Essay: करवा चौथ पर निबंध 2021 में

करवा चौथ का व्रत हर साल महिलाओं द्वारा अपने पतियों के लिए किया जाता हैं और यह न केवल एक त्यौहार है बल्कि यह पति-पत्नी के पवित्र रिश्तों का पर्व हैं जो प्राचीन काल से चलती आ रही है।

कहने को तो करवा चौथ का त्यौहार एक व्रत है लेकिन यह नारी शक्ति औऱ उसकी क्षमताओं का सवश्रेष्ठ उदहारण हैं इसलिए क्योंकि नारी अपने दृढ़ संकल्प से यमराज से भी अपने पति के प्राण ले आती हैं तो फ़िर वह क्या नहीं कर सकती हैं।

essay karwa chauth nibandh 10 line 100 words hindi

करवा चौथ का त्यौहार सम्पूर्ण भारत में पत्नियों द्वारा रखा जाता हैं और इस व्रत को रखने के लिए पूरे विधि-विधान का ध्यान रखा जाता हैं औऱ उसी अनुसार करवा चौथ का व्रत सम्पूर्ण किया जाता हैं जिसमें अपने पति की लम्बी आयु की कामना की जाती हैं।

अक़्सर हमें स्कूलों व कॉलेजों में निबंध व भाषण-कविता लिखने के लिए दिए जाते है इसलिए आज हम आपको Karwa Chauth-करवा चौथ की जानकारी प्रदान करने वाले है औऱ साथ ही ओणम पर छोटा, मीडियम औऱ लंबा हर तरह की लम्बाई के निबंध प्रदान करने वाले हैं उम्मीद है आपको हमारे द्वारा लिखे गए निबंध पसंद आयगे

Essay: Karwa Chauth Nibandh 10 line Hindi

1. यह व्रत सुहागन महिलाएं करती हैं।

2. व्रत से 10-15 दिन पहले ही बाजारों में महिलाओं की भीड़ दिखने लगती है।

3. इस व्रत में सूर्य उदय से पूर्व ही खाना खाया जाता है जिसे सरगी कहते हैं।

4. सरगी बहुओं के लिए उनके पति की मां (सास) बनाती है।

5. सरगी में महिलाएं कुछ भी खा सकती हैं बस उस भोजन में लहसुन या प्याज ना हो सरगी में विशेष रुप से सेविया, फल एवं मेवे खाए जाते हैं।

6. सूर्य उदय के साथ प्रारंभ होकर इस व्रत का अंत चंद्रमा देखकर ही किया जाता है।

7. यह व्रत निर्जला रखा जाता है तथा सरगी के बाद ना कुछ खाया जाता है ना पिया जाता है।

8. यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं।

9. पूरे दिन व्रत करके शाम को अच्छे से तैयार होकर सोलह सिंगार करके महिलाएं इस व्रत से जुड़ी कथा सुनती है।

10. यह त्यौहार हर वर्ष हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह की चतुर्थी को मनाया जाता है।

Essay: Karwa Chauth Nibandh 10 line Hindi

1. करवा चौथ का व्रत ना सिर्फ सुहागनें बल्कि कुछ कुंवारी लड़कियां भी करती हैं ताकि उनको अच्छा वर मिले।

2. करवा चौथ पति-पत्नी के बीच के स्नेह एवं प्यार को और बढ़ाता है।

3. करवा चौथ अंग्रेजी महीनों के हिसाब से अक्टूबर-नवंबर में आता है।

4. इस व्रत पर महिलाएं हाथों व पैरों में मेहंदी लगाती हैं।

5. इस दिन सोलह सिंगार करना अनिवार्य होता है।

6. महिलाओं को कोशिश करनी चाहिए कि वह इस पर्व पर लाल रंग के वस्त्र धारण करें क्योंकि लाल रंग सुहागन का कहा जाता है।

7. यह त्योहार महिलाओं की हिम्मत को दर्शाता है कि किस प्रकार वह पूरे दिन बिना कुछ खाए और पिए अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।

