Dussehra-दशहरे पर निबंध औऱ स्पीच-कविता

दशहरा जिसे विजयदशमी के नाम से जाना जाता हैं जिसके आने से पहले ही बच्चों और युवाओं में इसके प्रति उत्साह उत्पन्न हो जाता हैं और साथ ही Dussehra-दशहरा हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार भी हैं इसलिए इसका ज़श्न पूरे भारत मे मनाया जाता हैं।

दशहरा न केवल एक उत्साह या त्यौहार है बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व हैं जो हमें जीवन मे बहुत सारी सीख प्रदान करता हैं दशहरा असत्य पर सत्य की जीत का भी प्रतीक है इसलिए ही इसे विजयदशमी के नाम से जानना जाता हैं।

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हम बचपन से ही रामायण सुनते और देखते आ रहे हैं औऱ दशहरा या विजयदशमी रावण के जीवन का आख़री अध्याय हैं जिसमें बुराई, घमंड, असत्य इत्यादि का अंत हो जाता हैं जिसे हम दशहरा के रूप में मानते है।

अक़्सर हमें स्कूलों व कॉलेजों में निबंध व भाषण-कविता लिखने के लिए दिए जाते है इसलिए आज हम आपको Dussehra-दशहरा की जानकारी प्रदान करने वाले है औऱ साथ ही Dussehra-दशहरा पर छोटा, मीडियम औऱ लंबा हर तरह की लम्बाई के निबंध प्रदान करने वाले हैं उम्मीद है आपको हमारे द्वारा लिखे गए निबंध पसंद आयगे।

All Heading

Dussehra- दशहरे पर 10 लाइन

1.  दशहरा हिंदू धर्म के लोगों का एक महत्वपूर्ण त्योहार है।

2.  दशहरे का पर्व सितंबर या अक्टूबर के महीने में दिवाली से 20 दिन पहले आता है।

3.  यह त्यौहार देश के हर एक शहर में, हर एक गाँवो में, हर एक कलोनी में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।

4.  इस त्यौहार से 9 दिन पहले देवी पूजन किया जाता है फिर दसवें दिन लोगों द्वारा रावण का पुतला जलाया जाता है इसलिए इसे दशहरा कहते हैं।

5. यह त्यौहार अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष मे आता है।

6. यह त्योहार असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है।

7. इन 9 दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा अर्चना की जाती है।

8. संपूर्ण देश में अलग-अलग शहरों में अलग-अलग स्तर पर राम लीला का मंचन होता है।

9. दशहरे को विजयदशमी भी कहा जाता है क्योंकि विजयदशमी के दिन भगवान राम ने लंका नरेश अहंकारी रावण का वध किया था।

10.  रामलीला के साथ अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं इन कार्यक्रम के साथ-साथ बच्चों के लिए झूले लगते हैं और अलग-अलग सामान की विभिन्न दुकाने आकर्षण का केंद्र बनते हैं।


दशहरे पर निबंध
Dussehra Essay Hindi Word 100

दशहरे के त्यौहार को विजयदशमी के नाम से भी जाना है यह त्यौहार अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है जोकि असत्य पर सत्य की विजय और प्रभु राम की वीरता का प्रतीक है। यह त्यौहार हर वर्ष इसलिए मनाया जाता है ताकि लोगों को यह एहसास कराया जा सके कि असत्य चाहे कितना भी शक्तिशाली हो अंत में जीत सत्य की निश्चित है।

साथ ही साथ इस त्यौहार द्वारा प्रत्येक व्यक्ति में वीरता की भावना जागृत करने का प्रयास किया जाता है विजयदशमी के दिन प्रभु श्री राम ने लंका के राजा रावण का वध किया था। श्री राम की विजय के प्रतीक इस पर्व को विजयदशमी भी कहा जाता है क्योंकि रावण के वध से पहले 9 दिन तक श्री राम ने युद्ध के दौरान मां दुर्गा की पूजा की तथा दसवें दिन रावण का वध किया इसलिए इस त्यौहार को विजयदशमी कहते हैं।


