Eid Essay- ईद पर निबंध औऱ स्पीच-कविता

Eid Essay- ईद इस्लाम धर्म मे प्रमुख त्यौहार होता हैं और हर साल इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार यह साल में दो बार मनाई जाती हैं जिसे ईद उल फित्र और ईद उल अज़हा नाम से जानना जाता हैं ईद विश्व के इस्लामिक देशों औऱ इस्लाम को माने वालों लोगों द्वारा पूरे विश्व मे मनाया जाता है।

ईद इस्लामी धर्म का सबसे बड़ा उत्सव होता है जिसमें ईदगाह पर विशेष नमाज़ अदा करने के लिए हर शहर में हजारों लोगों आते हैं औऱ नमाज़ अदा करने के बाद एक दूसरे के लगें लगकर बधाई देते हैं।

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अक़्सर हमें स्कूलों व कॉलेजों में निबंध व भाषण-कविता लिखने के लिए दिए जाते है इसलिए आज हम आपको Eid-ईद की जानकारी प्रदान करने वाले है औऱ साथ ही Eid-ईद पर छोटा, मीडियम औऱ लंबा हर तरह की लम्बाई के निबंध प्रदान करने वाले हैं उम्मीद है आपको हमारे द्वारा लिखे गए निबंध पसंद आयगे

Eid-ईद पर 10 लाइन निबंध

1. ईद इस्लामिक धर्म का त्यौहार है जो संपूर्ण भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।

2. ईद को ईद-उल-फितर के नाम से भी जाना जाता है।

3. ईद-उल-फितर रमजान का महीना खत्म होने के बाद मनाया जाता है।

4. जिस प्रकार हिंदू समुदाय के लोग होली, दीपावली, दशहरा, जन्माष्टमी इत्यादि त्यौहार मनाते हैं उसी प्रकार इस्लामिक धर्म में इस त्योहार को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।

5. रमजान पूरे 1 माह तक चलते हैं इस रमजान के महीने में 1 महीने तक इस्लाम धर्म के लोगों द्वारा उपवास रखा जाता है जिसे रोजा कहते हैं।

6. 1 महीने तक रोज रोजा रखने के बाद नया चांद देखकर ही ईद का त्यौहार मनाया जाता है।

7. रमजान इस्लामी कैलेंडर के अनुसार नौवें महीने में आते हैं।

8. जिस प्रकार हर एक त्यौहार का मुख्य उद्देश्य भाईचारा होता है उसी प्रकार इबादत, प्रार्थना, एक दूसरे से मिलना, विभिन्न प्रकार के पकवान बनाना आदि इस त्यौहार की विशेषता है।

9. इस दिन की नमाज अदा करने के लिए लोग बहुत उत्साहित देखे जाते हैं ईद के दिन मुस्लिम अनुयायी सुबह जल्दी उठकर, ईदगाह नमाज पढ़ने पहुंच जाते हैं।

10. इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग गरीबों को अनाज की कुछ मात्रा भी अवश्य दान करते हैं।


ईद पर निबंध
Eid Essay Hindi Word 100

Eid-ईद मुस्लिम समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला मुख्य त्यौहार है ईद को ईद-उल-फितर के नाम से भी जाना जाता है। यह त्यौहार संपूर्ण विश्व में स्थित मुस्लिम समुदाय द्वारा बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।

जिस प्रकार भारत में होली, दीपावली, दशहरा, जन्माष्टमी इत्यादि त्यौहार धर्म का भेदभाव खत्म कर देते है उसी प्रकार भारत में ईद का त्योहार ना सिर्फ मुस्लिम लोग अपितु दूसरे धर्म के लोग भी खुशी से गले लग कर मनाते हैं।

