Essay: धनतेरस पर निबंध 2020 में

धनतेरस दीवाली से कुछ दिन पहले आता हैं औऱ हिंदुओ का प्रमुख त्यौहार है जिसका सम्बंध धन के देवता से होता हैं यह न केवल धन बल्कि अच्छे स्वास्थ्य दोनों को प्रदान करता हैं इसलिए इसका महत्व औऱ बढ़ जाता है।

दीवाली हिंदुओं का सबसे प्रमुख त्यौहार होता है और धनतेरस दीवाली के पांच दिनों में से एक होता हैं यानी दीवाली की शरुवात धनतेरस से शरू हो जाती हैं और हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इसका अपना महत्व होता है।

essay dhanteras nibandh 10 line 100 words hindi

अक़्सर हमें स्कूलों व कॉलेजों में निबंध व भाषण-कविता लिखने के लिए दिए जाते है इसलिए आज हम आपको Dhanteras-धनतेरस की जानकारी प्रदान करने वाले है औऱ साथ ही ओणम पर छोटा, मीडियम औऱ लंबा हर तरह की लम्बाई के निबंध प्रदान करने वाले हैं उम्मीद है आपको हमारे द्वारा लिखे गए निबंध पसंद आयगे

Essay: Dhanteras Nibandh 10 line Hindi

1. धनतेरस हिंदू समुदाय द्वारा मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक मुख्य त्योहार है।

2. यह त्यौहार धन से संबंधित है।

3. धनतेरस शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है -धन तथा तेरस।

4. यह त्यौहार कार्तिक मास की त्रयोदशी को मनाया जाता है।

5. धनतेरस दीपावली से 2 दिन पूर्व मनाया जाने वाला त्यौहार है।

6. धनतेरस के दिन से दीपावली का त्यौहार मनाने की शुरुआत की जाती है।

7. यह त्यौहार भगवान धन्वंतरि के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।

8. इसी दिन विष्णु जी भगवान धन्वंतरी का रूप धारण कर अमृत कलश लेकर समुद्र में से प्रकट हुए थे।

9. भगवान धन्वंतरि को देवताओं के वैद्य के रूप में भी जाना जाता है।

10. इसी शुभ दिन भगवान धन्वंतरि ने देवताओं को अमृत पिला कर अमर कर दिया था।

Essay: Dhanteras Nibandh 10 line Hindi

1. धनतेरस को धन्वंतरि त्रयोदशी नाम से भी जाना जाता है।

2. धनतेरस के दिन को आयुर्वेद दिवस नाम से भी पुकारा जाता है।

3. धनतेरस के त्यौहार पर भगवान धन्वंतरी की मूर्ति अथवा प्रतिमा को पूर्व  दिशा की ओर मुंह करके पूजा जाता है।

4. धनतेरस के दिन नई झाड़ू खरीद कर पूरे घर की सफाई करना अच्छा माना जाता है।

5. धनतेरस का त्यौहार अंग्रेजी माह के कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर माह में मनाया जाता है।

6. धनतेरस के दिन ना सिर्फ भगवान धन्वंतरि का पूजन होता है बल्कि गणेश-लक्ष्मी, कुबेर भगवान के साथ ही साथ मृत्यु लोक के राजा यमराज का भी पूजन किया जाता है।

7. पूरे साल में धनतेरस का ही एकमात्र दिन होता है जब यमराज को भी पूजा जाता है।

8. भगवान धन्वंतरि की पूजा के समय मुख्य रूप से खीर का भोग लगाया जाता है।

9. यह भोग भी चांदी या सोने के बर्तन में लगाना चाहिए।

10. धनतेरस के दिन उधार खरीदारी करना घर में धन की कमी लाता है।

Essay: Dhanteras Nibandh 10 line Hindi

1. दीपावली का त्यौहार 5 दिनों तक मनाया जाता है जिसमें से पहला दिन धनतेरस का होता है।

2. इस दिन से ही लक्ष्मी माता का पूजन शुरू हो जाता है व्यापारियों के लिए यह दिन बहुत विशेष होता है क्योंकि इस दिन उनको अपने व्यवसाय में विशेष लाभ की उम्मीद होती है।

3. लक्ष्मी माता से प्रार्थना की जाती है कि वह सदैव हमारे घरों में विराजमान रहे।

4. भगवान धन्वंतरी से प्रार्थना होती है कि वह हमारे संपूर्ण परिवार को रोगों से मुक्त करें।