दशहरे पर निबंध
Dussehra Essay Hindi Word 300

दशहरा हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है यह संपूर्ण भारत वासियों द्वारा हर वर्ष बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को आता है या यह भी कह सकते हैं कि यह पर्व दीपावली से 20 दिन पहले मनाया जाता है।

Dussehra-दशहरा अंग्रेजी माह के अनुसार हर वर्ष सितंबर या अक्टूबर माह में मनाया जाता है यह एक धार्मिक उत्सव है जिसको मनाने के लिए आजकल तो बच्चे भी बहुत उत्साहित रहते हैं यह पर्व हमें बहुत सी शिक्षाएं देता है।

क्यों मनाते हैं दशहरा:-

हिंदुओं के धार्मिक ग्रंथ रामायण के अनुसार कहा जाता है कि श्री राम के भाई लक्ष्मण एवं श्री राम द्वारा हुई सूर्पनखा की बेजती का बदला लेने के लिए रावण ने श्री राम की पत्नी माता सीता का हरण कर लिया था।

क्योंकि सूर्पनखा रावण की बहन थी। राम से स्वयं की पत्नी को बचाने के लिए रावण के साथ युद्ध किया। इस युद्ध का अंत यह हुआ कि रावण की मृत्यु हुई और दुराचार औऱ अहंकार पर सत्य की जीत उस दिन से ही यह दशहरा नाम का उत्सव मनाया जाने लगा।

दशहरे का पर्व कैसे मनाते हैं:-

दशहरे का पर्व संपूर्ण देश में मनाया जाता है जैसे भारत में अलग-अलग जातियों के लोग रहते हैं वैसे ही सब अपने-अपने अनुसार इस त्योहार को मनाते हैं औऱ दशहरे से पहले 9 दिनों तक रामलीला की जाती है जिसमें अलग-अलग लोगों द्वारा अलग-अलग किरदार निभाए जाते हैं।

रामलीला देखने के लिए लोगों का उत्साह चरम सीमा से पार दिखता है कई बार तो इन कलाकारों द्वारा किए जा रहे मंचन को देखकर लोगों की आंखें तक नम हो जाती हैं। अंत में दसवें दिन रावण का पुतला बनाकर उसको जलाया जाता है जिससे लोगों के मन में नई ऊर्जा, बुराई पर अच्छाई की जीत की भावना, मन में नहीं चाह आदि भावनाएं उत्पन्न होती हैं।

इस पर्व से हमें यह सीखने को मिलता है कि हमें स्वयं के अंदर की बुराइयों को खत्म करके इस दिन से एक नए, सच्चे और अच्छे जीवन की शुरुआत करनी चाहिए। दशहरा जीत का जश्न मनाने के रूप में मनाया जाता है मान्यता है कि इस दिन अगर कोई नया कार्य शुरू किया जाए तो उसमें सफलता निश्चित है।


दशहरे पर निबंध
Dussehra Essay Hindi Word 500

Dussehra-दशहरा हिंदुओं द्वारा दिवाली से पहले मनाया जाने वाला त्यौहार है भारत मे बहुत से त्यौहार मनायें जाते है जिसमें से बहुत से त्यौहार यह सीख देते हैं कि अच्छाई और सत्य की जीत निश्चित होती है चाहे बुराई और असत्य कितने भी पैर पसार ले परंतु अंत में जलकर राख ही हो होता है यह सीख देने वाले त्योहारों में से दशहरा एक प्रमुख त्योहार है।

हिंदू पंचांग के अनुसार दशहरा यानी विजयदशमी संपूर्ण भारत में अश्विन माह के शुक्ल पक्ष के दसवे दिन यानी दशमी को मनाया जाता है और अंग्रेजी माह को देखें तो यह त्योहार सितंबर या अक्टूबर में आता है।

दशहरे से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण परंतु अनसुने से तथ्य:-

1. Dussehra-दशहरा ना सिर्फ भारत में अपितु विदेशों में भी मनाया जाता है जिसका एक बहुत बड़ा उदाहरण मलेशिया है मलेशिया में तो दशहरे के दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है और मलेशिया के साथ-साथ यह पर्व बांग्लादेश और नेपाल में भी मनाया जाता है।