रमजान का महीना मुस्लिमों के लिए खुशियों की बहार लाता है इस महीने में सभी मुस्लिम लोग उपवास रखते हैं औऱ पूरे दिन पानी की एक बूंद भी अपने अंदर नहीं जाने देते तथा शाम को 5 पाँच बजे नमाज अदा करने का समय सुनिश्चित है जिसमें इबादत कर के ही सूर्यास्त के बाद यह लोग अपना उपवास खोलते हैं। इस रमजान के महीने के आखिरी दिन का चांद देखने की उत्सुकता सभी में देखी जाती है क्योंकि चांद के दिखने पर ही निर्भर होता है कि Eid-ईद कब मनाई जाएगी।


ईद पर निबंध
Eid Essay Hindi Word 300

Eid-ईद का त्यौहार होली, दीपावली त्यौहार के जैसा ही बड़ा उत्सव होता है यह मुख्य रूप से मुसलमान भाइयों द्वारा मनाया जाता है Eid-ईद का त्योहार 1 महीने के रमजान महीने के बाद मनाया जाता है।

रमजान के महीने में मुसलमान समुदाय के लोगों द्वारा पूरे दिन कड़ा व्रत(रोजा) रखा जाता है यह व्रत इतने कड़े नियम का होता है कि व्रत(रोजा) रखने वाला एक बूंद पानी की भी नहीं पी सकता औऱ यह नियम एक महीने तक ऐसे ही चलते हैं। रमजान का महीना त्याग और तपस्या का बहुत बड़ा उदाहरण है रमजान के महीने में सभी मुसलमानों को रोजा रखना आवश्यक होता है।

Eid-ईद से जुड़े तथ्य:-

1. रमजान के आखिरी दिन ईद का चांद देखकर अगले दिन ईद मनाने की घोषणा कर दी जाती है।

2. ईद पर भी विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं जिसमें सिवंईयाँ मुख्य होती है।

3. ईद के दिन मुसलमान समुदाय के पुरुष व बच्चे सुबह जल्दी तैयार होकर मस्जिद नमाज पढ़ने जाते हैं।

4. ईद पर लोग एक दूसरे के गले मिलकर ईद की बधाईयों का आदान प्रदान करते हैं।

5. सभी लोग इस दिन नए-नए वस्त्र पहनते हैं।

6. घरों के बड़ों द्वारा बच्चों को उपहार दिए जाते हैं।

7. बाजारों में भी ईद की रौनक रमजान शुरू होते ही दिखनी शुरू हो जाती है।

8. सभी लोग एक दूसरे के घर ईद की बधाइयां देने जाते हैं तथा एक दूसरे को दावत का न्योता देते हैं।

9. ईद का त्यौहार मनाने में कोई अमीर गरीब नहीं होता सभी बहुत बढ़-चढ़कर इस त्योहार को खुशी के साथ मनाते हैं।

10. Eid-ईद का त्योहार बहुत सी सीख देता है औऱ ईद का कुरान से संबंध है व कुरान हमें सिखाता है कि ईद के दिन कोई भी व्यक्ति दुखी ना रहे।

कहा जाता है कि यह रमजान का महीना इतना पवित्र होता है कि इस महीने में व्रत रखने से आत्मा की शुद्धि होती है अतः यह त्यौहार आपसी भाईचारे के साथ-साथ मानव जाति में अल्लाह के प्रति भक्तिभाव भी जागरूक करता है।


ईद पर निबंध
Eid Essay Hindi Word 500

भारत देश में जैसे विभिन्न धर्म जाति के लोग रहते हैं वैसे ही इन विभिन्न धर्म के लोगों द्वारा विभिन्न प्रकार के त्योहार मनाए जाते हैं इन त्योहारों को मनाने में हमारे देश की संस्कृति दिखाई देती है।

हर त्यौहार को मनाने के पीछे कुछ मान्यताएं होती हैं और हर त्योहार हमें कोई ना कोई संदेश होता है औऱ इन्हीं त्योहारों में से एक त्योहार ईद होता है ईद मुस्लिम समुदाय के लिए उतना ही महत्वपूर्ण त्यौहार है जितना हिंदू समुदाय के लिए होली या दीपावली का त्यौहार होता है।