8. इस व्रत से जुड़ी प्रत्येक कथा सुहागन महिला की है कि किस प्रकार एक सुहागन की शक्ति अपने पति को मृत्यु से भी खींच लाती है।

9. इस व्रत पर सभी महिलाएं ज्यादा से ज्यादा सुंदर लगना चाहती हैं।

10. इस व्रत पर महिलाओं को चंद्रमा के आने का बहुत ही बेसब्री से इंतजार रहता है क्योंकि यह व्रत सूर्योदय से शुरू होता है एवं चंद्रमा के दर्शन एवं पूजा करके ही समाप्त होता है।

Essay: Karwa Chauth Nibandh 10 line Hindi

1. करवा चौथ जो कहने को तो महिलाओं का त्योहार है परंतु इस त्यौहार की पूर्णता पति के साथ ही होती है।

2. यह त्योहार दीपावली से 9 दिन पूर्व मनाया जाता है एवं त्योहार से दसवें दिन दीपावली होती है।

3. इस त्योहार पर करवा( मिट्टी का बर्तन )इसका अपना अलग ही महत्व होता है इस दिन करवे की बहुत ही सुंदर-सुंदर ढंग से पूजा की जाती है।

4. करवा चौथ की कथाएं सब सुहागन महिलाओं से जुड़ी हैं जैसे -वीरावती, करवा आदि।

5. करवा चौथ मुख्य रूप से उत्तर भारत, पंजाब, हरियाणा जैसे क्षेत्रों में प्रचलित था।

6. ना सिर्फ भारत जहां-जहां भारतीय रहते हैं चाहे वह विदेश में हो इस त्यौहार को बहुत हर्ष के साथ मनाते हैं।

7. इस व्रत की कथा करते हुए भगवान शिव एवं पार्वती माता का पूजन किया जाता है।

8. सभी महिलाओं को यह पर्व खूब पसंद आता है क्योंकि आजकल इस पर्व पर महिलाओं को उपहार देने की मानो जैसे रीत सी बन गई है।

9. यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है।

10. सरगी से इस व्रत का आरंभ होता है एवं चंद्रमा की पूजा करके इसका अंत।

Essay: Karwa Chauth Nibandh 10 line Hindi

1. करवा चौथ बहुत से रीति-रिवाजों एवं परंपराओं से परिपूर्ण है।

2. इस व्रत को करने वाली महिलाएं आज के दिन कुछ गतिविधियां नहीं कर सकती।

3. वह गतिविधियां इस प्रकार हैं -किसी सोते को जगाना नहीं चाहिए, कपड़े धोने नहीं चाहिए, कपड़े सिलाई नहीं करनी चाहिए, रूठे को मनाना नहीं चाहिए आदि।

4. शाम को पूजा करते समय महिलाएं एकत्रित होकर घेरा बनाकर बैठती हैं।

5. कथा सुनती है तथा बीच में 7 बार अपनी पूजा की थाली को घुमाते हुए करवा चौथ से जुड़ा गीत गाती है।

6. रात को चंद्रमा का पूजन कर वह पूजा की थाली में स्थित समान उपहार व कुछ (पैसे )दक्षिण स्वरूप अपनी सास को सभी बहुएं देती हैं।

7. सांस अपनी बहू को सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद देती हैं।

8. यह त्योहार ना सिर्फ पति-पत्नी बल्कि सास-बहू के रिश्ते में भी प्रेम जगाता है।

9. करवा चौथ पत्नी का पति के प्रति प्यार को दर्शाता है जिसकी लंबी उम्र के लिए पत्नी व्रत रखती है।

10. यह एक ऐसा दिन होता है जिसमें पूरे दिन बिना कुछ खाए पिये भी महिलाओं के चेहरे चमकते नजर आते हैं यह उनके प्यार को दर्शाता है।


Essay: Karwa Chauth Nibandh 100 Word Hindi

करवा चौथ संपूर्ण भारत की महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला बहुत ही प्यारा त्यौहार है जो विशेष रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है।

