Full Form: DNA क्या है और कहाँ पाया जाता है

विज्ञान में अपने डीएनए के बारे में पढ़ा होगा और अगर नही पढ़ा तो अपने DNA के बारे में कभी न कभी जरूर सुना होगा क्योंकि यह नाम आपको बहुत बारे सुनें को मिलता है परंतु अधिकतर लोगों को DNA Full Form क्या है इसकी जानकारी नही होती हैं।

जी हां! मनुष्य के शरीर में मौजूद सबसे अहम अणुओं में से एक डीएनए है जिसके बारे में अक्सर समाचार पत्रों व टेलीविजन पर हमें खबरें सुनने को मिलती हैं लेक़िन यह DNA क्या है और इसका पूरा नाम क्या होता है लोगों को इस विषय पर कुछ खास जानकारी नहीं होती है।

Full Form DNA Kya hai sanrachna hindi

क्या आप जानते हैं जन्म लेने के पश्चात हम सभी में डीएनए पाया जाता है जो हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है अर्थात एक व्यक्ति का डीएनए दूसरे व्यक्ति के डीएनए की तरह नहीं हो सकता हालांकि यदि वे जुड़वा है तो ऐसा हो सकता है।

एक शिक्षित इंटरनेट यूज़र होने के नाते आपको DNA के बारे में जरूर जाना चाहिए की DNA क्या है? यह कितने प्रकार का होता है? DNA की खोज किसने की थी ऐसे सवाल अक्सर एक विद्यार्थी के मन में जरूर आते हैं और यदि आप भी DNA के विषय में जानने के लिए उत्सुक हैं तो इस लेख में आपको आपके इन सभी सवालों का जवाब मिलेगा।

DNA Full Form क्या है

DNA Full Form यानी DNA का पूरा नाम Deoxyribonucleic Acid होता हैं जिसे हिंदी भाषा में डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल कहा जाता हैं डीएनए का अणु चार वस्तुओं से बना होता हैं और अणुओं की संरचना घुमावदार सीढ़ी की तरह होती है।

प्रत्येक मावन को अपने माता पिता से 23 जोड़ें डीएनए मिलते है और प्रत्येक जोड़ें में से एक माता व एक पिता द्वारा प्राप्त होता है इसलिए हर व्यक्ति का डीएनए उसके माता पिता के डीएनए के मिश्रण से बना होता है।

DNA की जानकारी

DNA एक न्यूक्लिक एसिड है जिसके अंतर्गत सभी जीवित प्राणियों के विकास के निर्देश होते हैं सभी जीवित प्राणियों एवं यहां तक कि वायरस में भी DNA पाया जाता है!

सरल शब्दों में कहें तो DNA प्राणी के शरीर में मौजूद एक जेनेटिक कोड होता है जिसके जरिए मनुष्य के शरीर की सभी विशेषताओं को निर्धारित किया जा सकता है।

असल में आपके शरीर का डीएनए ही बताता है की आप है कौन? आपकी पहचान क्या है? जब एक बच्चा पैदा होता है तो उसके माता-पिता के DNA बच्चे के शरीर में प्रवेश करते हैं इसी प्रक्रिया को हम Hereditary Material अर्थात एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में सूचना पहुंचना कहते हैं।

इसीलिए किसी भी व्यक्ति के डीएनए को पता करके यह पता लगाया जा सकता है कि उसके माता-पिता कौन हैं औऱ इसी प्रकार क्या आप जानते हैं मनुष्य, पक्षी, और जितने भी सजीव प्राणी हैं उन सभी में DNA पाया जाता है! अतः आपका DNA ही आपकी पहचान होता है।

मनुष्य का शरीर अणुओं से मिलकर बना होता है और DNA नामक इस अणु का आकार सीढ़ी दार होता है जो थोड़ा सा घुमावदार होता है प्रत्येक मनुष्य में एक विशेष डीएनए नहीं होता है एक डीएनए में विभिन्न क्रम पाए जाते हैं और इसी क्रम के कुछ भागों में विशेष कोड्स होते हैं यह कोड किसी विशेष प्रोटीन कि सहायता से मिलकर मनुष्य के शरीर में बने होते हैं।

और उसी विशेष DNA को हम जीन्स के नाम से जानते हैं मनुष्य के शरीर में पाए जाने वाले यह जींस डीएनए का एक छोटा सा भाग होते हैं अतः क्योंकि DNA विशेष प्रोटीन से मिलकर बने होते हैं इसलिए यह प्रत्येक मनुष्य की अलग-अलग विशेषताओं को दर्शाते हैं।

उदाहरण के तौर पर आपकी आंखों का रंग कैसे होगा यह भी DNA डिसाइड करता है?

