IED का Full Form क्या है और IED बम की पहचान

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पिछले कुछ दशक में भारत ने कई सारे आतंकी हमलों को देखा और इन आतंकी हमलों में आमतौर पर IED ब्लास्ट का इस्तेमाल किया जाता है और माना जाता है कि यह आतंकियों का सबसे खास हथियार होता है इसीलिए IED का Full Form क्या है और आतंक इसका इस्तेमाल क्यों करते हैं।

जैसा कि आप सब जानते हैं भारत में होने वाले आतंकी हमलों में IED ब्लास्ट जैसे तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है हालांकि भारत में नक्सलियों द्वारा भी कई वारदातों को IED ब्लास्ट के द्वारा अंजाम दिया गया है।

IED ka full form Kya Hai IED का Full Form

इसलिए जब IED ब्लास्ट जैसे शब्दों का समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनल पर इस्तेमाल किया जाता है तब हमारे मन में IED का Full Form क्या है और आखिरकार आतंकी और नक्सलियों द्वारा IED ब्लास्ट का इस्तेमाल क्यों किया जाता है इस तरह के कई सारे सवाल हमारे मन में उठते हैं।

तो चलिए हम आपको बताते हैं IED का Full Form क्या है और IED ब्लास्ट का भारत में कब-कब और कहां-कहां इस्तेमाल हुआ है ऐसे सभी जानकारी आज हम आपको इस आर्टिकल में देने वाले हैं इसलिए इस आर्टिकल को एक बार पूरा जरूर पढ़ें।

IED का Full Form क्या है

IED का Full Form यानी का पूरा नाम “Improvised Explosive Device” इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस होता हैं और अगर हम हिंदी में बात करे तो कामचलाऊ विस्फोटक युक्ति बम कहा जाता है जो बहुत खतरनाक बम है और आसानी से किसी के भी छक्के छुड़ाने में समर्थ है।

यह बम आर्टिलरी राउन्ड से बने होते हैं जो बेहद खतरनाक मेकेनिज्म से ढका होता है इसका अधिकतर उपयोग सैन्य क्षेत्रों में सैनिको द्वारा या आतंकियो द्वारा किया जाता है। इन्हें तार की सहायता से सड़क किनारे फिट कर दिया जाता है और जब कोई इस पर से गुज़रता है तो ब्लास्ट हो जाता है इसका धुआँ भी बहुत काला होता है जो दूर क्षेत्रों तक जाता है।

कामचलाऊ विस्फोटक युक्ति यानी improvised explosive device जो भी बनाता है वह इसे सही तरह से जानता है कि इसकी शक्ति कितनी है और यह किस गति से काम करेगा क्योंकि यह कम या अधिक ताकत वाले दोनों तरह से बनाए जाते हैं।

हम यहाँ आपको बता दें कि चार पहिओं वाली गाड़ी के लिए जो बम चुना जाता है या उपयोग में लाया जाता है उसे सैनिको की टुकड़ी या दल व्हीकल बॉर्न आईईडी या वीबीआईईडी नाम से पुकारती है। इसके अतिरिक्त इस शक्तिशाली बम को मोटरबाइक, स्कूटर, साधारण सी साइकिल या किसी जानवर पर भी लगाकर इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि यह बम सैनिकों के कामों के लिए बनाएं जाते हैं तो आम बमों से काफी अलग होते हैं औऱ कहने को कामचलाऊ की श्रेणी में आता है पर काम बहुत खतरनाक करता है।

आईईडी बम की पहचान

IED बम की यदि पहचान करनी है तो ध्यान रखीये इन बमों का अपना कोई विशेष आकार नहीं होता और यह बड़ी जल्दी बन जाते हैं साथ ही बम बनाने में जो सामान उपयोग में लाया जाता है वह भी नाप तौल कर नहीं लगाते बल्कि अंदाज़े से बम में डाला जाता है।

तभी तो कभी यह बम कम ताकतवर बनता है तो कभी बहुत अधिक ताकतवर बन जाता है तथा आईईडी बम बनाने की किसी को भी Permission नहीं होती यह गैर कानूनी व अवैध समझा जाता है असल मे आईईडी बम आतंकवाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है इसलिए अधिकतर आतंकवादी इसका इस्तेमाल करते हैं जबकि मिलिट्री द्वारा कन्वेंशनल बम उपयोग मे लाया जाता है जो सुरक्षित व वैध घोषित किया गया है।

-YouTube का मालिक कौन है 
-भारत की जनसंख्या कितनी है
-भारत के सबसे अमीर आदमी कौन है
-भारत का राष्ट्रपति कौन हैं

IED का इस्तेमाल क्यों किया जाता है

कहने को तो कामचलाऊ विस्फोटक युक्ति Improvised Explosive Device बिल्कुल बम ही होता है परंतु मिलिट्री में जो बम बनाएं जाते हैं व उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं उनसे यह अलग तरह का होता है।