2. कहा जाता है कि राजा महाराजा भी इस पर्व को बहुत उत्साह से मनाते थे। 17 वी शताब्दी में मैसूर के राजा बहुत उत्साह और ख़ुसी से यह त्यौहार संपूर्ण प्रजा के साथ मनाते थे।

3. कुछ पुराणो की मानें तो बताया गया है कि अगर भगवान श्रीराम ने अहंकारी रावण का वध न किया होता तो आज इस संसार में सूर्य का कोई अस्तित्व नहीं होता क्योंकि सूर्य हमेशा के लिए अस्त् हो चुका होता।

4. Dussehra-दशहरा रावण नामक अहंकारी राक्षस राजा के वध के फलस्वरूप ही नहीं अपितु महिषासुर राक्षस के वध होने के बाद की खुशी के रूप में भी मनाते हैं।

5. दशहरा श्रीराम द्वारा रावण का वध अर्थात् अच्छाई की जीत की खुशी में मनाते हैं इस जीत का श्रेय मा दुर्गा को भी जाता है क्योंकि दुर्गा मां द्वारा बताए गए रहस्य के आधार पर ही प्रभु श्री राम ने रावण का वध किया था।

यह त्यौहार मनाने की प्रथा:-

दशहरे के पर्व का संबंध शक्ति की विजय से है पुराणों की माने तो इस दिन दो राक्षसों का वध हुआ था। एक रावण नामक राक्षस, जिसका वध प्रभु श्री राम ने किया था तथा दूसरा महिषासुर नामक राक्षस जिसका वध दुर्गा मां ने किया था। दुर्गा माँ द्वारा महिषासुर के वध किए जाने की खुशी के जश्न को लोग उत्सव कहते हैं जिसका नाम दुर्गा पूजा दिया गया है।

जब संपूर्ण देश में 10 दिन तक दशहरे का उत्सव चलता है तो इसी बीच बंगाली समुदाय द्वारा 10 दिनों तक दुर्गा पूजा की जाती है। दुर्गा मां की मूर्ति स्थापित की जाती है और दसवें दिन उनको विसर्जित किया जाता है।

निष्कर्ष:-

यह त्यौहार विजय, विश्वास ,एकता, दृढ़ संकल्प आदि अच्छाई का प्रतीक है इस त्यौहार को मनाने का उद्देश्य आने वाली पीढ़ी में इन सब भावनाओं को जागृत करना है तथा एक सांस्कृतिक समाज की नींव रखी जा सके इसका प्रयास करना है जो आज के समय से विलुप्त होती नजर आ रही है।

संदेश:-

आज हमारे समाज में वह सब बुराइयां अपनी जगह बनाती जा रही है जो रावण के अंदर थी जैसे- असत्य ,अनैतिक, कटुता आदि अतः दशहरा हमें हर वर्ष यह सिखाता है कि उस युग में तो एक रावण था जिसका वध प्रभु श्री राम ने कर दिया परंतु आज के युग में यह सारी बुराइयां लगभग हर एक व्यक्ति के अंदर कहीं ना कहीं रावण को उत्पन्न कर रही है।

इसलिए हमें कोशिश करनी चाहिए हमें इन सब अवगुणों को अपने अंदर से खत्म करके समाज में रावण का नाश करें क्योंकि तब तो उस रावण का चेहरा एक था बस सिर 10 थे परंतु आज के मनुष्य में तो ना जाने कितने चेहरे छिपे हैं।

    उस युग में ,श्री राम ने आकर पार लगाया था।
उस युग में ,श्री राम ने आकर पार लगाया था।
यह तो है कलयुग ,यहां पर कौन पार लगाएगा।
यह तो है कलयुग ,यहां पर कौन पार लगाएगा।
आज नहीं तू सुधरा तो।
आज नहीं तू सुधरा तो।
कल वहां क्या मुंह दिखाएगा।
कल वहां क्या मुंह दिखाएगा।

सीख:-

रामायण अर्थात श्री राम की जीवन गाथा। इस जीवन गाथा से जितना सीखो उतना कम है। श्रीराम से हमें सीखना चाहिए कि साधारण मनुष्य के रूप में जन्म लेने के बाद भी अगर अच्छे आदर्शों का पालन करें तो महापुरुष भी बन सकते हैं।