इसके अलावा इसका प्रभाव शरीर के अनेक भागों में पड़ता है इसलिए इसका उपयोग व्यक्ति के संबंध को भी पता करने के लिए किया जाता है। कई बार आपराधिक गतिविधियों में भी इसका इस्तेमाल कर सबूत प्राप्त किया जाता है यदि किसी पुरुष पर महिला के साथ संबंध बनाने का शक है तो उन दोनों के DNA टेस्ट के आधार पर यह आसानी से पता किया जा सकता है! यह बात सच है या झूट!!

डीएनए कहां पाया जाता है

अब यहां जरूर आपके मन में यह सवाल आ सकता है कि आखिर मनुष्य या सजीव प्राणी के शरीर मे DNA मौजूद कहां पर होता है? तो बता दें मनुष्य का शरीर कोशिकाओं से मिलकर बना है!

अतः इस प्रकार जितने भी जीवित प्राणी हैं उन सभी की कोशिकाओं में डीएनए मौजूद होता है।।

आप जानते होंगे मनुष्य के शरीर में क्रोमोसोम जिसे हम हिंदी में गुणसूत्र कहते हैं पाये जाते हैं प्रत्येक प्रजाति में क्रोमोसोम्स की संख्या निश्चित होती है और जितने भी जीवित प्राणी हैं उनके गुणसूत्र के अंदर DNA पाया जाता है।

अधिकांशतः DNA कोशिकाओं में पाया जाता है जैसे कि यूकैरियोटिक, Animal cells, Plant cells, Fungi cell (कवक कोशिकाओं) इत्यादि में पाया जाता है मनुष्य के शरीर में मौजूद यूकैरियोटिक कोशिकाओं के भीतर Nucleus पाए जाते हैं व Nucleus के भीतर X आकार के गुणसूत्र होते हैं।

मनुष्य के भीतर पाए जाने वाले यह गुणसूत्र जोड़ियों में होते हैं अर्थात यह XX फॉर्म में होते हैं विभिन्न प्राणियों के अनुसार क्रोमोसोम्स की संख्या अलग-अलग होती है मनुष्य में क्रोमोजोम्स कि यह संख्या 46 होती है एवं जानवर जैसे हाथी में क्रोमोसोम की संख्या 56 जोड़ी होती है।

जबकि Plant जैसे गाजर में क्रोमोसोम्स की संख्या 18 होती है और DNA जिसके विषय में हम पढ़ रहे हैं वह इन्हीं क्रोमोजोम्स के अंदर पाया जाता है डीएनए सबसे अधिक केंद्रक में पाया जाता है और उसके बाद यह माइट्रोकांड्रिया में पाया जाता है।

डीएनए कैसे बनता है

किसी भी प्राणी के शरीर में DNA Nucleotide नामक छोटे अणुओं से मिलकर बना होता है प्रत्येक Nucleotide में एक फास्फेट ग्रुप एक शुगर गुरु और एक नाइट्रोजन बेस उपस्थित होता है।

डीएनए मुख्यतः चार केमिकल के आधार पर बना होता है जो निम्नलिखित हैं।

-Adenine (A)

-Guanine (G)

-Cytosine (C)

-Thymine (T)

इन्हें आप शॉर्ट फॉर्म में ATCG भी कह सकते हैं क्योंकि इसमें A और G समूह में उपस्थित होते है जब C और T अन्य समूह में उपस्थित होते हैं।

यह सभी समूह आपस में हाइड्रोजन के बंध से जुड़े होते हैं क्योंकि यह सीढ़ीदार डिजाइन में होता है इसलिए इसे डबल हेलिक्स भी कहा जाता है।

DNA और RNA में अंतर

डीएनए एक अनुवांशिक पदार्थ है जिसका मुख्य कार्य शारीरिक क्रियाओं को नियंत्रित करना होता है इसलिए किसी भी प्राणी के शरीर में DNA सबसे अहम तत्व में से एक होता है जबकि RNA शरीर में अनुवांशिक सूचना का वाहक होता है यह शरीर में क्रोमोजोम्स के लिए प्रोटीन संश्लेषण में विशेष योगदान देता है।