अधिकतर आईईडी बमों का प्रयोग आतंकवादी करते हैं अपना आतंक फैलाने के लिए या दहशत कायम करने के लिए विशेषत: आतंकवादी जब कोई बड़ा नुकसान पहुंचाना चाहते हैं तब इस बम का इस्तेमाल करते हैं इसकी ख़ास बात यह है कि यह बम फटते ही आग की लपटों में बदल जाता है और तुरंत आग लग जाती है।

यह बम ऐसा होता है कि अगर कोई गाड़ी का पहिया इस पर चढ़ जाए या किसी का पैर इस पर रखा जाए तो सीधे ब्लास्ट हो जाता है आप सबने देखा व सुना भी होगा कि कहीं से यह खबर हमारे सुनने में आती है कि वहाँ सड़क पर चलते समय किसी गाड़ी में बलास्ट हो गया है और तेज़ी से धुंआ चारों ओर फैल जाता है तथा आसमान काला हो जाता है सबकुछ धुंधला सा लगता है।

हमारे देश भारत में नक्सलियों की समस्या काफी पुरानी है तथा नक्सलियों ने भी अपने कई उद्देश्यों को पूरा करने के लिए IED ब्लास्ट का इस्तेमाल किया और देश को काफी हानि पहुंचाई थी इसको इस्तेमाल करने के लिए आतंकवादी रिमोट का इस्तेमाल करना बेहतर समझते हैं वैसे तो ये लोग इंफ्रारेड या मैग्नेटिक ट्रिगर्स, प्रेशर-सेंसिटिव बार्स या ट्रिप वायर जैसे उपायो को भी इस्तेमाल में लाते हैं।

देखा जाए तो यह सब निर्भर करता है कि आंतकवादियों को किसमें फायदा है और क्या करने में सुविधा है कई स्थानो पर जाँच में यह भी पाया गया है कि जहाँ IED ब्लास्ट हुआ था उस जगह की सड़को पर तार की मदद से IED को फिक्स किया गया था और जब कोई गाड़ी उस पर से गुज़री वही ब्लास्ट की बलि चढ़ गया।

पुलवामा में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद-मोहम्मद द्वारा जो आतंकी हमला किया गया वह IED ब्लास्ट का ही परिणाम है जिसमें हमारे देश की सेना ने ऑपरेशन ऑल आउट के द्वारा जम्मू-कश्मीर में अनेक आतंंकियों की टुकड़ियो व दल को मार गिराया है जिससे जैश-ए-मोहम्मद को यह हार बर्दाश्त नहीं हुई और उसने क्रोध में आकर पुलवामा में इस बम का इस्तेमाल कर आंतक फैलाने व लोगो को मारने का प्रयास किया।

आतंकवादी इस बम का उपयोग अधिकाधिक मात्रा में करते रहे हैं इससे पहले की घटना शायद हम सब अभी तक नहीं भूले हैं जहाँ सन 2016 में पठानकोट में एयरबेस में आतंंकियों द्वारा ब्लास्ट किया गया था जिसमें काफी बड़ी संख्या में लोग मरे और घायल भी हुए थे इसलिए IED आतंंकियों को आगे बढ़ने व आतंक फैलाने का एक महत्वपूर्ण ज़रिया है जो आतंकवाद को बढ़ावा देता है।

IED बम के प्रकार कितने है

अधिकतर आतंकवादियो व दंगाईयों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले आईईडी बम सस्ते होते हैं और साधारण ढंग से बनाए जाते हैं यह जल्दी बन जाते हैं और इसमे अधिक धन भी खर्च नही होता इस आधार पर Explosive Device दो प्रकार के होते है।

1. ओपन बम/ खुला बम
2. क्लोज़्ड बम/ बंद बम

इनके नाम ही से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह प्रकार किस तरह के हैं जब बम में इसके भागो में से कुछ भी दिखाई देने लग जाए तो इसे खुला बम कहा जायेगा और जब बम में इसके सभी भाग छुपे रहे तो बंद बम कहा जायेगा जैसा कि नाम से स्पष्ट हो रहा है।

जिस प्रकार IED यानी यानी Improvised Explosive Device दो प्रकार के होते हैं इसी अनुसार IED बम में मुख्य रूप से चार भाग होते हैं जो इस प्रकार है।

1. एक्सप्लोसिव (Explosive)
2. डिटोनेटर (Detonator)
-डिटोनेटर थर्मल (इम्प्रोवाइज्ड)
-डिटोनेटर केमिकल (इम्प्रोवाइज्ड)
-डिटोनेटर फ्रिक्शन (इम्प्रोवाइज्ड)
-डिटोनेटर प्रोपोल्लेंट (इम्प्रोवाइज्ड)
3. ट्रिगर मेचानिज्म (Trigger mechanism) 
4. पॉवर सोर्स (Power source)

IED का प्रयोग पहली बार कँहा औऱ कब-कब हुआ?

