2023 में करवा चौथ कब हैं जानिए दिनांक, पूजा मुहूर्त एवं चंद्रोदय का समय

करवा चौथ का व्रत हर साल भारत मे महिलाओं द्वारा बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता हैं जिसका उद्देश्य अपने पति की लंबी उम्र के लिए भगवान से प्राथना की जाती हैं इसलिए हर पतिव्रता स्त्री करवा चौथ कब हैं और कौनसी तारीख़ है इसका विशेष रूप से ध्यान रखती है।

भारत एक उत्सव प्रिय देश है यहां अनेक त्यौहार मनाए जाते हैं औऱ करवा चौथ भी उनमें से एक है। करवा चौथ, भारत में एक बहुप्रचलित व्रत या त्यौहार है यह परिवारों में बहुत उत्साह से मनाया जाता है।

करवा चौथ कब हैं जानिए दिनांक, पूजा मुहूर्त एवं चंद्रोदय का समय

करवा चौथ का व्रत आज भी पुराणिक रीति रिवाजों के साथ मनाया जाता हैं जो न केवल हिन्दू धर्म की संस्कृति और सभ्यता को दर्शाता है बल्कि यह अपने पति के प्रति प्रेम औऱ नारी शक्ति को दिखाता हैं।

लड़कियों की शादी के बाद करवा चौथ का व्रत सबसे पवित्र व्रत होता हैं और हर सुहागिन बहुत ही चाव औऱ आस्था के साथ इस व्रत का पालन करती हैं तो चलिए जानते है कि करवा चौथ कब हैं और कौनसी तारीख़ को है।

करवा चौथ कब हैं 2023 में


त्यौहार दिनतारीख
करवा चौथ व्रतबुधवार1 नवम्बर 2023

Days

Hours

Seconds

तिथिसमय
करवा चौथ व्रत समयसुबह 06:36 – रात 08:26
करवा चौथ पूजा मुहूर्तशाम 05:44 – रात 07:02
पूजा अवधि01 घंटा 17 मिनट
चांद निकलने का समयरात 08:26 (1 नवंबर 2023)

करवा चौथ क्या है


करवा चौथ एक व्रत हैं जो सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रख जाता हैं मान्यताओं के अनुसार सच्चे प्रेम से करवा चौथ का व्रत हैं ऱखने से सुहागिन का सुहाग बना रहता है।

करवा चौथ का व्रत हिन्दू, सिक्ख और जैन घरों में मनाया जाता है औऱ पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाने वाला व्रत है यह कार्तिक कृष्ण पक्ष के चंद्रयोदय शापिनी चतुर्थी या चतुर्थी को मनाया है।

इसी दिन संकष्टी चतुर्थी भी पड़ता है यह व्रत सुहागिन महिलाएं, अपने सुहाग, श्रृंगार को अखंड बनाने के लिए करती हैं अर्थात् पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है जिसमें चाँद का दीदार करके इस व्रत को सम्पूर्ण किया जाता हैं।

करवा चौथ क्यों मनाया जाता है


एक कथा है कि जब अर्जुन नीलगिरी पर तपस्या में लीन थे तथा वह तपस्या ब्रह्मास्त्र के लिए कर रहे थे तब द्रोपती यानी पांचाली ने उनकी चिंता में भगवान वासुदेव से इसका निदान पूछा।

भगवान कृष्ण ने द्रोपती को एक कथा सुनाई कि बहुत पहले एक करवा नाम की ब्राह्मण स्त्री थी जिसके सात भाई थे। वह मायके आई थी और उसने अपने पति की उम्र के लिए व्रत रखा था औऱ व्रत को चंद्रमा के निकलने के बाद खोलना था।

लेक़िन भाइयों ने मोह में पड़कर एक वृक्ष के ऊपर चढ़कर एक चलनी के सामने दीपक रख दिया जो उनकी बहन को वह चंद्रमा जैसा प्रतीत हुआ और बहन ने चंद्रमा को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया तथा भोजन करते ही उसका पति मर गया।

यह देख वह रोने लगी तब इन्द्राणी देवदासियों के साथ वहां से जा रही थीं औऱ रोने की आवाज़ सुनकर वह वहां पहुंची उन्होंने करवा से रोने का कारण पूछा तब करवा ने समस्त प्रकरण बताया तो इन्द्राणी बोली,

“तुमने चंद्रोदय से पूर्व ही भोजन ग्रहण कर लिया अब यदि तुम मृत पति की सेवा करती हुई बारह महीनों तक प्रत्येक चौथ को यथाविधि व्रत करो और विधिवत गौरी, शिव, गणेश, कार्तिकेय सहित चंद्रमा का पूजन करो तथा चंद्रोदय के बाद अर्घ्य देकर अन्न जल ग्रहण करो तो तुम्हारे पति अवश्य जीवित उठेंगे।

तब करवा ने इसका पालन किया और उसके पति जीवित हो गए यही कथा भगवान कृष्ण ने द्रोपती को सुनाई और व्रत का पालन करने के लिए कहा और द्रोपति ने करवा चौथ का व्रत रखा था जिससे अर्जुन चिरंजीव हुए औऱ मान्यता है की करवाचौथ का व्रत रखने से पति की आयु लम्बी होती है।

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व्रत की विधि:


1. व्रत शुरू सुबह चंद्रमा के अस्त होने से पहले ही स्नान ध्यान करके सरगी खाकर शुरू किया जाता है।

2. जिसे व्रता की सास यानी पति की मां भेजती हैं फ़िर जैसे सूर्य निकलता है व्रत शुरू हो जाता है।