5. कुबेर भगवान से प्रार्थना होती है कि वह हमें वैभव प्रदान करें।

6. यमराज के समक्ष प्रार्थना स्वरूप निवेदन होता है कि वह हमारे संपूर्ण परिवार को दीर्घायु प्रदान करें तथा किसी की भी अकाल मृत्यु ना हो।

7. धनतेरस के दिन नए बर्तन खरीदने की परंपरा है।

8. पहले के समय में तो लोग चांदी ,सोना ,तांबा व पीतल के बर्तन खरीदते थे परंतु जैसे-जैसे आधुनिक युग आता जा रहा है लोगों की खरीदारी भी बदलती जा रही है।

9. आजकल लोग इस दिन वाहन, मोबाइल आदि सामान खरीदने में रुचि लेते हैं परंतु तब भी चांदी या पीतल का बर्तन इस दिन खरीदना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है।

Essay: Dhanteras Nibandh 10 line Hindi

1. धनतेरस का त्यौहार ना सिर्फ धन से जुड़ी पूजा का होता है बल्कि स्वास्थ्य से संबंधित भी होता है।

2. धनतेरस का त्यौहार भगवान धन्वंतरी से संबंधित है।

3. भगवान धन्वंतरी के अनुसार किसी भी मनुष्य के लिए स्वास्थ्य सबसे पहले आना चाहिए।

4. ‘पहला सुख निरोगी काया ,दूजा सुख घर में माया’ यही कहावत सब को अपने जीवन में लानी चाहिए।

5. धनतेरस के त्योहार से यही संदेश मिलता है कि हमें धन माया का पूजन जरूर करना चाहिए ताकि लक्ष्मी माता हमारे घर में सदैव वास करें परंतु उससे पहले भी भगवान धनवंतरी से हमें निरोगी जीवन देने की प्रार्थना करनी चाहिए।

6. इस दिन पीतल का कलश खरीदना अत्यधिक शुभ होता है क्योंकि भगवान धन्वंतरी भी समुद्र मंथन के समय पीतल के कलश में अमृत लेकर प्रकट हुए थे।

7. धनतेरस के दिन से ही 3 दिन तक चलने वाला गोत्रिरात्रि व्रत प्रारंभ होता है।

8. धनतेरस का त्यौहार घरों में सुख ,समृद्धि तथा अच्छा भाग्य लाता है।

9. गांव में किसान अपने मवेशियों को सजाते हैं क्योंकि वही उनके पास धन प्राप्ति का स्त्रोत है।

10. दक्षिण भारत में लोग गौ माता को लक्ष्मी माता का स्वरूप मानते हैं इसलिए वह धनतेरस के दिन गौ माता की विशेष पूजा करते हैं।


Essay: Dhanteras Nibandh 100 Word Hindi

धनतेरस हिंदू समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार होता है यह त्यौहार कार्तिक मास जोकि हिंदू कैलेंडर का महीना होता है उसके तेरहवें दिन  मनाया जाता है।

धनतेरस के त्यौहार से दीपावली के त्यौहार की खुशबू सी आनी मानो शुरू हो जाती है और दीपावली से पहले इसका दिन निश्चित होता है यह हर वर्ष दीपावली से 2 दिन पूर्व त्यौहार मनाया जाता है।

जैसा कि नाम से ही ज्ञात हो रहा है कि यह धन से जुड़ा त्यौहार है इस त्योहार पर अपने घर एवं व्यवसाय में समृद्धि लाने के लिए पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन खरीदारी करना शुभ माना जाता है कहा जाता है कि इस दिन की गई खरीदारी कभी नुकसान नहीं पहुंचाती चाहे वह कितनी ही महंगी क्यों ना हो।

इस त्यौहार से पहले सभी लोग अपने-अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं क्योंकि कहा जाता है कि लक्ष्मी जी भी वहां वास करती हैं जहां घरों को स्वर्ग बना कर रखा जाता है तथा धनतेरस की पूजा दिन ढलने अर्थात शाम के समय संपूर्ण परिवार के साथ मिलजुल कर की जाती है।


Essay: Dhanteras Nibandh 150 Word Hindi

धनतेरस हिंदू कैलेंडर के कार्तिक मास की त्रयोदशी को मनाया जाने वाला ऐसा त्यौहार हैं जिस पर सभी लोग अपने-अपने घरों में लक्ष्मी माता के आगमन के लिए पूजा करते हैं औऱ इसी त्यौहार को धनतेरस के नाम से जाना जाता है।

