संविधान क्या है और किसने लिखा सम्पूर्ण जानकारी

संविधान एक ऐसा कानूनी शास्त्र है जिसे राष्ट्र का संचालन किया जाता है यह लिखित होता है तथा किसी भी विपरीत परिस्थितियों से संविधान के आधार पर निपटा जा सकता है भारतीय संविधान कुछ ऐसी ही विशेषताओं को अपने आँचल में समेटे हुए कठोर व लचीला होने के कारण खुद को परिस्थिति के अनुसार ढाल लेता है।

भारतीय संविधान जोकि दुनिया का सबसे निराला, विशाल और अनूठ संविधान हैं इसलिए आज हम आपको भारतीय संविधान की हर एक छोटी से छोटी जानकारी प्रदान करने वाले है और साथ ही भारतीय संविधान के ऐसे रहस्यों को बताने वाले हैं जो आज तक आपको पता ही नहीं होंगे!

samvidhan kya hai kisne likha Hindi

जैसे भारतीय संविधान सभा व उसके अध्यक्ष, इसकी रचना में सबसे अहम भूमिका निभाने वाली प्रारूप समिति, संविधान का महत्व, भूमिका, कार्य संविधान के जनक इत्यादि के बारे में पूरी जानकारी प्रदान करने वाले है।

किसी भी देश का संविधान उस देश की मातृभूमि की पूजा-अर्चन व धार्मिक पुस्तक के समान पावन व पूजनीय होता है और संविधान नाम की उस धार्मिक पुस्तक को पढ़ने वाला उसके विषय में जानने वाला किसी तपस्वी से कम नहीं। अगर आप भारतवर्ष के संविधान को जाने की प्रबल इच्छा है तो एक एक बार इस आर्टिकल को पूरा पढ़े।

संविधान क्या है

सरल भाषा में संविधान का अर्थ है किसी भी देश को सुगमता पूर्वक सुव्यवस्थित ढंग से चलाने वाले नियमों का ऐसा संग्रह होता है जिन नियमों या कानूनों के द्वारा सरकार व जनता के बीच विश्वासपूर्ण संबंध स्थापित होते हैं इसलिए संविधान किस देश के आधारभूत कानूनों का संग्रह होता है।

संविधान किसी राष्ट्र का जीवंत प्रतिरूप होता है लोकतंत्र में शक्ति जनता में निहित होती है उसके आदर्श रूप में तो इस शक्ति का प्रयोग स्वयं जनता को ही करना चाहिए परंतु वर्तमान में राष्ट्र का आकार बहुत बड़ा है इसलिए प्रत्यक्ष लोकतंत्र का होना संभव नहीं है इसलिए जनता मताधिकार के द्वारा अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है और चुने हुए प्रतिनिधि शासन का कार्य करते हैं।

संविधान का अर्थ क्या हैं

लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था को चलाने के लिए कुछ कानून व नियम बनाए जाते हैं जिसके आधार पर सरकार का गठन, सरकार की शक्तियां व सीमाएं नागरिकों के अधिकार व कर्तव्य के साथ-साथ नियमों को तोड़ने वाले के लिए दंड की शक्ति का भी प्रावधान होता है वही ग्रंथ संविधान है।

संविधान यह निश्चित करता है कि सरकार का गठन कैसे होगा तथा सरकार व नागरिकों के बीच संबंध निर्धारित करता है संविधान देश की सरकार के विभिन्न अंगों जैसे व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के स्वरूप को भी तय करता है तथा उनकी शक्तियों व सीमाओं को निर्धारित करता है।

इसके साथ ही नागरिकों के क्या अधिकार होंगे, उनके कर्तव्य कौन से हैं, किसको कितना टैक्स देना होगा, पुलिस कैसी होगी, न्ययालय कैसे होंगे आदि सभी बातों का निर्धारण भी देश के संविधान द्वारा ही होता है।

भारत में संविधान क्यों और कैसे बना

भारत का अपना प्राचीन इतिहास बहुत ही गौरवपूर्ण और प्रेरक रहा है भारत विश्व गुरु की महिमा से मंडित था लेकिन फिर भी कुछ परिस्थितियां ऐसी रही है जिसमें भारत की समृद्धि को देखकर विदेशी ताकतों का रुझान भारत की ओर रहा।

विदेशी ताकतों ने अपने साम-दाम दंड-भेद से भारत पर अपना आधिपत्य जमाने का भरसक प्रयास किया जब भी जिसको मौका मिला उस विदेशी आक्रांताओं में भारत पर क्रूरतम तरीकों से शासन किया।

ब्रिटिश उपनिवेशवाद, ईस्ट इंडिया कंपनी जो भारत में व्यापार करने के लिए आई थी उसका भारत में राजनीतिक हस्तक्षेप, प्लासी और बक्सर के युद्ध के बाद भारत का लगभग पूर्णतः भाग ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन हो गया।