Eid-ईद का त्यौहार आपस में खुशियां बांटने और प्यार को बढ़ावा देने का पैगाम देता है सही मायनों में ईद का अर्थ है वह खुशी जो हर साल हमारे जीवन में आती है और चारों और खुशनुमा वातावरण बना देती है।

साल में दो बार मनाते हैं ईद:- 

Eid-ईद दो बार मनाई जाती है एक ईद जिसको हम मीठी ईद या ईद-उल-फितर भी कहते हैं जो रमजान का पवित्र महीना समाप्त होने के अगले दिन मनाते हैं औऱ दूसरी जिसको हम बकरा ईद या ईद-उल-अजहा भी कहते हैं जो पैगंबर इब्राहिम द्वारा दिए गए बलिदान को याद करके मनाते हैं।

ईद का महत्व:-

Eid-ईद का महत्व शब्दों में बयां करना कुछ नामुमकिन सा है फिर भी यह बता दें कि ईद ना सिर्फ अल्लाह की ओर लोगों को ले जाने का मौका है अपितु आपसी झगड़ों को भूलकर गले लगने का भी मौका होता है क्योंकि इस दिन तो दो अजनबी भी गले लग जाते हैं।

Eid-ईद का त्यौहार हमें यह सिखाता है कि अगर हम आर्थिक रूप से सक्षम है तो हमें अपने आसपास जरूरतमंदों की जरूरत पूरा करके खुशियां देने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि अल्लाह भी नेकी के कामों से ही खुश होते हैं औऱ बुराई की राह को त्यागकर सिर्फ और सिर्फ अच्छाई की राह पर चलना चाहिए चाहे जितनी भी मुश्किलें आए हमें अपनी राह से भटकना नहीं चाहिए।

निष्कर्ष:-

Eid-ईद आपसी मेल मिलाप, प्यार और अपनेपन का स्त्रोत माना गया है क्योंकि इस त्यौहार की मुबारकबाद देते समय कोई जान-पहचान होना आवश्यक नहीं। इस दिन तो अजनबी को भी गले लगाकर ईद मुबारक कहा जाता है और इस त्यौहार द्वारा दो मुकाम हासिल किए जाते हैं पहला इस त्यौहार से पहले अल्लाह की इबादत कितनी शिद्दत से की जाती है और दूसरा इबादत के साथ-साथ खुशी जो लोगों में नई ऊर्जा पैदा करती है इस त्यौहार के द्वारा ऊंच-नीच, अमीर- गरीब, काला-गोरा सभी भेदभाव मिटाने का प्रयास किया जाता है।

संदेश:-

Eid-ईद का त्यौहार आपसी प्रेम को दिखाता है परंतु यह सब प्रेम खुशियां नकली है अगर हम अपने जीवन में असली प्रसन्ता और खुशी लाना चाहते हैं तो हमें उस अल्लाह(खुदा) को खुश करना चाहिए औऱ अल्लाह खुश होते हैं उसकी इबादत से या नेक काम करने से तो ईद के इस संदेश को मानकर नेकी की राह पर चलो तो देखो जीवन के हर मोड़ पर खुशी तुम्हारा इंतजार करती मिलेगी।

सीख:-

Eid-ईद हमें सिखाती है कि हमें हमेशा संसार की बुराइयों को खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए जितनी कोशिश हो सके लोगों के दुख-दर्द बांटने चाहिए क्योंकि दुख बांटने से कम और खुशी बांटने से दोगुनी हो जाती है। ईद हमें यह सिखाती है चाहे एक परिवार अन्य दिन इस व्यस्त जीवन शैली में एक दूसरे के साथ समय बिताएं या ना बताए परंतु इस खास त्यौहार के बहाने एक दूसरे की भावनाओं से जुड़ने का मौका मिलता है।