करवा चौथ एक व्रत होता है जो महिलाओं द्वारा रखा जाता है जिस व्रत के द्वारा महिलाएं अपने-अपने पति की दीर्घायु एवं उनकी सभी कामना पूर्ति की प्रार्थना करती है। यह व्रत निर्जला रखा जाता है तथा यह केवल शादीशुदा महिलाएं ही नहीं अपितु बहुत सी कुंवारी लड़कियां भी रखती हैं जिससे भगवान प्रसन्न होकर उन्हें अच्छा वर दे।

यह त्यौहार हिंदू माह के कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाता है महिलाओं का सोलह सिंगार इस व्रत पर खास रूप से देखने को मिलता है। संपूर्ण दिन व्रत करने के बाद सुहागन औरतें भगवान शिव और पार्वती की पूजा करती है तथा कथा जो इस व्रत से जुड़ी है वह सुनती हैं। अंत में रात को चंद्रमा की पूजा कर तथा सभी रीति-रिवाजों को पूरण कर अपना व्रत खोलती हैं।


Essay: Karwa Chauth Nibandh 150 Word Hindi

अपने पति की दीर्घायु के लिए रखा जाने वाला व्रत करवा चौथ कहा जाता है सभी सुहागन महिलाओं द्वारा यह व्रत बहुत ही बड़े पर्व की तरह मनाया जाता है। करवा चौथ नाम का यह त्योहार हमारे हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाते हैं यह त्यौहार ना सिर्फ भारत में अपितु विदेशों में रह रही भारतीय महिलाओं द्वारा भी मनाया जाता है।

आजकल के आधुनिक युग में तो यह त्यौहार और अधिक उत्साह व जोश के साथ मनाया जाता है महिलाएं एक-दूसरे से अधिक सुंदर लगने के लिए महंगे-महंगे कपड़े पहनती हैं।

इस व्रत के लिए महिलाएं हाथों एवं पैरों पर मेहंदी लगाती हैं तथा लाल रंग के वस्त्र धारण करती हैं वैसे तो लाल रंग इस त्योहार का मुख्य रंग है परंतु आजकल महिलाएं अपनी इच्छा को ज्यादा महत्व देती हैं तथा अपनी इच्छा अनुसार ही वस्त्र के रंग तय करती हैं।

करवा चौथ के इस व्रत से बहुत सी कथाएं जुड़ी है इन सब कथाओं में पति-पत्नी के जीवन की व्याख्या की गई है तथा सब कथाओं में यही बताया है कि पत्नी अगर अपने मन में दृढ़ निश्चय कर ले तो अपने पति को मृत्यु  से भी बचा सकती है।

पूरे दिन व्रत करके बिना अन्न जल ग्रहण किए पत्नियां अपने पतियों के लिए व्रत करती हैं शाम को सज सावर कर सुंदर-सुंदर वस्त्र आभूषण पहनकर पूरे सोलह सिंगार करके यह महिलाएं करवाचौथ से जुड़ी कथा सुनने जाती हैं।

चंद्रमा के दर्शन कर अपने पति की आरती उतारकर एवं चंद्रमा की पूजा करके पूर्ण विधि के साथ अपना व्रत खोलती हैं आज-कल के युग में पतियों द्वारा पत्नियों को इस पर्व पर उपहार भी दिए जाते हैं।


Essay: Karwa Chauth Nibandh 300 Word Hindi

करवा चौथ उत्तर भारत की महिलाओं द्वारा मनाए जाने वाला एक ऐसा पर्व जो पूजा-पाठ के साथ-साथ सजने सवरने का भी मौका देता है। उत्तर भारत तो बस कहने मात्र का है क्योंकि अब यह त्यौहार संपूर्ण देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी बहुत उत्साह से मनाया जाता है।

करवा चौथ के दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए सूर्य उदय होने से पूर्व सरगी खाकर अपना व्रत प्रारंभ करती है तथा यह व्रत तब तक जारी रहता है जब तक वह महिलाएं चंद्रमा के दर्शन करके उसका पूजन ना कर ले।