अब ईस्ट इंडिया कंपनी अपने नए-नए तरीकों से क्रूरता पूर्ण शासन करने लगी उनका नए-नए तरीकों से अत्याचार व जुल्म सहने के बाद भारत में क्रांतिकारी जागरण होने लगा जिसकी प्रेरणा स्वामी दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद महर्षि, अरविंद वीर सावरकर व बाल गंगाधर तिलक इत्यादि विद्वानों के चिंतन से मिली जिसके फलस्वरुप स्वतंत्रता की मांग के साथ-साथ अपना स्वतंत्र संविधान निर्माण की मांग भी उठने लगी।

● सन 1922 में महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार के समक्ष संविधान निर्माण की मांग प्रस्तुत की।

● सन 1925 ईस्वी में एक सर्वदलीय सम्मेलन हुआ जिसमें संविधान निर्माण से संबंधित प्रस्ताव पारित हुआ।

ब्रिटिश सरकार ने क्यों स्वीकार की संविधान निर्माण की मांग 

संविधान बनाने का अधिकार ब्रिटिश सरकार भारतीयों को यूं ही देने को तैयार नहीं थी सन 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध से झुझती ब्रिटिश सरकार को भारत की सहायता की अपेक्षा थी औऱ सहायता की आवश्यकता होने के कारण ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों की संविधान निर्माण की मांग को मंजूरी दी।

इसलिए 1940 ईस्वी को अगस्त प्रस्ताव में पहली बार अंग्रेजों ने भारतीयों की संविधान निर्माण की मांग को स्वीकार किया तथा मार्च 1946 को सरकार ने 3 सदस्य आयोग भारत भेजा जिसे कैबिनेट मिशन कहते हैं इस मिशन की योजना से भारतीय संविधान सभा का गठन किया गया।

संविधान सभा का गठन

1946 में संविधान सभा के गठन हेतु अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचन हुए कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार संविधान सभा में निम्न 389 सदस्य चुने जाने थे।

◆ 292 ब्रिटिश प्रांतों की विधान परिषद द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि।

◆ 93 देसी रियासतों की प्रतिनिधि।

◆ चार चीफ कमिश्नर शासित क्षेत्र (अजमेर, मेरवाड़ा, दिल्ली पूर्व ब्रिटिश बलूचिस्तान) के प्रतिनिधि।

◆ भारतीय संविधान सभा में निर्वाचित और मनोनीत दोनों तरह के सदस्य थे।

संविधान सभा का उद्घाटन

9 दिसंबर 1946 सोमवार सुबह 11:00 बजे संसद के केंद्रीय हॉल में सविधान सभा का विधिवत उद्घाटन हुआ जिनकी प्रथम बैठक में 211 सदस्यों ने भाग लिया।

संविधान सभा के अध्यक्ष 

संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को 11 दिसम्बर 1946 को चुना गया था जबकि अस्थायी अध्यक्ष सच्चिदानंद सिन्हा थे।

संविधान की प्रारूप समिति

13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव रखा जिसे 22 जनवरी 1947 को पारित किया गया।

संविधान निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण समिति प्रारूप समिति का गठन अगस्त 1947 को हुआ तथा 7 सदस्य प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को बनाया गया इसलिए अंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक भी कहा जाता है।

संविधान का प्रारूप कब बना 

1. फरवरी 1948 को पहला प्रारूप प्रकाशित किया।

2. नवंबर 1948 को संशोधन के बाद संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

3. 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान बनकर के तैयार हुआ।

संविधान कब लागू हुआ

26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ यह हमारे लिए अत्यधिक हर्ष व गौरव का दिन था 26 जनवरी को ही संविधान लागू करने का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि इस दिन का अपना ऐतिहासिक महत्व है।

26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज दिवस मनाया गया था इसीलिए इस दिन को संविधान लागू करने के दिन के रूप में चुना गया तथा 26 जनवरी 1950 से भारत एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया था।

भारतीय संविधान की विशेषताएं

भारतीय सविधान संपूर्ण विश्व में सबसे अलग सबसे अनोखा सबसे निराला संविधान है इसमें ऐसी कई विशेषताएं हैं जो इसको आम सविधानओं में अलग पहचान दिलाती हैं।

1. विश्व का सबसे बड़ा संविधान

भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है औऱ संविधान में केवल संघ सरकार की शासन व्यवस्था का प्रावधान ही नहीं बल्कि राज्यों की प्रशासनिक व्यवस्था का भी वर्णन किया गया है।