3. दिन भर निर्जला व्रत रहने के बाद शाम को पूजा की जाती है।

4. करवा चौथ पर पूजा भगवान शिव, माता पार्वती, भालचंद्र गणेश, और कार्तिकेय की होती है।

5. पूजन के उपरांत पति पत्नी के माध्यम से चंद्रमा को अर्घ्य दिलाता है।

6. फिर पति-पत्नी को पानी पिलाकर व्रत को संपन्न कराता है।

पूजा कैसे की जाती है


1. पूजा करने के लिए सामान्यतः छत या आंगन जैसी जगह तय की जाती है अर्थात् जहां खुला आसमान हो जगह को साफ-सुथरा किया जाता है।

2. गेरू से सुंदर रंगोलियां बनाई जाती हैं व रंगोलियों के बीच में ही भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है।

3. प्रतिमा के सामने चावल पर कलश रखा जाता है औऱ कलश के लिए एक पीतल या किसी अन्य धातु के लिए लोटे में जल भर दिया जाता है।

4. एक मिट्टी के करवे में गेंहू और उसके ढकनी में शक्कर रखकर सामने रख दिया जाता है।

5. भगवान शिव को बेलपत्र और माता पार्वती को श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाया जाता है तथा श्रृंगार की वस्तुओं में वस्त्र, चूड़ी बिंदी, सिंदूर इत्यादि उपस्थित रहते हैं औऱ बाद में इन्हें पति की मां या बड़ी भाभी को उपहार कर दिया जाता है।

6. सुगंध यानी अगरबत्ती, कपूर, घी के दीपक, फूल इत्यादि भी समर्पित किया जाता है औऱ भोग में अन्य मिष्ठान भी चढ़ाए जाते हैं जिसमें भगवान गणेश के लिए लड्डू जरूर रखा जाता है।

7. भोग के लिए पक्का भोजन भी बनाया जाता है व पक्का भोजन यानी पूरी, मालपुआ, खीर, हलवा, जैसे व्यंजन।

8. आठ पुरियों की अठावरी भी बनाई जाती है व पक्के भोजन के साथ साथ फल जैसे केला, सेब, सिंघाड़ा इत्यादि भी चढ़ाया जाता है।

9. करवा में दूध, जल और गुलाब जल भर कर रख दिया जाता है फिर इसके बाद करवाचौथ की कहानियां भी कही और सुनी जाती हैं यह कहानियां लोक श्रुतियों, पौराणिक कथाओं पर आधारित होती हैं।

10. करवाचौथ में श्रृंगार का विशेष महत्व है इस दिन नई चूड़ियां, कपड़े, आलता, नेल पॉलिश, पायल, गहने, गजरा पहनकर महिलाएं पूजा के लिए तैयार होती हैं।

11. पूजा के दौरान कथा भी कही और सुनी जाती है तथा करवाचौथ व्रत के लिए कई प्रकाशनों से कहानी की किताबें आती हैं जो बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं।

12. पूजा उस समय शुरू की जाती है जैसे कि चंद्रमा के निकलते भर में कहानी पूरी हो जाए चंद्रमा के निकलते ही पति पत्नी को अर्घ्य दिलाता है जो करवे में रखे जल, दूध के मिश्रण से दिया जाता है।

13. व्रती नई चलनी में चांद और पति का चेहरा देखती है व पति-पत्नी का व्रत का भोजन को हाथों से खिलाकर और पानी पिलाकर खुलवाता है औऱ पति पत्नी को उपहार भी देता है।

करवाचौथ का महत्व:


करवाचौथ व्रत से मान्यता है कि माता पार्वती से सुहाग का वर, भगवान गणेश से सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है औऱ इस व्रत से घर में सुख, शांति का वास होता है।

कार्तिक के चंद्रमा की छांव शीतलता प्रदान करती है जो सर्दी में शरीर को अनुकूल बनाने में सहायता करता है आज के दौर में समय की कमी ने रिश्तों में दूरी बनाई है यह पर्व निकट रहने वाले दंपतियों में विश्वास पैदा करता है।

करवाचौथ दृढ़ आस्था, संकल्प, निश्चय, समर्पण, विश्वास का पर्व है करवाचौथ का व्रत दाम्पत्य को विश्वास से जोड़ता है आज के दौर में जब आपसी संबंधों में टूट देखा जा रहा है, तब ऐसे पर्व संबंधों की गुंजाइश को और बेहतर करने का कार्य करते हैं।

पत्नी जब कठिन तपस्या समूचा व्रत पति के लंबी उम्र के लिए रख सकती है तब पति को भी पत्नी के प्रति अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहना सीखना चाहिए। पुरुष को न सिर्फ़ करवाचौथ के दिन अपितु जीवन के हर क्षण में पत्नी का ख़्याल रखना सीखना चाहिए साथ ही सम्मान करना सीखना चाहिए।

करवाचौथ में अलग-अलग जगहों के अलग-अलग रिवाज़ भी होते हैं कुछ जगहों पर करवाचौथ का उपहार मायके से भेजा जाता है। करवाचौथ के उपहार में कपड़े, जेवर, और करवा भेजा जाता है औऱ अलग-अलग घरों में परंपरा अनुसार भी विधियां संपन्न होती है।

तो आज हमने आपको करवा चौथ कब है और क्यों मनाया जाता है इत्यादि की के बारे में विस्तार से बताया है उम्मीद की इस आर्टिकल को पढने के बाद आपको करवा चौथ के बारे में अच्छी तरह जानने में मद्त मिली होगी।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आता है तो करवा चौथ कब है इस बारे में उन्ह सभी को बताने के लिए शेयर के जिनके लिए बहुत महत्वपर्ण है और जिनको करवा चौथ के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है

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