ईद पर निबंध
Eid Essay Hindi Word 700

ईद क्या है:-

विश्व स्तर पर मुस्लिम समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला यह त्योहार ईद कहा जाता है औऱ भारत देश एक ऐसा देश है जहां यह त्योहार ना सिर्फ मुस्लिम लोग अपितु अन्य धर्म के लोग भी इसमें बहुत खुशी से शामिल होते हैं ईद से पहले हर वर्ष रमजान का महीना आता है जो मुस्लिम समाज के लोगों का बहुत ही महत्वपूर्ण महीना होता है।

रमजान का महीना:-

रमजान का महीना मुस्लिम धर्म का वह पवित्र महीना होता है जिसमें इस धर्म के लोग यह मान्यता रखते हैं कि इस महीने में रोजा रखने से आत्मा पवित्र हो जाती है रोजा यानी उपवास होता है यह इतना कठोर होता है कि इसका समय पूरा होने से पहले एक बूंद पानी की भी नहीं पी सकते यह रोजे लगातार एक महीने तक रखे जाते हैं।

नमाज अदा करने का रोजाना शाम के 5 बजे का समय सुनिश्चित होता है जिसमें अपने और अपने परिवार के लिए खुदा से दुआ मांगने औऱ फिर शाम को सूर्य अस्त होने के बाद ही पूरा परिवार साथ बैठकर रोजा खोलता है और खाना खाता है।

ईद का त्यौहार मनाने की तैयारियां:-

जैसे होली, दीपावली, दशहरा, जन्माष्टमी आदि त्यौहारों की तैयारियां की धूम त्यौहार आने से पहले ही दिखनी शुरू हो जाती है उसी प्रकार ईद के त्यौहार की भी काफी विशेष तैयारियां की जाती है इस त्यौहार की तैयारियां करने के लिए अमीर, गरीब, बुजुर्ग, जवान, बच्चे सब में बहुत उत्साह होता है।

जिसकी जितनी सामर्थ्य होती है वह अपनी सामर्थ्य के अनुसार नए वस्त्र, आभूषण, घर की सजावट की वस्तुएं या घर की अन्य वस्तुओं की खरीदारी करता है हर कोई अलग-अलग प्रकार के नए से नए पकवान बनाता है व फलों और मिठाइयों की दुकानों में मानो जैसे मेला सा लगा दिखाई देता है मीठे में मुख्य रूप से सीवईया तैयार की जाती है।

ईद का दिन:-

Eid-ईद के दिन सुबह सुबह उठ कर नहा-धोकर, बच्चे, युवक ,बूढ़े सभी सुंदर सुंदर कपड़े पहन कर तैयार हो जाते हैं व तैयार होकर सब ईदगाह पँहुचते हैं क्योंकि वहां नमाज अदा करने का समय निश्चित होता है।

ईदगाह या मस्जिद में सब मिलकर एक साथ नमाज अदा करते हैं फिर सभी लोग एक साथ विश्व में शांति बनाए रखने के लिए खुदा से दुआ करते हैं इतने लोगों को एक साथ विश्व के कल्याण के लिए दुआ मांगते देख कर मन बहुत प्रसन्न होता है वह दृश्य एक पल में भेदभाव की भावना को समाप्त कर देता है।

नमाज अदा होते ही सभी लोग एक दूसरे के गले लगते हैं तथा ईद की मुबारकबाद देते हैं ना सिर्फ ईदगाह में मुबारकबाद देते हैं बल्कि सभी लोग एक दूसरे के घर जाकर भी ईद मुबारकबाद देते हैं इस दिन हर घर में दावत होती है।

अपनेपन के त्यौहार को दिखावे में ना बदलें:-

आजकल का समाज जैसे-जैसे आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है वैसे-वैसे वह अपने पैर दिखावे की ओर अग्रसर कर रहा है खुशियां कभी पैसों में नहीं तोली जा सकती फिर भी लोग चाहे हाथ में पैसा हो या ना हो बकरा ईद पर महंगे से महंगा बकरा खरीद कर उसकी कुर्बानी देना चाहते हैं। यह धर्म और त्यौहार आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है इसमें कोई दिखावा करने की नीति नहीं है हमें खुद को और अपने समाज को इस दिखावे से बचाने की जरूरत है।