रामायण में श्री राम के पद चिन्हों पर चलने वाले उनके छोटे भाई लक्ष्मण का चरित्र भी बहुत सी सीख देता है की कैसे उन्होंने अपने बड़े भाई पर अपना जीवन न्योछावर किया। आज के युग में ऐसा भाई मिलना असंभव सी बात है। दशहरे के पर्व से भी यह सीखने को मिलता है कि अहंकार के सूर्य को 1 दिन हमेशा के लिए अस्त होना होता है और न्याय और धर्म की सुंदर किरणें नई सूर्य के साथ चारों ओर रोशनी करती है।


दशहरे पर निबंध
Dussehra Essay Hindi Word 700

Dussehra-दशहरा क्या है:-

Dussehra-दशहरा का त्यौहार को विजयदशमी भी कहा जाता है यह हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला धार्मिक पर्व है और हिंदू कैलेंडर के अनुसार अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाते हैं क्योंकि उस दिन अहंकार के प्रतिक महाविद्वान रावण का वध किया था।

रावण के वध के बाद से हर वर्ष इस दिन विजयदशमी नाम का पर्व मनाने की प्रथा प्रारंभ हुई। विजयदशमी शब्द दो शब्दों से मिलकर बन है विजय और दशमी। विजय यानी जीत और दशमी यानी हिंदू महीने का दसवां दिन।

Dussehra-दशहरा क्यों मनाते हैं:-

यह कहानी है प्रभु श्री राम की है जो अयोध्या के राजकुमार थे ऐसा राजकुमार जो अपने माता-पिता की आज्ञा मानने को ही अपना जीवन समझते थे औऱ माता-पिता की आज्ञा का पालन करने हेतु श्री राम अपने भाई और अपनी पत्नी सीता के साथ वन में चौदह वर्ष के वनवास के लिए चले गए थे।

उस वनवास काल में ही लंकापति नरेश रावण नामक राक्षस राजा ने सीता का हरण करा था अतः उस राक्षस से माता सीता को मुक्त करवाने के लिए श्री राम ने रावण के साथ युद्ध किया औऱ युद्ध में जीत प्राप्त करने के लिए श्रीराम ने 9 दिन तक दुर्गा मां की पूजा की तथा दसवें दिन श्रीराम द्वारा रावण का वध हुआ इस प्रकार बुराई और घमंड की भावना का अंत हुआ और अच्छाई और सत्य की विजय हुई।

विजयदशमी की तैयारियां:-

1. विजयदशमी (दशहरा) के त्यौहार की तैयारी इस पर्व से 10-15 दिन पहले ही शुरू हो जाती है।

2. एक तरह से देखा जाए तो यह त्यौहार 10 दिन तक मनाया जाता है क्योंकि अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को तो रावण का दहन होता है परंतु रावण दहन से पूर्व देश के कोने-कोने में रामलीला का आयोजन किया जाता है।

3. दशहरे वाले दिन रामलीला में श्री राम और रावण का युद्ध दर्शाया जाता है तथा अंत में रावण के पुतले को जलाकर यह पर्व मनाने की परंपरा पूरी की जाती है।

4. रामायण पर आधारित इस धार्मिक कथा मंचन को करने के लिए लोगों के अंदर बहुत उत्साह देखा जाता है।

5. रामलीला हमें श्रीराम के आदर्शों पर चलने का ज्ञान देती है।

6. रावण का पुतला जलना इस बात का प्रतीक है कि बुराई, असत्य आदि कितनी भी हावी हो जाए अच्छाई और सत्य पर परंतु ये बुराइयां एक दिन जलकर राख हो ही जाती है।

दशहरा धार्मिक भावना के साथ साथ मनोरंजन का भी स्त्रोत है:-

Dussehra-दशहरा धार्मिक भावना को तो बढ़ावा देता ही है उसके साथ-साथ दशहरे के पर्व पर लोगों को मनोरंजन का भी एक अच्छा स्तोत्र मिलता है इस त्यौहार को मनाने के लिए जिस रामलीला का आयोजन किया जाता है उस रामलीला के साथ मेला भी लगता है।