करवा चौथ कैसे मानते हैं

1. यह त्यौहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक के महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।

2. व्रत खोलने का दृश्य भी बहुत मनमोहक होता है।

3. एक हाथ में छन्नी पकड़ कर चंद्रमा को देखा जाता है तथा साथ ही साथ दूसरे हाथ से चंद्रमा को जल अर्पित किया जाता है।

4. फिर पत्नियां पतियों के पैर छूती हैं तथा अंत में पति अपने हाथों से अपनी अपनी पत्नियों को पानी पिला कर उनका व्रत खुलवाते हैं।

5. रात होने से पूर्व शाम का समय सभी महिलाओं को इस व्रत में बहुत भाता है क्योंकि शाम का पूरा समय महिलाएं बहुत अच्छे से सजती सवरती हैं।

6. सज संवरकर सभी महिलाएं मिलकर करवा चौथ से जुड़ी कथा सुनती हैं। कथा सुनने के साथ-साथ वह भगवान से प्रार्थना करती हैं कि उनका सुहाग हमेशा यूं ही बना रहे तथा सालों साल एक दूसरे का साथ निभाते रहे।

7. करवा चौथ की कथा में वीरवती की कथा बहुत ही प्रचलित है।

8. करवा चौथ का व्रत दीपावली से 9 दिन पहले होता है तथा दसवें दिन दीपावली मनाई जाती है।

9. यह त्योहार(व्रत)हिंदू समुदाय की विवाहित महिलाओं के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण व्रत कहा जाता है।

10. करवा चौथ के त्यौहार को मनाने के लिए 10-15 दिन पहले ही बाजारों में भीड़ दिखाई देने लगती है क्योंकि महिलाएं एक से बढ़कर एक चीजें अपने लिए खरीदना शुरू कर देती हैं।

11. करवा चौथ के व्रत में सरगी का भी अपना एक अलग ही महत्व है सरगी उस रीत को कहते हैं जिसमें महिलाएं करवा चौथ वाले दिन सूर्य उदय से पूर्व उठकर स्नान आदि कर अपनी सास के द्वारा बनाई सरगी खाकर अपने व्रत को शुरू करती हैं सरगी में फल व सेंवी दो चीजें महत्वपूर्ण होती है।

12. जितने प्यार से सांसे अपनी बहू के लिए सरगी बनाती है उतने ही उत्साह एवं प्यार के साथ शाम को पूजा के बाद बहुएं अपनी सांसों को उपहार एवं पूजा में रखी थाली का समान आदि देती है एवं अपने सास-ससुर के चरण स्पर्श करती हैं तथा सासें अपनी बहुओं को सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद देती है।


Essay: Karwa Chauth Nibandh 500 Word Hindi

प्रस्तावना:-

करवा चौथ एक ऐसा त्यौहार है जो वर्षों से हर वर्ष महिलाओं द्वारा बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है औऱ कुछ वर्षों से तो इस त्योहार को मनाने की अवधारणाएं बदल गई है। करवा चौथ हर साल हिंदू कैलेंडर के कार्तिक महीने में आता है तथा कार्तिक महीने के चौथे दिन व्रत रखा जाता है।

इस व्रत में पत्नियां अपने पतियों के लिए पूरे दिन निर्जल उपवास करती हैं हाथों व पैरों पर मेहंदी लगाती हैं व संपूर्ण सोलह सिंगार करना इस दिन की विशेषता होती है। सुंदर-सुंदर आभूषण पहनना आज के दिन महिलाओं को खूब भाता है इस व्रत की पूजा में भगवान शिव एवं पार्वती माता की पूजा होती है।

करवा चौथ अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर माह में आता है दीपावली से भी इस त्यौहार की तिथि हर साल निश्चित है क्योंकि दीपावली से 9 दिन पहले करवा चौथ होता है तथा दसवें दिन दीपावली मनाई जाती है।

करवा चौथ के व्रत के पीछे तर्क:-

करवा चौथ के त्योहार से बहुत सी कहानियां (कथाएं) जुड़ी है औऱ हर कथा में एक दृढ़ निश्चय वाली पत्नी का जिक्र किया गया है जिसमें से एक कथा करवा नाम की महिला की है।