निष्कर्ष:-

अतः ईद एक खुशीनुमा त्योहार है जो हमें मिलजुल कर जीने का संदेश देता है अगर हम इस संदेश को अपने जीवन में उतारे तो पूरे विश्व के लिए भारत एक मिसाल बन जाएगा। यह त्यौहार भी किसी एक निश्चित दिन पर नहीं मनाया जाता बस इतना पक्का होता है कि यह ईद नाम का त्योहार इस्लामी कैलेंडर के नौवें महीने में मनाया जाएगा।

संदेश:-

Eid-ईद हमें कई नेक संदेश देती है जैसे- अपने पिता पैगंबर इब्राहिम के बीच रहा में रेगिस्तान में छोड़ जाने के बाद भी उनके बेटे इस्माइल और उनकी बेगम हाजरा ने कभी धर्म की राह को नहीं छोड़ा इतनी मुश्किलें आने के बाद भी वह दोनों हमेशा नेकी की राह पर ही चलते रहे क्योंकि नेकी और धर्म की राह चाहें थोड़ी कठिन होती है परंतु इन राहों पर चल चल कर ही एक इंसान जिम्मेदार बनता है।

सीख:-

Eid-ईद का त्यौहार हमें यह सीख देता है कि हम सब उस ऊपरवाले के बंदे हैं जिस प्रकार इब्राहिम ने अपने सपने को भी अल्लाह का हुक्म मान कर अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गए थे उसी प्रकार हमें भी अल्लाह पर सच्चा और पक्का विश्वास रखना चाहिए।

क्योंकि वह हमारे साथ कुछ गलत नहीं करेंगे अगर दिल में सच्चा विश्वास हो, तो जीत सच्ची भक्ति की ही होती है पर थोड़ा संयम रखने की जरूरत होती है और ईद ने हमें यह सीख दी है कि परिवार के बुजुर्ग को परिवार के सदस्यो के बीच कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए।


ईद पर निबंध
Eid Essay Hindi Word 1000

प्रस्तावना:-

Eid-ईद मुसलमानों द्वारा मनाया जाने वाला बहुत बड़ा उत्सव है। ईद दो प्रकार की होती है एक मीठी ईद और दूसरी बकरा ईद जो ईद रमजान के बाद मनाई जाती है उसे मीठी ईद या ईद-उल-फितर कहते हैं।

जिस प्रकार होली, दिवाली आदि त्योहार हम हिंदू माह के कैलेंडर के अनुसार मनाते हैं वैसे ही ईद हम हिजी कैलेंडर के अनुसार व चांद दिखने के अनुसार मनाते हैं बहुत से वर्ष तो ऐसा भी होता है कि अलग-अलग जगह पर अलग-अलग दिन ईद मनाई जाती है।

रमजान का महीना:-

यह महीना 30 दिन का होते हैं जिसके बाद ईद मनाई जाती है और रमजान का महीना मुस्लिम समुदाय का सबसे पवित्र महीना कहा जाता है इस पूरे महीने में इस धर्म से जुड़े धार्मिक भाव बहुत ही तपस्या के साथ देखने को मिलते हैं रमजान के महीने में लोग रोजा रखते हैं औऱ इस रोजे को खोलने से पहले एक बूंद पानी की पीना भी इस समुदाय के लोगों के लिए पाप के बराबर कहा जाता है।

यह रोजे ना रखने की छूट बस बीमार या असक्षम लोगों को दी गई है अन्यथा सभी को पूरे दिन पूरे महीने रोजे रखने का हुकुम इस धर्म से जुड़े धार्मिक ग्रंथों में किया गया है। पूरा दिन रोजा रखकर सूर्यास्त के बाद नमाज पढ़कर रोजा खोला जाता है इस पाक महीने में 1 दिन में 5 बार नमाज अदा की जाती है।