DNA 2 सूत्री एवं रेखाकार होने के साथ ही वृत्ताकार होते हैं जबकि RNA 1 सूत्रीय होते हैं और आकृति एवं कार्य के अनुसार भिन्न होते हैं DNA में D-ऑक्सी शर्करा मौजूद होती है वहीं दूसरी तरफ RNA में राइबो शर्करा मौजूद होती है।

डीएनए एक प्राणी के शरीर में मुख्यतः केंद्रक में पाया जाता है दूसरी तरफ RNA केंद्रिका द्रव्य कोशिका द्रव्य में मौजूद होता है अर्थात यह मुख्यतः कोशिका द्रव्य में पाया जाता है।

DNA में न्यूक्लोराइड बड़ी संख्या में पाया जाता है DNA में न्यू क्लोराइड की संख्या 40 लाख तक हो सकती है यदि इसकी तुलना RNA से की जाए तो इसमें न्यूक्लोराइड की संख्या 25,000 से भी कम होती है।

इन सभी के अलावा अंत में जो एक मुख्य अंतर यह है डीएनएअनुवांशिक लक्षणों की सूचना को स्टोर कर उसका पीढ़ी दर पीढ़ी प्रसारण करते हैं जबकि जींस संकेत की सूचनाओं के आधार पर लक्षणों के विकास हेतु आवश्यक प्रोटीन का संश्लेषण करवाते हैं।

DNA का इतिहास

पहली बार जर्मनी के Biochemist ने वर्ष 1869 में
Frederich Miescher ने DNA का अवलोकन किया परंतु उनके द्वारा किए गए इस अवलोकन को अधिक महत्व नहीं दिया गया।

और हम जिस डीएनए के बारे में सुनते हैं तथा पढ़ते है उसकी शुरुवात वर्ष 1953 में James Watson, Francis Crick, Maurice Wilkins और Rosalind Franklin द्वारा की गई तथा पहली बार DNA के स्ट्रक्चर को परिभाषित किया गया।

ताकि इससे प्राणी के बायोलॉजिकल इंफॉर्मेशन का पता किया जा सके मानव सभ्यता में DNA की खोज वाकई एक बहुत बड़ी कामयाबी थी और उनकी इस कामयाबी को सराहते हुए वर्ष Watson, Crick और Wilkins नामक इन तीनों व्यक्तियों को वर्ष 1962 में नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया।

डीएनए के कार्य व जुड़े तथ्य

खून की जांच परीक्षण हेतु DNA का उपयोग किया जाता है औऱ गाल की कोशिकाओं में DNA पाया जाता है इसके अलावा मूत्र के सैंपल की जांच हेतु भी शरीर में DNA का इस्तेमाल होता है।

DNA किसी भी जीवित प्राणी में मौजूद Cell में पाए जाने वाला गुणसूत्र (क्रोमोजोम) है जो उस जीव की संरचना एवं गुणों को बताता है अतः यह जीव की identity का सूचक है।

प्रतिदिन हमारे शरीर में 1 हजार से लेकर 10 लाख DNA नष्ट होता है और फिर से शरीर में यह दोबारा बनता रहता है इसी तरह यह श्रंखला चलती रहती है जब तक मनुष्य जीवित होता है।

आपको जानकर आश्चर्य हो सकता है कि पूरे इंटरनेट पर जितना डाटा उपलब्ध है उस डाटा को मात्र 2 ग्राम DNA स्टोर कर सकता है औऱ सभी मनुष्यों के अंदर पाए जाने वाले DNA में 99.9 प्रतिशत समानता होती है तथा विज्ञानियों के मुताबिक हमारा यह DNA चिंपांजी से 98% तक मिलता है।

सूर्य से आने वाली UV किरणें शरीर में मौजूद DNA को नष्ट कर सकती हैं इससे कैंसर होने का भी खतरा होता है एक व्यक्ति के शरीर में DNA की मात्रा इतनी होती है कि यदि प्रत्येक DNA को एक-एक कर जोड़ा जाए तो इससे पृथ्वी से लेकर सूर्य तक 600 बार दूरी तय की जा सकेगी।

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तो दोस्तों हम उमीद करते है कि यह आर्टिकल पढ़ने के बाद आपको DNA Full Form क्या है और कहाँ पाया जाता है साथ ही कैसे काम करता हैं इत्यादि की जानकारी प्रदान की हैं जो आपके मन मे कई तरह के सवालों के जवाब दे देगें।

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