धनतेरस पर गणेश, लक्ष्मी, कुबेर देव की पूजा की जाती है तथा धनतेरस नामक त्यौहार को संपूर्ण भारत में अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है हर कोई अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार इस दिन कोई न कोई खरीदारी जरूर करता है।

चाहे कोई नए बर्तन खरीदे या चांदी की कोई वस्तु आदि इसके साथ-साथ लोग धनतेरस के त्यौहार पर वाहन खरीदना भी पसंद करते हैं। कुछ नियम इस दिन के लिए अधिकतर सब जगह एक से होते हैं जैसे- सायाकाल के समय घरों व दुकानों पर दीपक जलाकर द्वार पर रखना।

यह त्यौहार भगवान धनवंतरी के प्रकट होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है धनतेरस से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि इस दिन कांच का सामान खरीदना शुभ नहीं होता है इसलिए धनतेरस पर कांच की वस्तुओं की खरीददारी से बचना चाहिए।

यह धनतेरस नाम का त्योहार अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर माह में मनाया जाता है इसको धनतेरस के साथ-साथ धनत्रयोदशी या धन्वंतरि त्रयोदशी नाम से भी पुकारा जाता है। यह एक ऐसा त्यौहार है जिस पर लोग घर में समृद्धि लाने के लिए लक्ष्मी माता के पूजन के साथ-साथ यमराज का भी पूजन करते हैं कि वह हमें दीर्घायु प्रदान करें।


Essay: Dhanteras Nibandh 300 Word Hindi

धनतेरस एक ऐसा त्यौहार है जो एक रूप से दीपावली की शुरुआत कहा जाता है यह त्योहार दिवाली से 2 दिन पहले मनाया जाता है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह धन से जुड़ा त्यौहार तथा कार्तिक माह की कृष्ण त्रयोदशी को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है यह त्योहार सोने व चांदी की खरीदारी के लिए संपूर्ण भारत में जाना जाता है।

धनतेरस का त्यौहार मनाने की मान्यता कहां से शुरू हुई:-

पुराणों की मानें तो यह त्योहार भगवान धनवंतरी के प्रकट होने के उपलक्ष में मनाया जाता है कहा जाता है कि धनतेरस का ही वह शुभ दिन था जब भगवान धन्वंतरी समुद्र मंथन के समय अमृत कलश लेकर देवताओं के पास पहुंचे थे तथा उन्होंने देवताओं को अमृत पान करवाकर अमर कर दिया था यही कारण है कि हर वर्ष भगवान धन्वंतरी का पूजन इतने हर्ष व उल्लास के साथ किया जाता है।

धनतेरस से संबंधित:-

1. जैन समुदाय में भी धनतेरस के त्यौहार का बहुत महत्व है।

2. जैन समाज के लोग इस त्योहार को धन्य तेरस या ध्यान तेरस के नाम से भी पुकारते हैं।

3. भगवान धन्वंतरी को देवताओं के चिकित्सक के रूप में भी जाना जाता है।

4. इस दिन भगवान धनवंतरी के साथ-साथ गणेश, लक्ष्मी, कुबेर भगवान व यमराज का पूजन भी किया जाता है।

5. पहले के समय में इस दिन नए बर्तन खरीदे जाते थे तथा बर्तनों के बाद सोने व चांदी के सिक्के खरीदने का चलन शुरू हुआ।

6. आजकल तो सोने व चांदी के सिक्कों की जगह वाहन, मोबाइल आदि की खरीदारी का चलन हो गया है।

7. इस दिन भगवान धन्वंतरि व लक्ष्मी मां का पूजन करके यह प्रार्थना की जाती है कि वह हमारे घर में समृद्धि प्रदान करें तथा परिवार के सभी सदस्यों को अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करें।

यह एक धन, समृद्धि, उजाले से भरा त्यौहार है जो भगवान धनवंतरी के पूजन से जुड़ा है चाहे संपूर्ण भारत में इसको मनाने का तरीका अलग-अलग हो परंतु हर क्षेत्र में इस त्यौहार के द्वारा नई उमंग भर दी जाती है। चाहे हमारे पास कम धन हो ,तब भी हमें उस कम धन से भी कुछ ना कुछ सोने व चांदी की खरीददारी अवश्य करनी चाहिए क्योंकि यह बहुत शुभ होता है।