ईद के दो प्रकार:-

1. मीठी ईद

जो Eid-ईद रमजान के बाद मनाई जाती है उसे मीठी ईद कहते हैं औऱ मीठी ईद को ईद-उल-फितर भी कहते हैं। रमजान के महीने के अंतिम दिन चांद देखने के बाद ईद मनाने का ऐलान किया जाता है इस रमजान के महीने को मुस्लिम समुदाय का बहुत ही खुशनुमा महीना कहा जाता है क्योंकि रोज पूरे परिवार मिलकर रोजा रखते हैं तथा शाम को सूर्यास्त के बाद एक साथ नमाज अदा करके एक साथ बैठकर रोजा खोलते हैं।

रमजान का महीना पूरा एक महीना चलता है तथा पूरे महीने ईद का बहुत बेसब्री से इंतजार होता है लोग नए कपड़ों की खरीददारी करते हैं साथ ही साथ इस पूरे महीने में एक ही दिन में 5 बार नमाज भी अदा करते हैं तथा अंत में ईद वाले दिन विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं जिसमें सिवइयो का अपना अलग ही महत्व होता है सभी लोग एक दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद देते हैं तथा घर के बड़े घर के छोटो के लिए ईदी के रूप में उपहार लाते हैं जो उनके बीच प्यार को बढ़ाता है।

2. बकरा ईद

जिस प्रकार मीठी ईद मुस्लिम भाइयों का बहुत बड़ा त्यौहार है उसी प्रकार बकरा ईद भी उनका दूसरा बड़ा त्यौहार होता है बकरा ईद को ईद-उल-अजहा भी कहते हैं। बकरा ईद के दिन इस धर्म से जुड़े लोग सबसे पहले नमाज अदा करते हैं फिर नमाज अदा करने के बाद बकरे की कुर्बानी दी जाने वाला रिवाज किया जाता है अगर कोई बकरे की कुर्बानी करने में आर्थिक रूप से सक्षम ना हो तो उसके लिए इस रिवाज से छूट दी गई है परंतु आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को कुर्बानी का रिवाज पूरा करना ही होता है कुर्बानी देने के बाद एक हिस्सा गरीबों में बांटा जाता है तथा अन्य रिश्तेदार आदि में।

क्यों मनाते हैं बकरा ईद

इस धर्म से जुड़े ग्रंथों की माने तो कहा जाता है कि एक समय की बात है एक पैगंबर हुआ करते थे जिनका नाम पैगंबर हजरत इब्राहिम था। उनकी कोई औलाद नहीं थी वह रोजाना खुदा की इबादत करते व नमाज पढ़ते। खुदा आखिरकार उनकी इबादत से खुश हुए और उनको और उनकी बेगम को एक बेटा हुआ वह सब बहुत खुश थे।

एक दिन पैगंबर साहब को एक सपना आया उस सपने में पैगंबर साहब ने देखा कि खुदा उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांग रहे हैं इस सपने को खुदा की मर्जी मानते हुए पैगंबर साहब अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गए उन्होंने अपनी आंखें बंद की और कुर्बानी दे दी।

पर यह तो बस खुदा द्वारा लिया जा रहा है एक इम्तिहान था जब पैगंबर साहब ने आंखें खोली तो पाया कि उनका बेटा तो सही सलामत खेल रहा है और वहां बकरे की बलि दी गई थी अल्लाह ने खुश होकर बच्चे को बकरे से बदल दिया था तथा यहीं से बकरे की बलि की प्रथा की शुरुआत हुई।

Eid-ईद से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें:-

1. ईद का चांद मुसलमान भाइयों के लिए संपूर्ण वर्ष का सबसे सुंदर चांद होता है।

2. रमजान के अंतिम दिन चांद देखने के बाद ही रोजा समाप्ति की घोषणा और अगले दिन ईद मनाने की घोषणा की जाती है।

3. जिस रात ईद का चांद दिखता है उसके अगले दिन ईद मनाते हैं औऱ ईद मनाने के लिए सुबह जल्दी उठकर, नहाकर, नए वस्त्र पहने जाते हैं और फिर मस्जिद में जाकर नमाज अदा की जाती है।