2. वयस्क मताधिकार

भारत में बिना किसी भेदभाव के सभी को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रदान किया गया है मताधिकार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष रखी गई है जबकि पहले यह आयु 21 वर्ष थी। दुनिया के कई देशों में वयस्क मताधिकार के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा जबकि भारतीयों को बिना किसी भेदभाव के प्राप्त हो गया।

3. मौलिक अधिकार

अगर नागरिकों का सर्वांगीण विकास करना है तो उन्हें अधिकार देना जरूरी हो जाता है भारत के संविधान के भाग 3 में कुल 6 मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं वही इन अधिकारों का दुरुपयोग न कर सके इसके लिए प्रतिबंध की व्यवस्था भी की गई है।

4. नीति निदेशक तत्व

जिन अधिकारों को मूल अधिकार नहीं बनाया जा सकता था उन्हें नीति निदेशक तत्वों में शामिल किया गया।

5. एकात्मक व संघात्मक सविधान

जिस सविधान के द्वारा संघ सरकार एवं राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का बंटवारा हो और इस बंटवारे की स्वतंत्रता के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका हो उसे संघात्मक व्यवस्था कहते हैं भारतीय संविधान द्वारा संघ सरकार और राज्य सरकार के बीच तीन सूचियों -संघ सूची, राज्यसूची एवं समवर्ती सूची द्वारा शक्तियों का बंटवारा किया गया है।

6. लचीला व कठोर संविधान

भारत का संविधान लचीला एवं कठोर दोनों ही विशेषताओं को संजोए हुए हैं संविधान लचीला होने की वजह से आवश्यकता अनुसार इसमें बदलाव किए जा सकते हैं ।

7. सरकार का संसदीय स्वरूप

सरकार के तीन अंग होते हैं व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तथा व्यवस्थापिका कार्यपालिका के आपसी संबंधों के आधार पर संविधान संशोधन व अध्यक्षात्मक हो सकता है भारत में कार्यपालिका यानी प्रधानमंत्री एवं मंत्री परिषद अपने कार्य एवं कार्यकाल के लिए व्यवस्थापिका यानी संसद के प्रति उत्तरदाई रहेगें।

8. संसदीय संप्रभुता व न्यायिक सर्वोच्चता

न्यायपालिका अर्थात सर्वोच्च न्यायालय को संविधान की व्याख्या करने एवं संविधान की सुरक्षा करने का अधिकार प्राप्त है इसी प्रकार अन्य विशेषताओं को अपनी आगोश में समेटे हुए हैं जैसे इकहरी नागरिकता, संविधान की सर्वोच्चता, एकीकृत व स्वतंत्र न्यायपालिका, केंद्र उन्मुख संविधान, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, सरकार का त्रिस्तरीय ढांचा आदि ।

भारतीय संविधान के कार्य

संविधान किसी भी देश के संचालन में सहयोगी तो होता ही है साथ ही हमेशा के लिए व्यवस्थाओं को बनाए रखने देश के हर नागरिक, कार्यकर्ता, राजनीतिक अधिकारियों व सत्तासीन पार्टी सभी के लिए नियमों का निर्धारण करता है।

ताकि भविष्य में कोई भी एक व्यक्ति दल या संगठन अपने अधिकारों की शक्ति का दुरुपयोग न कर सके सभी के हितों, कर्तव्य व अधिकारों को ध्यान में रखकर निष्पक्ष व्यवस्थाएं व दंड का प्रावधान किया जाता है तो अब हम जानेंगे कि आखिर सविधान के कार्य क्या है।

1. भारतीय सविधान सभी देशवासी प्रेम-भाईचारे व आपसी विश्वास के साथ रह सके ऐसा सहयोग व भरोसा देता है।

2. भारतीय सविधान देश में सरकार कैसे बनेगी, उसका चुनाव कैसे होगा, वह सरकार कैसे काम करेंगी, किसके पास कौन सी शक्तियां होंगी, कौन किस पर अंकुश लगेगा व अंतिम निर्णय का अधिकार किसका होगा आदि निश्चित करता है।

3. सरकार के अधिकार उनकी सीमाएं, नागरिकों के अधिकार कर्तव्य, उल्लंघन पर दंड आदि को भी संविधान द्वारा ही स्पष्ट किया जाता है।

4. संविधान का महत्वपूर्ण कार्य है समाज व देश को और भी अच्छा कैसे बनाया जाए।

संविधान का महत्व

संविधान नागरिकों के लिए अनेक मौलिक अधिकारों की व्यवस्था करता है जिनमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धर्म का अधिकार, संस्कृति एवं शिक्षा का अधिकार व संवैधानिक उपचारों का अधिकार शामिल है।