एक समय की बात है करवा नाम की महिला थी जिसके पति को मगरमच्छ ने पकड़ लिया था तब करवा ने बड़ी हिम्मत दिखाकर मगरमच्छ को सूत के धागे से बांध दिया तथा यमराज से मगरमच्छ को नरक भेजने का आदेश दिया परन्तु यमराज ने इंकार कर दिया।

यमराज का इनकार सुन, करवा ने यमराज को शाप देने की धमकी दी विवाहित महिला के शाप देने की बात सुनकर ही यमराज डर गए तथा करवा की आज्ञा अनुसार यमराज ने मगरमच्छ को नरक को रवाना कर दिया करवा एवं उसके पति ने खुशी-खुशी जीवन यापन किया।

करवा चौथ से जुड़ी बातें:-

1. करवा चौथ का त्यौहार सुहागन स्त्रियों के लिए सबसे प्रिय त्यौहार होता है।

2. सुहागन स्त्रियां ही नहीं बल्कि बहुत सी कुंवारी लड़कियां भी यह व्रत भविष्य में अच्छा पति पाने के लिए रखती हैं।

3. सूर्य उदय से पहले उठकर स्नानादि करके सरगी खाती हैं एवं जल ग्रहण करती हैं।

4. सरगी के बाद ना कुछ खाना होता है और ना पीना उसके बाद तो चंद्रमा देखकर ही व्रत खोला जाता है।

5. शाम को पूजा के लिए सभी महिलाएं बहुत सजती हैं पूरे सोलह सिंगार करना उस दिन अनिवार्य होता है।

6. सभी महिलाएं एक समूह में घेरा बनाकर बैठती है तथा करवा चौथ से जुड़ी कथा सुनती हैं बीच में इस व्रत से जुड़ा गीत गाती है तथा थालियों की फेरी करती हैं।

7. थालियों की फेरी वाला दृश्य मन मोह लेने वाला होता है।

8. करवा चौथ के दिन सुहागिनों को कपड़े बुनना, किसी सोते को जगाना, आदि कुछ चीजें करने की मनाई होती है।

9. थालियो की फेरी सात बार की जाती है जिसमें से शुरू की छह फेरी करते हुए महिलाएं गीत गाती हैं-‘ वीरो कुड़ियां करवा, सर्व सुहागन करवा, ए काती नाया तेरी ना, कुंभ चकरा फेरी ना, आर पेअर पायेन ना, रूठदा मानियेन ना, सुथरा जगाई ना, वे वीरो कुड़िए करवा, वे सर्व सुहागन करवा।’

11. परंतु सातवें एवं अंतिम फेरी में गीत अलग होता है जो इस प्रकार है -“वीरों कुड़िया करवा ,सर्व सुहागन करवा,  ए काती नाया तेरी नीति, कुंभ चकरा फेरी भी ,आर पेअर पायेन भी, रुठदा मानियेन भी ,सुथरा जगायेन भी, वे वीरों कुरिये करवा, वे सर्व सुहागन करवा।”

निष्कर्ष:- यह एक आपसी स्नेह बढ़ाने के साथ-साथ एक पूजा का अवसर भी प्रदान करने वाला त्योहार है। यह एक ऐसा त्यौहार है जिसमें भक्ति, सजना-सवरना ,रीति रिवाज सब रंग देखने को मिलते हैं।

संदेश:- करवा चौथ का त्यौहार पति-पत्नी के स्नेह को बढ़ावा देने की कोशिश करता है परंतु बहुत ही स्थितियों में करवा चौथ पर पति-पत्नी के बीच झगड़ा भी हो जाता है जब कभी पत्नी अपने पति की सामर्थ्य से ज्यादा का उपहार मांग ले और पति ना दे पाए इसलिए पति-पत्नी एक दूसरे के प्यार का मोल ना समझ कर उपहार को ज्यादा मोल देते हैं जो गलत है।