निष्कर्ष:- धनतेरस का त्यौहार हमें उतनी ही श्रद्धा के साथ मनाना चाहिए जितनी श्रद्धा के साथ हम धन कमाने के लिए प्रयास करते हैं क्योंकि यह धन के देवता का त्यौहार माना जाता है।

संदेश:- धनतेरस के त्यौहार का मतलब यह कदापि नही हैं कि आपकों सोना व चांदी की खरीदारी करनी हैं चूँकि इस दिन खरीदा गया समान शुभ माना जाता है इसलिए आप अपनी आवश्यकताओं अनुसार कुछ भी खरीद सकते है।

सीख:-धनतेरस के त्यौहार से हमें यह सीख लेनी चाहिए कि जिस प्रकार इस दिन सभी देवी-देवताओं को घर मे विराजमान करके पूजा अर्चना की जाती है उसी प्रकार सम्पूर्ण परिवार को सदैव मिल जुलकर रहना चाहिए तभी घर मे लक्ष्मी और धन का आगमन होता है।


Essay: Dhanteras Nibandh 600 Word Hindi

धनतेरस का अर्थ क्या है:-

धनतेरस एक त्यौहार के रूप में की जाने वाली पूजा है जिस पर लोग पूजा अर्चना करके अपने धन में वृद्धि करने के लिए भगवान धन्वंतरी एवं लक्ष्मी माता से प्रार्थना करते हैं कहा जाता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि का पूजन करने वाले के धन में 13 गुना वृद्धि होती है।

कब मनाया जाता है धनतेरस का त्यौहार:-

1. हिंदू कैलेंडर की माने तो यह त्यौहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाते हैं।

2. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार अक्टूबर/नवंबर में मनाया जाता है।

3. अन्य शब्दों में कहें तो यह त्योहार दीपावली से 2 दिन पहले मनाया जाता है।

धनतेरस के त्योहार का महत्व:-

जैसा कि शब्द से ज्ञात हो रहा है कि धनतेरस शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। धन तथा तेरस ,धन का अर्थ ‘समृद्धि’ तथा तेरस का अर्थ ‘तेरहवा’ दिन।

धनतेरस के त्यौहार का व्यापारियों के जीवन में एक अलग ही महत्व होता है क्योंकि व्यापारियों को इस दिन से अपने अपने व्यापार में उन्नति होने की उम्मीद होती है क्योंकि इस दिन से ही भगवान गणेश, लक्ष्मी माता व कुबेर की पूजा की शुरुआत कर दी जाती है तथा यह पूजा दिवाली तक चलती रहती है।

कहा जाता है कि इस दिन पीतल का बर्तन खरीदना भी बहुत शुभ होता है क्योंकि जब समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरी अमृत लेकर प्रकट हुए थे वह अमृत भी पीतल के कलश में ही था औऱ मान्यताओं की मानें तो जिसने धनतेरस के दिन नई चीजें घर में लाई है उसके घर से लक्ष्मी और कुबेर कभी बाहर नहीं जाते।

धनतेरस से जुड़े कुछ तथ्य:-

1. धनतेरस के दिन से ही दीपावली के त्यौहार को मनाना शुरू कर दिया जाता है।

2. धनतेरस के दिन पूजा करते हुए प्रत्येक व्यक्ति यही प्रार्थना करता है कि उसके घर में लक्ष्मी जी सदा वास करें तथा घर के प्रत्येक सदस्य का स्वास्थ्य अच्छा बना रहे।

3. धनतेरस को धन्वंतरि त्रयोदशी नाम से भी जाना जाता है।

4. पुराणों के अनुसार धनतेरस के दिन हमें धन प्राप्ति करवाने वाली लक्ष्मी माता, रोगों से मुक्त करवाने वाले भगवान धन्वंतरी, मृत्युलोक में ले जाने वाले यमराज व समाज में वैभव दिलवाने वाले भगवान कुबेर की पूजा होती है।

5. धनतेरस के दिन कौड़ी खरीद कर उसे भी लक्ष्मी माता की पूजा में रखना चाहिए यह घर में धन का अभाव नहीं होने देती।

6. मान्यताओं की मानें तो धनिया खरीद कर लक्ष्मी पूजा के समय साथ रखना शुभ होता है।

7. धनतेरस की पूजा के समय शंख बजाने से पूरे घर में सुख शांति का वातावरण हो जाता है।