4. रमजान का महीना चलते वक्त ही ईद की तैयारियां शुरू हो जाती है हर घर के बुजुर्ग से लेकर छोटे बच्चे तक के नए कपड़ों की खरीददारी की जाती है।

5. हर कोई अपनी हैसियत के हिसाब से नई-नई चीजों की खरीदारी करता है।

6. ईद वाले दिन सभी लोग मिलकर नमाज अदा करते हैं तथा अल्लाह को हर चीज के लिए शुक्रिया कहते हैं।

7. नमाज अदा करने के बाद एक दूसरे के गले लग कर ईद की मुबारकबाद देते हैं।

8. सभी एक दूसरे के घर ईद मिलने जाते हैं व विभिन्न पकवान तैयार किए जाते हैं जिसमें सिवइयाँ इस दिन का खास व्यंजन होती हैं।

9. मस्जिदों को बिल्कुल दीपावली के जैसे रोशन किया जाता है आतिशबाजी की जाती है।

रमजान का पाक महीना है।
इबादत करो और हर गुनाह की माफी मांग लो।
ईद है, बस आने वाली।
ईद की तैयारियां करो और बड़ों से ईदी मांग लो।

निष्कर्ष:-

अतः यह त्यौहार आपस में खुशियां और उपहार बांटने का मुख्य पर्व है इस दिन लोग पुराने शिकवे भुलाकर गले लग कर ईद की मुबारकबाद देते हैं जो भाईचारे की भावना को बढ़ाता है। भाईचारा बढ़ाना ही हमारे भारत देश की विशेषता है इस त्यौहार को मनाने के लिए लोगों के अंदर अलग ही ताजगी, उत्साह और प्रसन्नता देखी जाती है हर परिवार में साथ मिलकर ईद मनाने की इच्छा देखी जाती है।

संदेश:-

Eid-ईद का पर्व हमें आपसी मतभेद खत्म कर, प्यार से गले लगने, इबादत करने का संदेश देता है ईद के त्यौहार पर हर वर्ष मुस्लिम धर्म से जुड़े लोग विश्व में शांति की दुआ करते हैं। ईद का त्यौहार आने से पहले ही यह संदेश मिलना शुरू हो जाता है कि अब चारों और खुशियां फैलने वाली है ईद पर लोग एक दूसरे के साथ आपसी खुशियां बांटते हैं और आपस में मोहब्बत से रहने का संदेश देते हैं।

    गले मिलो, ईद मनाओ।
खुशियों की सौगात लुटाओ।
प्यार बांटने का दिन आया है।
भूलो सारे पुराने शिकवा, देखो देखो ईद का
त्यौहार आया है।

सीख:-

Eid-ईद मुस्लिम धर्म का एक बहुत ही खास त्यौहार है ईद का त्यौहार दो प्रकार का होता है कहने को तो यह दो प्रकार के होते हैं परंतु इनका मकसद लोगों को भाईचारा, त्याग और मानवता सीखाना है। ईद मुस्लिम धर्म का त्योहार है और कुरान इस धर्म का ग्रंथ। कुरान में गरीबों और यतीमो की मदद करके उनके जीवन में खुशियां भरने की सीख दी गई है खुदा ने फरमाया है कि अपनी कमाई में से एक हिस्सा किसी गरीब को जरूर दो जो तुम्हारी कमाई में बरकत देगा।

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तो दोस्तों हमने आपको Eid-ईद के बारे में अलग-अलग लंबाई के निबंध लिखे हैं अगर आपको हमारे यह निबंध पसंद आते हैं तो आप अपनी आवश्यकता के अनुसार स्कूलों में इनका इस्तेमाल कर सकते हैं और साथ ही आपको भी इसके बारे में लोगों को अवगत करना चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया Eid-ईद पर निबंध काफी पसंद आए होंगे तो अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आता है तो उसे सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल है तो हमे कमेंट करें

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