शिवपुराण- Shiv Puran की सम्पूर्ण जानकारी

“शिव” यह दो अक्षर से बने शब्द में पूरा ब्रम्हांड समाहित है इस संसार के कण-कण में देवों के देव महादेव विराजमान हैं जब इस दुनिया का जन्म भी नहीं हुआ था तब से महाकाल का अस्तित्व माना जाता है औऱ शिव पुराण(Shiv Puran) में शिवजी का विस्तार से वर्णन किया गया है।

सनातन धर्म में यह मान्यता है कि इस सृष्टि के रचयिता भगवान शिव हैं और उनकी कृपा हर जीवित प्राणी पर बनी रहती है भोलेनाथ अपने भक्तों को एक ही समान मानते हैं इसीलिए तो महादेव की आराधना भगवान श्री राम से लेकर सभी देवगण और रावण से लेकर सभी दैत्यगण किया करते थे।

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भोलेनाथ की महिमा और महानता को समझने के लिए इंसानी दिमाग में इतनी ताकत नहीं हैं फ़िर भी हर कोई शिव को जानने की इक्षा रखता है भगवान के दर्शन पाने की लालसा रखता है मगर महामृत्युंजय की लीला को जीवनपर्यंत समझ नहीं पाता।

आप में से ज़्यादातर लोगों के मन में एक न एक बार तो भोलेनाथ को जानने की इक्षा जागृत हुई होगी और मन में यह प्रश्न तो होगा कि आखिर भगवान शिव क्या हैं, उन्हें क्यों पूजा जाता है, क्या वो मानवरूपी हैं या निरंकार हैं? वह दिखते कैसे हैं, उनका जन्म कैसे हुआ और क्या भोलेनाथ इस कलयुग में भी इसी संसार में बसते हैं? ऐसे ही हज़ारों सवाल हमारे मन में घूमते रहते हैं।

लेकिन आदियोगी को कोई पूरी तरह समझ नहीं सकता है इसीलिए तो हम मनुष्यों ने भगवान शिव के को अपनी कल्पनाओं में एक आकर दिया है और हम उसी आकर की पूजा कर उसमें भी शिव का वास मानते हैं।

अगर आप भी भगवान शंकर को जानने की इच्छा रख रहे हैं तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं क्योंकि आज हम महाऋषि वेदव्यास द्वारा रचित शिवपुराण(Shiv Puran) के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमे वेदव्यास जी ने भगवान शिव के स्वरूप, उनकी महानता, महिमा, भोलेनाथ से जुड़े रहस्य और उपासना का विस्तार से वर्णन किया है।

शिव पुराण(Shiv Puran) क्या हैं

महाभारत और श्रीमद्भगवतगीता सहित 18 पुराणों व उपपुराणों की रचना करने वाले महाऋषि वेदव्यास द्वारा शिवपुराण की रचना की है जोकि देवभाषा संस्कृत में लिखी गई है तथा शिवपुराण में कुल 28 हज़ार श्लोक हैं जिनमे महादेव का वर्णन किया गया है।

वेदव्यास जी ने शिवपुराण(Shiv Puran) में भगवान शिव की लीला और कथाओं सहित उनकी पूजा आराधना पद्धति को बताया है इसके अलावा भगवान शिव का जीवन चरित्र, विवाह, रहन के बारे में वर्णन किया है।

Book Name Shivpuran
Author Gita Press
Language Hindi
Pages
Star Rating 4.7 out of 5
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वेदव्यास कहते हैं कि शिव जो की स्वयम्भू हैं निरंकारी हैं वही सर्वोपरि हैं, पूरी कायनात की चेतना हैं और इस ब्राम्हण का आधार हैं यह पूरी दुनिया उन पर टिकी है। सनातन संस्कृति में शिवपुराण को बाकी सभी पुराणों में सर्वोच्च दर्जा प्राप्त है।

ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त शिवपुराण पढ़ कर भोलानाथ की उपासना करता है उसके हर दुःख दर्द को भगवान हर लेते हैं शिवपुराण एक महान पुराण हैं जिसको कुल 6 खंडों या भाग में विभाजित क्या गया है।

1. विधेश्वर संहिता

2. रुद्र संहिता

3. कोटिरुद्र संहिता

4.उमा संहिता

5. कैलास संहिता

6. वायु संहिता

शिव की उत्पत्ति कैसे हुई

शिवपुराण के अनुसार भगवान भोलेनाथ इस दुनिया के जन्म से पहले से मौजूद हैं और इसके अंत के बाद भी वह अन्तकाल तक रहेंगे शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव की उतपत्ति मां आदिशक्ति और सदाशिव से हुई है।

पुराण में एक लेख के अनुसार शिव आदिशक्ति और सदाशिव से यह कहते हैं कि माँ भगवान विष्णु और ब्रम्हा की उत्पत्ति आपसे हुई और मेरा जन्म भी आपसे ही हुआ इसीलिए मैं भी आपका संतान हूँ। पुराण के अनुसार भगवान विष्णु और भगवान ब्रम्हा सदाशिव के आधे अवतार हैं जबकि शिव सदाशिव की पूर्ण अवतार हैं।