इस मेले में बड़े और बच्चों के मनोरंजन के लिए खाने-पीने की दुकाने, झूले, विभिन्न प्रकार के सामान की दुकानें, बच्चों के लिए खिलौनों की दुकाने आदि लगते हैं जो परिवार को एक साथ समय बिताने का भी अवसर देते हैं।

निष्कर्ष:-

अतः यह पर्व जीवन में अच्छे आचरण को अपनाने और एक सच्चा इंसान बनने की प्रेरणा देता है श्रीराम ने जीवन में इतनी कठिनाइयां आने के बाद भी उन्होंने अपने आदर्शों को कभी नहीं छोड़ा और सही राह पर चलकर हर युद्ध में जीत हासिल की हमें भी ऐसे ही बनने का प्रयास करना चाहिए।

संदेश:-

यह त्यौहार हमें यह संदेश देता है कि समाज में फैले विभिन्न रावण को खत्म करने से पहले हमें जरूरत है अपने अंदर के रावण को खत्म करने की क्योंकि अगर हर व्यक्ति अपने अंदर के रावण को स्वयं पहचान कर खत्म करने का प्रयास करेगा तो इस संसार से स्वयं ही बुराई, असत्य, अनैतिक, लूटपाट आदि गलत भावनाओं का अंत हो जाएगा। ” रहेगा तो बस सुंदर देश”।

   आओ मिलकर आज से, यह प्रतिज्ञा ले उठा।
करेंगे हर बुराई को खत्म, तो होगा एक नया सवेरा।
श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाएंगे।
रावण की बुराइयों को खुद के अंदर से हटाएंगे।

सीख:-

दशहरे का त्यौहार प्रभु श्री राम की जीवन कथा से कुछ सीखने की प्रेरणा देता है श्रीराम का व्यक्तित्व ऐसा था कि उनके गुणों की गिनती करना असंभव है जिसमें से एक गुण था उनका आज्ञाकारी होना। श्रीराम अपने माता-पिता के आदर्श पुत्र थे जिन्होंने अपने माता-पिता के आदेशों का पालन करना ही अपना जीवन समझा।

माता पिता के साथ-साथ वे अपने गुरुओं के भी आज्ञाकारी शिष्य थे उनके गुरुओं ने जिस-जिस राह पर जब-जब चलने को कहा उन्होंने बिना कोई प्रश्न किए उस उस राह पर पग रखें जब पिताजी का वचन पूर्ण करने के लिए उनको वनवास जाने को कहा गया तो संपूर्ण राज महल में प्रश्नों की वर्षा हुई।

परंतु श्रीराम के मुख से ना तो ना निकली और ना ही कोई प्रश्न क्योंकि उनका तो चरित्र ही था आज्ञाकारी और आदर्शवादी तो प्रत्येक व्यक्ति को उनके इस चरित्र से यह दोनों गुणों को लेकर एक अच्छी संतान बनने का प्रयास करना चाहिए।


दशहरे पर निबंध
Dussehra Essay Hindi Word 1000

प्रस्तावना:-

Dussehra-दशहरा हर साल हिंदुओं द्वारा पूरे देश में मनाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहार है इस दिन लंकापति रावण का प्रभु श्री राम के द्वारा वध किया गया था जिसे बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक कहा जाता है। यह एक धार्मिक और सांस्कृतिक त्यौहार है। दशहरे के त्यौहार को विजयदशमी भी कहा जाता है यह भारत में मनाए जाने वाले त्योहारों में से सबसे महत्वपूर्ण व प्रमुख त्यौहार है।

दशहरे का त्यौहार कब और कितने दिन मनाया जाता है:-

Dussehra-दशहरा का त्यौहार हिंदू माह के अनुसार अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है एवं अंग्रेजी माह के अनुसार यह त्यौहार सितंबर या अक्टूबर माह में मनाया जाता है। दशहरा 10 दिन और 9 रात तक चलने वाला हिंदू त्यौहार है यह त्यौहार राम द्वारा रावण के मारे जाने के बाद जीत का स्मरण कराने का दिन कहा जाता है औऱ यह त्यौहार दीपावली से 20 दिन पूर्व मनाया जाता है।

