श्री कृष्ण के व्यक्तित्व में उनके गुण थे, जिसके कारण वह हिंदुओं के महानायक बने उन्होंने गरीब मित्र सुदामा से मित्रता निभाए, दुराचारी शिशुपाल का वध किया। पांडु पुत्र युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में आने वाले अतिथि गणों के पैर धोए और जूठी पतले उठाई।

कृष्ण जन्माष्टमी पर्व का महत्व:-

Janmashtami-जन्माष्टमी उत्सव का महत्व बहुत व्यापक है क्योंकि इस पर्व से हमारे मनुष्य जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है जैसे-” जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होगी, तब- तब मैं जन्म लूंगा ।” बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों ना हो एक दिन उसका अंत अवश्य होता है इत्यादि कथन हमारे जीवन को बहुत कुछ सीखने का प्रयास करते हैं जरूरत है थोड़ा साहस और हिम्मत दिखाने की ताकि इस मनुष्य जीवन को सफल बना सकें।

श्री कृष्ण की कुछ प्रमुख लीलाएं:-

1. श्री कृष्ण ने बाल्यावस्था में कई राक्षसों जैसे- पूतना, कालिया नाग, बकासुर, अघासुर आदि का नाश किया।

2. साक्षात भगवान होते हुए भी उन्होंने अपने बचपन में बहुत नटखट व्यवहार किए जैसे -मटके तोड़ देना ,चोरी करके माखन खाना, ग्वालो के साथ खेलना आदि।

3. कंस के वध के बाद कृष्ण द्वारकाधीश बने औऱ द्वारका के पद पर रहते हुए भी वह महाभारत के युद्ध में अर्जुन के सारथी बने और फ़िर अर्जुन को जीवन के कर्तव्यो का महत्व बताया व युद्ध में विजय दिलाई।

निष्कर्ष:- श्री कृष्ण हिंदुओं के आराध्य के रूप में पूजे जाते हैं इस कारणवश भारत के अलग-अलग क्षेत्र में कोई दही हांडी फोड़ कर मनाता है तो कोई रासलीला करता है इस आस्था के पर्व में भारत देश भक्ति में सराबोर हो जाता है।

संदेश:- श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व से हमें यह संदेश मिलता है कि पाप का नाश अवश्य होता है जब-जब संसार में कष्ट बढ़ते हैं, पाप, अत्याचार और भ्रष्टाचार बढ़ता है, उसे समाप्त करने के लिए कोई ना कोई महान शक्ति भी अवश्य जन्म लेती है इसलिए मनुष्य को सदा सत्कर्म में लगे रहना चाहिए।

सीख:- Janmashtami-जन्माष्टमी एक बहुत खुशी और अपनेपन का भाव लाने का त्योहार है इसे भगवान श्री कृष्ण की पूजा माना जाता है श्री कृष्ण ने गीता में सलाह और उपदेश दिए यह उपदेश हमें हमेशा अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देते हैं।

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आज का पंचांग देखें

तो दोस्तों हमने आपको Janmashtami- जन्माष्टमी के बारे में अलग-अलग लंबाई के निबंध लिखे हैं अगर आपको हमारे यह निबंध पसंद आते हैं तो आप अपनी आवश्यकता के अनुसार स्कूलों में इनका इस्तेमाल कर सकते हैं और साथ ही आपको भी इसके बारे में लोगों को अवगत करना चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया Janmashtami-जन्माष्टमी निबंध काफी पसंद आए होंगे तो अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आता है तो उसे सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और आप कोई सवाल है तो हमे कमेंट करें

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1 COMMENT

  1. गजब बेहतरीन पोस्ट , पोस्ट पढ़कर आपसे बहुत कुछ सीखने को मिला

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