सीख:- करवा चौथ हमें सिखाता है कि नारी शक्ति सब पर भारी पड़ सकती है नारी अगर चाहे तो अपने सामने यमराज को भी झुका सकती है इसलिए नारी को भी समाज मे पुरषों की तरह समान दिया जाना चाहिए।


Essay: Karwa Chauth Nibandh 600 Word Hindi

करवा चौथ क्या है:-

करवा चौथ एक पारंपरिक त्योहार है जो पहले तो उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब आदि क्षेत्रों में मनाया जाता था परंतु अब देखा देखी यह संपूर्ण देश में मनाया जाने लगा है।

इस त्यौहार में शादीशुदा महिलाएं अपने पतियों के लिए एक पूरे दिन निर्जला व्रत करती हैं इस व्रत में महिलाएं सूर्योदय के साथ व्रत प्रारंभ करती हैं तथा चंद्र उदय के बाद ही उनका यह व्रत पूरा होता है।

करवा चौथ कब मनाया जाता है:-

1. हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह त्यौहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है या यह भी कह सकते हैं कि यह पर्व कार्तिक माह में आने वाली पूर्णिमा के 4 दिन बाद मनाया जाता है।

2. दीपावली से पहले भी इस त्यौहार के दिन निश्चित है हिंदू मान्यताओं के अनुसार यह व्रत दीपावली से 9 दिन पूर्व रखा जाता है या यूं कह लें कि इस व्रत के दिन से दसवें दिन दीपावली मनाई जाती है।

3. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह व्रत अक्टूबर या नवंबर महीने में मनाया जाता है।

कैसे रखा जाता है यह व्रत:-

1. यह 1 दिन के लिए मनाया जाने वाला त्यौहार है।

2. यह त्योहार व्रत सुहागन महिलाओं द्वारा मनाया जाता है।

3. करवा चौथ वाले दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं।

4. इस व्रत में महिलाएं सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर सरगी खाती हैं।

5. सरगी सांसों द्वारा बहुओं के लिए बनाई जाती है।

6. सरगी में सेविंया, फल, सूखे मेवे मुख्य रूप से खाए जाते हैं।

7. संपूर्ण दिन बिना पानी एवं भोजन के कठिन व्रत रखा जाता है।

8. करवा चौथ के व्रत की पूजा एक मुहूर्त के अनुसार की जाती है।

9. इस पूजा के लिए महिलाएं सुंदर-सुंदर कपड़े पहनती हैं जिसमें लाल रंग के कपड़ों को ज्यादा महत्व दिया जाता है क्योंकि लाल रंग सुहाग का रंग कहा जाता है।

10. सुंदर-सुंदर वस्त्रों के साथ 7 सोलह सिंगार करती हैं एवं आभूषण पहनती हैं।

11. शाम को पूजा के पश्चात सभी महिलाओं को चंद्र उदय की प्रतीक्षा रहती है क्योंकि चंद्रमा के दर्शन करके एवं चंद्र देव की पूजा करके ही, यह व्रत समाप्त किया जाता है।

12. एक हाथ में छन्नी लेकर उससे चंद्रमा के दर्शन करते हैं एवं दूसरे हाथ से साथ ही साथ चंद्रमा को जल चढ़ाते हैं।

13. फिर चंद्रमा से छन्नी घुमाते हुए उस छन्नी से अपने-अपने पतियों के चेहरे देखती हैं एवं उनके चरण स्पर्श करती हैं साथ ही साथ सभी देवी देवताओं से प्रार्थना करती है कि उनकी जोड़ी यूं ही बनी रहे।

14. करवा चौथ दो शब्दों का मेल है जिसमें करवा का अर्थ होता है मिट्टी का बर्तन एवं चौथ का अर्थ होता है चतुर्थी इसलिए करवा चौथ के दिन विवाहित महिलाएं करवे का खास विधि विधान से पूजन करती हैं।

करवा चौथ से जुड़ी कथा:-

हर त्योहार की भाँति यह त्योहार भी किसी कहानी से जुड़ा है जो कितने सालों से पति-पत्नी के सच्चे प्रेम का उदाहरण बनी हुई है।