      अश्विन मास के शुक्ल पक्ष में दशमी को मनाओ।
बुराई पर अच्छाई का प्रतीक वीरता से दिखाओ।

रामलीला के आयोजन की उत्सुकता:-

Dussehra-दशहरा का त्यौहार संपूर्ण भारत में बहुत उत्सुकता से मनाया जाता है। दशहरा मनाने से ज्यादा उत्सुकता लोगों में रामलीला का आयोजन करने की होती है रामलीला का आयोजन एक ही शहर में कई जगह पर किया जाता है जिसमें नाटक के द्वारा कथा मंचन करके संपूर्ण रामायण को लोगों तक पहुंचाया जाता है।

हर वर्ष रामलीला करने वाले कलाकार और अच्छा प्रदर्शन करने का प्रयास करते हैं। बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी इसमें भाग लेना बहुत भाता है तथा बच्चे इस रामलीला को देखने में भी बहुत रूचि लेते हैं जो हमारे समाज के लिए बहुत अच्छा है।

कई बार तो कलाकारों का प्रदर्शन दिल को इतना छू जाता है कि देखने वाले की आंखें कब नम हो जाती हैं उसे पता भी नहीं चलता। ना बस रामलीला, बल्कि इस रामलीला के साथ लगने वाले झूले, छोटी-छोटी, अलग-अलग सामानों की दुकानें अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

Dussehra-दशहरा के पर्व से जुड़ी मान्यता:-

कहा जाता है कि रावण नाम का एक राजा हुआ करता था जो श्रीलंका नामक देश में राज्य करता था। रावण को 10 सिर वाला दानव राक्षस राजा भी कहा जाता था वह बहुत घमंडी था औऱ घमंडी होने के साथ-साथ वह बहुत ज्ञानी भी था।

जब श्री राम माता सीता और लक्ष्मण जी वनवास गए तो सूर्पनखा जो रावण की बहन थी उसका श्री राम और लक्ष्मण के साथ कुछ मतभेद हो गया और क्रोध में आकर लक्ष्मण ने सूर्पनखा की नाक काटी दी।

इसी बात का बदला लेने के लिए रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया तब माता सीता को उस दानव से सुरक्षित वापस लाने के लिए राम जी को रावण के साथ युद्ध करना पड़ा उस युद्ध में भगवान राम ने रावण का वध किया तभी से उस दिन को दशहरे के उत्सव के रूप में मनाने लगे इस दिन मानो जैसे संपूर्ण भारत जगमगा उठता है।

दशहरे से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:-

1. श्री राम ने रावण के 10 सिर यानी बुराइयों को खत्म किया था जो बुराइयां आज भी प्रत्येक व्यक्ति में कहीं ना कहीं पनप रही हैं जैसे- पाप ,क्रोध, मोह ,लोभ, घमंड ,स्वार्थ, जलन, अहंकार , अमानवता और अन्याय।

2. Dussehra-दशहरा नामक पर्व मनाने का महत्व ना सिर्फ प्रभु श्रीराम से जुड़ा है अपितु यह पर्व दुर्गा मां से भी जुड़ा है। युद्ध में रावण नामक दानव को हराने के लिए श्री राम ने दुर्गा मां की पूजा की थी और दुर्गा माँ ने खुश होकर श्री राम को रावण को मारने का आशीर्वाद दिया था।

3. ग्रंथों की माने तो महिषासुर नामक एक असुर हुआ करता था जो बहुत अत्याचारी था उस असुर का विनाश करने के फलस्वरुप ब्रह्मा, विष्णु व महेश ने मां दुर्गा का निर्माण किया फिर महिषासुर और मां दुर्गा के बीच 10 दिनों तक युद्ध चला और अंत में दसवें दिन महिषासुर का नाश हो गया यह दसवां दिन दशहरे का था।

दशहरे का महत्व:-

Dussehra-दशहरा सामान्य रूप से एक जीत का जश्न मनाने का रूप है यह जीत है, अधर्म पर धर्म की, बुरे आचरण पर अच्छे आचरण की, असत्य पर सत्य की। जश्न चाहे अलग-अलग रूपों में हो परंतु इसका मकसद मनुष्य के अंदर बुराइयों का नाश करना है।