इसीलिए उनका आकर, वेशभूषा, गुण, सदाशिव जैसा ही है शिवपुराण के अनुसार सदाशिव कहते हैं कि जो भी मुझमे और शिव में भेद करेगा वह नरक का भोगी होगा इसी तरह ब्रम्हा, विष्णु, महेश में जो भी भेद करेगा वह नरक जाएगा हम तीनों एक ही हैं मगर इस संसार के लिए हम अलग-अलग रूप लेते हैं।

शिवपुराण को समझने की जरूरत

जब हम सदाशिव की बात करते हैं तो हम इस संसार की महान आत्मा के बारे में सोचते हैं जब हम शिव कहते हैं तो वह निराकार ईश्वर जोकि सदाशिव ही हैं उनका ध्यान करते हैं और जब भगवान शंकर की बात करते हैं तो उनके मानवरूपी धरती में रहने वाले भोलेनाथ की बात करते हैं जिन्होंने माँ पार्वती से विवाह किया और भगवान गणेश व कार्तिकेय को जन्म दिया है।

सनातन संस्कृति में शिव को कई रूपों में माना जाता है मानवों ने शिव को एक आकर दिया है तथा हिंदुओं में यह धारणा है कि शिव भोले हैं, नादान हैं, वह शास्त्रों और तन्त्रो के महान गुरु और शिक्षक हैं वह रक्त से रंगे भैरव हैं जो आसानी से सबको माफ कर देते हैं इसका अर्थ यही है कि जीवन में जितने भी पहलू हैं वही शिव है।

अगर आप शिवपुराण को पढ़ कर ध्यान से समझे तो आप यह जरूर समझ जाएंगे कि शिव को पूरी तरह समझना मुमकिन नहीं है क्योंकि शिव अच्छे- बुरे के रूप में नहीं हैं बल्कि वह सब कुछ हैं, वह सबसे अच्छे भी हैं और बुरे भी हैं, वह सबसे सुंदर हैं और सबसे वीभत्स भी हैं, वह अनुशाषित भी हैं और भांग का सेवन भी करते हैं।

शिवपुराण में और क्या-क्या है

इस संसार के जन्म से लेकर सदाशिव, शिव, और भगवान शंकर का वर्णन शिवपुराण में मिलता है इसके अलावा भगवान द्वारा मनुष्यों और अन्य प्राणियों के लिए किए गए परोपकार को भी बताया गया है।

भगवान शंकर और माँ पार्वती के बीच कई विषयों में वर्तालाप, दुःख, सुख, जीवन मरण, आत्मा परमात्मा इन सब के बारे में लिखा गया है साथ ही किस वक़्त, कब कहाँ और कैसे भगवान की पूजा करनी चाहिए इसका भी वर्णन किया गया है।

शिवपुराण में लिखी हर एक बात को इस आर्टिकल में समझना बहुत ही मुश्किल और लगभग नामुमकिन है अगर आपको भगवान शिव के बारे में जानना है तो शिवपुराण का अध्यन करना ज्यादा उचित है।

शिवपुराण(Shiv Puran) क्यों पढ़नी चाहिए

भगवान शिव को जानने की जिज्ञासा रखने वाले हर उस व्यक्ति को शिवपुराण पढ़नी चाहिए देखा जाए तो वर्तमान में सनातन धर्म से जुड़े लोग बिना अपने ईश्वर को जाने उनकी आराधना करते हैं।

ज्यादातर लोग यही जानते हैं कि शिव कैलाश पर्वत में रहते हैं वह मां पार्वती के पति हैं और वह भक्तों की पीड़ा हर लेते हैं जबकि भोलेनाथ इससे कई ज्यादा हैं और साथ ही शिवपुराण को पढ़ना और समझना दोनों अलग-अलग बात है।

तो अगर आपके अंदर भगवान शिव को जानने की इच्छा है तो यह पुराण आपको जरूर पढ़ना चाहिए और साथ ही सनातन धर्म के पुराणों का अस्तित्व और उनमें लिखे ज्ञान को आने वाले भविष्य में सुरक्षित रखने के लिए भी पढ़ना चाहिए।

महाकाल का न तो कोई आदि है न ही अंत है हम ईस्वर को जिस रूप में देखते हैं वह हमें उसी रूप में अपने दर्शन देते हैं अगर आपको महादेव के बारे में जानना है तो शिवपुराण सही और एकमात्र विकल्प है।

क्वांटम मेकेनिक्स का विज्ञान है शिवपुराण

शिवपुराण को ध्यान से पढ़ने पर आपको यह आभास होगा कि इस पुराण में सापेक्षता के सिद्धांत औऱ क्वांटम मेकेनिक्स के सिद्धांत हैं शिवपुराण में आधुनिक भौतिकी विज्ञान को कहानियों के रूप में लिखा गया है।

देखा जाए तो शिवपुराण में इस दुनिया की उतपत्ति का पूरा विज्ञान समाया है बस दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि लोगों ने पुराण के विज्ञान को अनदेखा कर दिया और सिर्फ़ कहानियों पर ध्यान केंद्रित किया इसलिए शिवपुराण को कहानी के तरह नहीं बल्कि विज्ञान की तरह जानने की जरूरत हैं।

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