कहा जाता है कि एक समय की बात है वीरवती नाम की एक राजकुमारी थी तथा सात भाइयों की इकलौती बहन होने के कारण वह भाइयों की बहुत लाडली थी औऱ बहुत बड़ा दिल करके भाइयों ने आखिरकार अपनी लाडली बहन की शादी की।

शादी के बाद करवा चौथ का व्रत आया, संयोगवश तब वीरवती अपने भाइयों के घर आई हुई थी बहुत ही उत्साह के साथ सभी रस्में पूरी करते हुए वीरवती ने पूरे दिन करवा चौथ का व्रत किया और शाम को चंद्र उदय का बेसब्री से इंतजार करने लगीं।

भूख और प्यास से वीरवती बहुत व्याकुल हो रही थी औऱ भाइयों से बहन का यह हाल देखा ना गया तब भाइयों ने बहन को बहुत बार खाना खा लेने का निवेदन किया पर वीरवती ना मानी तब भाइयों ने अपनी चतुराई दिखाई एवं पीपल के पेड़ की चोटी पर दर्पण से चांद की झूठी छवि बनाई और वीरवती को झूठ बोल उसका व्रत खुलवा दिया।

व्रत खोलते ही वीरवती को अपने पति की मृत्यु का संदेश मिला जिसके सुनते ही वीरवती सुध बुध खो बैठी तब उसकी भाभी ने बताया कि झूठा चांद तुम्हें दिखा कर तुम्हारा व्रत तुम्हारे भाइयों ने तुड़वा दिया यह सब सुनकर वीरवती तो मानो टूट सी गई थी।

उसको इस तरह रोता देख देवी शक्ति वहां प्रकट हुई और उसके रोने का कारण पूछा तब वीरवती में सब आप बिती उनके सामने सुना दी जिसके बाद सच्ची भावना के साथ फिर से करवा चौथ का व्रत वीरवती ने किया जिसका परिणाम यह हुआ कि आखिरकार यमराज को भी एक पत्नी के दृढ़ निश्चय के आगे झुकना पड़ा।

निष्कर्ष:- करवा चौथ एक ऐसा त्यौहार है ,जो पति पत्नी के प्यार को और ज्यादा बढ़ाता है यह पर्व कहने को तो बस महिलाओं का होता है परंतु इस पर्व से कहीं न कहीं संपूर्ण परिवार का माहौल खुशहाल हो जाता है।

संदेश:- करवा चौथ का त्यौहार हर वर्ष आता है एवं पति पत्नी के बीच साल भर चाहे कितनी भी खटपट हो परंतु इस दिन दोनों को एक दूसरे की अहमियत पता लगती है तो करवा चौथ यह संदेश देता है कि पति पत्नी एक दूसरे के बिना अधूरे हैं चाहे कितनी भी खटपट हो एक दूसरे से बात करके इस लड़ाई का अंत कर देना चाहिए।

सीख:- करवा चौथ का त्यौहार भी हर त्योहार की भाँति,  कुछ न कुछ सिखाता है ।जैसे -वीरवती ने अपने भाइयों की बातों में आकर ,बहुत बड़ी भूल कर दी ।हमें एकदम किसी भी बातों में नहीं आना चाहिए  ।क्योंकि आंखों देखा भी हमेशा सच नहीं होता। और उस भूल का कितना बड़ा फल उसको भोगना पड़ा।

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तो दोस्तों हमने आपको Karwa Chauth-करवा चौथ के बारे में अलग-अलग लंबाई के निबंध लिखे हैं अगर आपको हमारे यह निबंध पसंद आते हैं तो आप अपनी आवश्यकता के अनुसार स्कूलों में इनका इस्तेमाल कर सकते हैं और साथ ही आपको भी इसके बारे में लोगों को अवगत करना चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया Karwa Chauth-करवा चौथ पर निबंध काफी पसंद आए होंगे तो अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आता है तो उसे सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल है तो हमे कमेंट करें

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