इस त्यौहार की खुशी मनाने की मान्यता सबकी अलग-अलग है किसान नई फसल घर आने का जश्न मनाते हैं, हथियारों और औजारों की पूजा होती है क्योंकि हथियार युद्ध में विजय दिलाते हैं यह जश्न हर युद्ध में मिलने वाली विजय का भी होता है।

इस त्यौहार के माध्यम से लोगों के अंदर भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने की भावना को जागृत करने को भी बढ़ावा मिलता है लोग इस दिन आपस में मिलते हैं जिसे भाईचारे की भावना का विकास होता है।

कलयुग में Dussehra-दशहरा:-

जैसे-जैसे इंसान आधुनिक रूप से तरक्की करता जा रहा है वैसे-वैसे कलयुग का इंसान सांस्कृतिक रूप से नीचे गिरता जा रहा है। कलयुग के मानुष में बुराईयाँ जन्म लेती जा रही है जैसे- लूटपाट, सामाजिक शोषण, महिलाओं के साथ गलत व्यवहार, असत्य की भावना, बच्चों को गलत संस्कार ,आदि।

यह बुराइयां इंसान के अंदर की इंसानियत खत्म करती जा रहे हैं तथा विजयदशमी का त्यौहार हमें हर वर्ष इन बुराइयों को कम करने या खत्म करने की याद दिलाता है। बस थोड़ी कोशिश करने की आवश्यकता है जिसे कलयुग के इंसान में से यह बुराइयां खत्म की जा सकती हैं।

निष्कर्ष:-

हिंदू समाज की मान्यता अनुसार दशहरे के पर्व का दिन अत्यंत शुभ होता है दशहरे का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत एवं असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है इस दिन कारीगर (मजदूर)अपने काम में प्रयोग किए जाने वाले यंत्रों की पूजा अर्चना करते हैं और कोई भी मीठा प्रसाद स्वरूप बांटते हैं।

Dussehra-दशहरा के दिन हमें अपने अंदर पल रही बुराइयों का अंत करके एक अच्छे सच्चे जीवन यापन की शुरुआत करनी चाहिए क्योंकि इस दिन श्री राम ने रावण नामक राक्षस राजा का वध किया था जिसके अंदर बुराइयां भरी हुई थी जो एक अच्छे इंसान को बुरा इंसान बनने की ओर अग्रसर करती हैं।

संदेश:-

Dussehra-दशहरा का पर्व अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देता है यह पर्व हमें हर वर्ष याद दिलाता है कि प्रत्येक व्यक्ति को धर्म की राह पर चलना चाहिए क्योंकि जब- जब किसी ने अधर्म की राह पर चलने की कोशिश की है उसका नाश अवश्य हुआ है जैसे श्री राम द्वारा रावण का नाश औऱ मा दुर्गा द्वारा महिषासुर का नाश आदि।

सीख:-

Dussehra-दशहरा का त्यौहार हमें यह सीख देता है कि जीत हमेशा सच, साहस, अच्छाई, वीरता जैसे भावों की ही होती है झूठ, बुराई, डर चाहे जितनी भी हावी हो परन्तु हर युग में इनका अंत होता है जैसे इतना शक्तिशाली, प्रतिभाशाली होते हुए भी रावण का नाश हो गया क्योंकि उसकी रहा गलत थी।

            झूठ, बुराई ,असत्य को छोड़कर।
सच ,अच्छाई ,सत्य की राह अपनाओ।
अपने अंदर पनप रहे रावण का आज अंत करो।
दशहरे का पर्व है, श्रीराम के आदर्शों को दिल में बसाओ।

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तो दोस्तों हमने आपको Dussehra-दशहरा के बारे में अलग-अलग लंबाई के निबंध लिखे हैं अगर आपको हमारे यह निबंध पसंद आते हैं तो आप अपनी आवश्यकता के अनुसार स्कूलों में इनका इस्तेमाल कर सकते हैं और साथ ही आपको भी इसके बारे में लोगों को अवगत करना चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया Dussehra-दशहरा पर निबंध काफी पसंद आए होंगे तो अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आता है तो उसे सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल है तो हमे कमेंट करें

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