IED जिसे इंप्रोवाइज्‍ड एक्‍सप्‍लोसिव डिवाइस भी कहा जाता है आपको याद होगा कि जब इंडिया में मुजाहिद्दीन का बेहद खतरा बढ़ा हुआ था और जहाँ देखो वहीं हमलों की घटनाएँ व समाचार सुनने को मिलते रहते थे यह वही संगठन था जो आईईडी बम का सबसे अधिक मात्रा में इस्तेमाल किया करता था।

जिससे ना केवल दहशत फैली बल्कि लोगो को जान माल की हानि भी पहुंची क्योंकि यह बम छुपाने में सबसे आसान होता हैं कहीं भी सरलता से फिट किया जा सकता है इसलिए अधिकतर आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए इस बम को अधिक सुरक्षित माना जाता है।

हमारे देश भारत में कई बार IED बलास्ट के ज़रिए आतंकवादी हमले हुए हैं और होते भी आ रहे हैं आप जम्मू कश्मीर ही का उदाहरण ले लीजिए वहाँ तो IED ब्लास्ट एक आम बात हो चुकी है IED के ब्लास्ट की बात करें तो इस शब्द का सबसे पहले प्रयोग इराक वॉर के समय हुआ था।

भारत में कई बार आतंकियों ने IED ब्‍लास्‍ट के जरिए हमलों को अंजाम दिया है सबसे पहले 2011, तारीख थी 13 जुलाई वहीं जम्मू कश्मीर में एक साथ तीन IED ब्लास्ट हुए थे जो काफी खतरनाक साबित हुए थे और जिनमें लगभग 150 के करीब लोग घायल हुए थे और तकरीबन 25 लोग मारे गये थे।

इसके एक साल के बाद ठीक सन् 2013 में 21 फरवरी को ही हैदराबाद के दिलकुश नगर में भी ज़बरदस्त ब्लास्ट किया गया था जो IED का ही परिणाम था औऱ साल 2016 में जब जैश-ए-मोहम्‍मद ने पठानकोट स्थित इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के एयरबेस को निशाना बनाया तो उसमें आईईडी का ही प्रयोग हुआ था।

आपको बताते हैं कुछ नाम उन बमों के जो आतंकवादी संगठनों द्वारा प्रयोग किए जाते हैं वह नाम हैं:-

-बुक बम
-घी टिन बम
-मिठाई का डिब्बा बम
-डोरमैट बम
-टिफ़िन काररीएर बम
-गुलदस्ता बम
-पेन स्टांड बम
-पाइप बम(Pipe Bomb)
-डोर टोगल बोल्ट बम
-इम्प्रोवाइज्ड शेप्ड बम
-हाथ गोला
-बोतल बम
-लैटर बम (Letter Bomb)

वैसे तो IED बम लगभग हर स्थान पर इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन आतंकवादियों द्वारा अधिकतर जिन स्थानों पर आईडी बम का इस्तेमाल किया गया है वह इस प्रकार है

-कच्चे रास्तो पर
-कोई भी पुल हो या कोई छोटी पुलिया हो।
-वो सड़के जहाँ पत्थर पड़े हों या ऊबड़ खाबड़ मिट्टी व ईंटे पड़ी हों।
-सेना/ फौज व सैनिको के आने जाने वाला रास्ता
-सड़क किनारे जो बहुत महत्वपूर्ण स्थान है जहाँ आतंकवादी अक्सर आईईडी बम का इस्तेमाल करते ही हैं।
-सड़क से छुपी दीवारें जहाँ किसी को शक ना हो। दीवार की ओट में।
-किसी पेड पर चाहे पेड़ कटा हो या गिरा हो।
-जहाँ चार सड़के आकर मिलती हों वहाँ भी बम लगाते हैं क्योकिं वहाँ भीड़ अधिक इक्ट्ठा रहती है।
-किसी के सामान में
-पब्लिक प्लेस पर
-जो आतंकवादी मर जाते हैं उनके मृत शरीर में रख देते हैं जब भी कोई उसे हाथ लगाता है सब कुछ ब्लास्ट में बदल जाता है।

TRP Full Form ISRO Full Form
UPSC Full Form SSC Full Form
RIP Full Form ITI Full Form
PUBG Full Form LOC Full Form

तो दोस्तों हमने इस आर्टिकल में ना केवल आपको IED का Full Form क्या है इसके बारे में जानकारी प्रदान की है बल्कि आईडी बम का पहली बार कब और कैसे प्रयोग किया गया था तथा IED बम व ब्लास्ट से जुड़ी सभी तरह की जानकारी प्रदान करने का प्रयास किया है।

तो दोस्तों अगर आपको हमारा यह आर्टिकल किसी भी तरह से मदतगार और ज्ञान से भरपूर लगता है तो आप इसे अपने सभी दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर Share करकें हमारी इस मेहनत को सफल बनाने का प्रयास करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग IED का Full Form क्या है और IED का प्रयोग पहली बार कँहा औऱ कब-कब हुआ इसके बारे में जान सके तो अब अगर आपने यहां तक पढ़ लिया तो एक Share करना बनाता है मेरे दोस्त!!!

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