8. धनतेरस के दिन ना उधार देना चाहिए और ना उधार लेना चाहिए यह अशुभ माना जाता है।

9. मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन खरीदा गया बर्तन, घर में खाली नहीं लाना चाहिए यह अशुभ होता है इससे घर में समृद्धि नहीं आती उसके साथ कुछ मीठा जरूर लाना चाहिए।

10. धनतेरस के दिन को आयुर्वेद दिवस के नाम से भी जाना जाता है।

कैसे करते हैं धनतेरस की पूजा:-

1. धनतेरस की पूजा के लिए भगवान धन्वंतरि की मूर्ति अथवा तस्वीर को ऐसे विराजमान करना चाहिए कि उसका मुख पूर्व  की ओर हो।

2. भगवान धन्वंतरी की मूर्ति पर फूल, अबीर, रोली व चावल आदि चढ़ाए जाते हैं।

3. भगवान धन्वंतरी को मुख्य रूप से खीर का भोग लगाया जाता है।

4. कोशिश करनी चाहिए कि जिस बर्तन में भोग लगाएं वह बर्तन सोने या चांदी का होना चाहिए।

5. पान, लोंग, सुपारी व तुलसी आदि चीजें भगवान धन्वंतरी के चरणों में अर्पण की जाती हैं।

6. अंत में दक्षिणा और फल चढ़ाकर भगवान धनवंतरी की आरती उतारते हैं।

धनतेरस का त्यौहार मनाने के पीछे तर्क:-

धनतेरस का त्यौहार दीपावली के त्यौहार की शुरुआत के रूप में जाना जाता है जिसमें दीपावली का त्यौहार कुल 5 दिनों तक चलता है तथा दीपावली से 2 दिन पूर्व धनतेरस नाम का यह त्यौहार मनाया जाता है।

पुराणों की मानें तो इस दिन विष्णु जी भगवान धनवंतरी का रूप धारण कर समुद्र से अमृत कलश लेकर निकले थे तथा सभी देवताओं को अमृत पिला कर अमर कर दिया था यह संपूर्ण घटना, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को हुई थी इसीलिए इस त्यौहार का नाम धनतेरस पड़ा।

इस दिन हमें मृत्यु तक ले जाने वाले यमराज का भी पूजन किया जाता है यह पूजा मुख्य रूप से रात के समय की जाती है जिसमें रात के समय एक दीपक घर के द्वार पर जला कर रख दिया जाता है तथा यम से प्रार्थना की जाती है कि वह हमारे परिवार के प्रत्येक सदस्य को दीर्घायु प्रदान करें।

निष्कर्ष:- धनतेरस एक सुख ,समृद्धि, शांति आदि को अपने घरों में बसाने का मौका होता है जो त्योहार के रूप में मनाया जाता है इस दिन भूलकर भी कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे लक्ष्मी माता का निरादर हो, हमें इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा सच्चे व साफ मन से करनी चाहिए ताकि वह प्रसन्न होकर हमें व हमारे परिवार के प्रत्येक सदस्य को रोग मुक्त करें।

संदेश:- धनतेरस का त्यौहार यह संदेश देता है कि चाहे कोई अमीर हो या गरीब उसको यह धनतेरस की पूजा सच्ची भावना से करनी चाहिए क्योंकि चढ़ावा चाहे कम हो पर श्रद्धा ज्यादा होनी चाहिए क्योंकि लक्ष्मी माता व भगवान धन्वंतरि सच्ची श्रद्धा से पूजा करने वाले को धरती से उठाकर अंबर तक पहुंचा सकते हैं।

सीख:- धनतेरस का त्यौहार सिखाता है कि हमें हर वर्ष अपने पास एकत्रित लक्ष्मी (धन) की पूजा-अर्चना करनी चाहिए परंतु उस धन पर घमंड नहीं करना चाहिए क्योंकि लक्ष्मी माता चाहे तो राजा को भिखारी व भिखारी को राजा भी बना सकती हैं।

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तो दोस्तों हमने आपको Dhanteras-धनतेरस के बारे में अलग-अलग लंबाई के निबंध लिखे हैं अगर आपको हमारे यह निबंध पसंद आते हैं तो आप अपनी आवश्यकता के अनुसार स्कूलों में इनका इस्तेमाल कर सकते हैं और साथ ही आपको भी इसके बारे में लोगों को अवगत करना चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया Dhanteras-धनतेरस पर निबंध काफी पसंद आए होंगे तो अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आता है तो उसे सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल है तो हमे कमेंट करें

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