नीति निर्देशक तत्व राज्य के लिए नैतिक कर्तव्यों का कार्य करते हैं इनकी लागू होने से नागरिकों का सामाजिक व आर्थिक कल्याण होगा तथा राज्य लोक कल्याणकारी होगा।

भारत सरकार अधिनियम 1935 से –

– संघीय व्यवस्था, कार्यपालिका की शक्ति राष्ट्रपति में होगी
– अटॉर्नी जनरल की नियुक्ति व शक्तियां
– वीटो पावर
– राष्ट्रपति की आपातकालीन उपबंद
– सर्वोच्च न्यायालय राष्ट्रपति को सलाह दे सकता है और संघ लोक सेवा आयोग की शक्तियां तथा स्थापना एवं न्यायपालिका यह सभी भारत सरकार अधिनियम 1935 से दिए गए हैं।

ब्रिटिश संविधान से –

– बहुमत के आधार पर चुनाव
– विधि का शासन कार्यपालिका व विधानमंडल के प्रति उत्तरदाई
– मंत्री मंडलीय प्रणाली
– इकहरी या एकल नागरिकता का प्रावधान

अमेरिका के संविधान से-

– संविधान की प्रस्तावना का विचार
– मौलिक अधिकारों की सूची
– न्यायिक पुनरावलोकन
– न्यायपालिका की स्वतंत्रता
– राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया
– उच्चतम व उच्च न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया

कनाडा के संविधान से-

– अर्ध संघात्मक सरकार का स्वरूप

रूस के संविधान से

– मूल कर्तव्य

जर्मनी के संविधान से –

– आपातकालीन उपबंध

दक्षिणी अफ्रीका के संविधान से-

– राज्यसभा के सदस्यों की निर्वाचन प्रक्रिया
– संविधान संशोधन प्रक्रिया

ऑस्ट्रेलिया के संविधान से-

– समवर्ती सूची व संसद के अधिवेशन का प्रावधान लिया गया

संविधान बनने में कितना समय औऱ खर्च लगा

हमारा संविधान 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन में बनकर तैयार हुआ औऱ 17 अप्रैल 1952 को भारत की प्रथम निर्वाचित संसद का गठन हुआ तथा डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति नियुक्त हुए साथ ही संविधान निर्माण में 64 लाख रुपए का खर्चा आया।

संविधान की आत्मा

मूल संविधान में एक प्रस्तावना जिसे हम उद्देशिका भी कहते हैं जिसमें 8 अनुसूचियां 22 भाग 395 अनुच्छेद थे।

● वर्तमान में अनुसूचियों की संख्या 8 से बढ़ाकर 12 कर दी गई है।

● प्रस्तावना को मुख्य माना जाता इसे संविधान की आत्मा बताया गया है।

> भारत के सबसे अमीर आदमीं की लिस्ट
> भारत में कुल कितने राज्य है और कौनसे
> भारत का नाम इंडिया कैसे और क्यों पड़ा
> भारत का राष्ट्रपति कौन हैं

हमार देश लोकतांत्रिक गणराज्य है जहां हम सभी देश के संचालन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं माना कि भारत के संविधान को बनाने में हमने बहुत सोच समझकर अलग-अलग देशों की संविधान से सबसे अच्छी बातें ग्रहण कर सुंदर संविधान बनाने का प्रयास किया है।

लेकिन जब तक हम अपनी आत्मा से संविधान और राजनीति को पवित्र चीज नहीं समझेंगे जब तक “राज “+ “नीति” में नीति को नैतिक धर्म नहीं समझा जाएगा तब तक कोई संविधान चाहे कितना ही अच्छा क्यों ना हो वह खराब साबित होगा।

इस विषय में डॉ.अम्बेडकर ने कहा था कि संविधान भले ही कितना भी अच्छा हो लेकिन उसे अमल में लाने वाले लोग अच्छे न हो तो निश्चित रूप से संविधान खराब होगा अतः किसी भी संविधान को महान तभी बनाया जा सकता है जब हम पवित्र भाव से उसके नियमों का पालन धर्म व नैतिकता समझकर करेंगे।

तो दोस्तों हमने आपको भारतीय संविधान के बारे में विस्तार पूर्वक बताने का पूरा प्रयास किया है जहां आपको भारतीय संविधान क्या है और भारतीय संविधान से क्या अभिप्राय है इत्यादि को संपूर्ण जानकारी के साथ बताया है।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे यह आर्टिकल पसंद आया होगा और आपको इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद मदद मिली होगी तो अगर आपको हमारा यह आर्टिकल मददगार और ज्ञान से भरपूर लगता है तो इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें।

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3 COMMENTS

  1. आपका हर पोस्टv बहुत ही जानकारी से भरा हुआ हैं। महत्वेपूर्ण जानकारी देने के लिए धन्य।वाद।

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