Jagannath Ratna Bhandar: जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का रहस्य आधी पृथ्वी को खरीदा लेगा

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Jagannath Ratna Bhandar: पुरी के जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार हमेशा से रहस्य और आश्चर्य का केंद्र रहा है इस भंडार में ऐसे-ऐसे कीमती रत्न और आभूषण हैं जिनकी कीमत का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है आखिरी बार इस भंडार को 1905 में खोला गया था और 1978 में इन रत्नों का हिसाब-किताब किया गया था।

लेकिन जब 2018 में इसे फिर से खोलने की मांग उठी तो राज्य सरकार ने कई बहाने बनाए कभी चाबी गुम होने का बहाना तो कभी नकली चाबी मिलने का बहाना इस लुक्का-छुपी में 46 साल बीत चुके हैं।

क्या है इस रत्न भंडार का रहस्य? क्यों राज्य सरकार इसे खोलने से बचती है? क्या इसमें सच में ऐसे रत्न हैं जो आधी पृथ्वी को खरीदा जा सकता है? 600 साल पुराने भविष्य मालिका के ग्रंथों में इस रत्न भंडार के बारे में क्या लिखा है? इन सब सवालों के जवाब जानने के लिए बने रहिए हमारे साथ जगन्नाथ मंदिर के रहस्यमय खजाने की पूरी कहानी बताएंगे जो आपके होश उड़ा देगी।

Jagannath Ratna Bhandar

पुरी के जगन्नाथ धाम में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं इस पवित्र स्थल का एक रहस्यमय हिस्सा है रत्न भंडार जहाँ दुनिया के सबसे मूल्यवान रत्न संग्रहीत हैं यह भंडार केवल पुजारी और सेवायतों के लिए ही खुलता है।

Navbharat Times के अनुसार जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार को सिर्फ चार बार ही खोला गया है। पहला 1984, दूसरा 1978, फिर 1926 और चौथा 1905 में खोला गया था। 1999 तक जब भी कोई व्यक्ति इस भंडार के पहले द्वार के निकट जाता था तो अंदर से प्रचंड गर्जना सुनाई देती थी मानो जैसे अंदर एक विशाल सांप गुस्से में गरज रहा हो इस गर्जना की आवाज इतनी भयानक थी कि कई लोग डर के मारे वहाँ से भाग जाते थे।

यह गर्जना इस बात का संकेत मानी जाती थी कि भंडार के अंदर कुछ अलौकिक शक्ति मौजूद है जो उसकी रक्षा कर रही है इस रहस्यमय गर्जना ने रत्न भंडार को और भी रहस्यमय बना दिया है।

रत्न भंडार के अंदर संग्रहित रत्न और आभूषणों की कहानियां और भी दिलचस्प हैं ये रत्न कहाँ से आए, कैसे आए और किसने दिए इसके पीछे कई रहस्यमय और पुरातन कहानियां हैं जगन्नाथ धाम का यह रहस्यमय रत्न भंडार सदियों से लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

जगन्नाथ के रत्नों की कहानियां

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में ऐसे-ऐसे अनमोल रत्न और आभूषण हैं जिन्हें अगर आज बेचा जाए तो आधी पृथ्वी को खरीदा जा सकता है इस भंडार में दुनिया का सबसे कीमती डायमंड, सबसे कीमती जेम स्टोन, सबसे कीमती मुकुट, सबसे कीमती माला और सबसे कीमती सोने से निर्मित रत्नों से सुसज्जित धनुष और तलवार शामिल हैं इन रत्नों की कहानी बेहद पुरानी और रहस्यमय है।

महाप्रभु जगन्नाथ जी के चरणों में प्राचीन काल से विश्व के कई राजाओं, व्यापारियों और नाविकों ने अपना आभार प्रकट करने के लिए असंख्य रत्नों का दान किया था इन दानों के पीछे की कहानियां भी कम रोचक नहीं हैं।

माना जाता है कि जब भी कोई भक्त महाप्रभु जगन्नाथ जी को हृदय से पुकारता था वे उसकी सहायता के लिए तुरंत पहुँच जाते थे चाहे वह युद्ध के मैदान में फंसा राजा हो या समुद्री तूफान में फंसा विदेशी नाविक जिसने भी जगन्नाथ जी का नाम लिया उसका उद्धार अवश्य हुआ। इस दिव्य सहायता के प्रति आभार स्वरूप इन राजाओं और व्यापारियों ने अपने सबसे मूल्यवान रत्न महाप्रभु को भेंट किए थे। यह रत्न भंडार न केवल संपत्ति का प्रतीक है बल्कि भक्तों की अटूट आस्था और विश्वास का भी प्रतीक है।

जगन्नाथ रत्न भंडार के सात कमरे

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में कुल सात कमरे हैं जिनमें महाप्रभु जगन्नाथ, बड़े प्रभु बलभद्र, देवी मां सुभद्रा और श्री सुदर्शन प्रभु जी के आभूषण और मूल्यवान रत्न संग्रहीत हैं। पहले तीन कमरों में महाप्रभु जगन्नाथ जी, बड़े प्रभु बलभद्र जी, देवी मां सुभद्रा जी और श्री सुदर्शन प्रभु जी के दैनिक उपयोग के आभूषण रखे गए हैं।

इन आभूषणों में कई तरह की दुर्लभ और अनमोल वस्तुएं शामिल हैं जिनका उपयोग विशेष अवसरों और पूजा-पाठ के समय किया जाता है बाकी चार कमरों में वह प्राचीन और बहुमूल्य रत्न रखे गए हैं जिनका सुरक्षा स्वयं लोकनाथ यानी महादेव करते हैं।

माना जाता है कि इन कमरों में प्रवेश करना बहुत ही कठिन है क्योंकि महादेव स्वयं इनकी रक्षा करते हैं। 1999 तक जब भी कोई पुजारी या सेवायत इन कमरों के निकट जाता था तो अंदर से प्रचंड गर्जना सुनाई देती थी मानो जैसे अंदर कोई विशाल सांप गरज रहा हो यह गर्जना इन कमरों के रहस्य और सुरक्षा को और भी बढ़ा देती थी।

इन चार कमरों में ऐसे-ऐसे रत्न संग्रहीत हैं जिनकी कीमत का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है कहा जाता है कि अगर इन रत्नों को बेचा जाए तो आधी पृथ्वी को खरीदा जा सकता है।

1985 जगन्नाथ रत्न भंडार की घटना

1984 में पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार के चार कमरों को खोलने का प्रयास किया गया यह घटना उस समय अत्यधिक चर्चा का विषय बन गई थी जैसे ही इन कमरों के द्वार खोले गए अंदर से भयंकर गर्जना सुनाई दी यह गर्जना इतनी प्रचंड और डरावनी थी कि वहाँ मौजूद कुछ लोग बेहोश हो गए गर्जना की तीव्रता ने वहाँ उपस्थित सभी को हिला कर रख दिया।

उस समय के जानकारों के अनुसार इस गर्जना के पीछे किसी अलौकिक शक्ति का हाथ था जो इन रत्नों की रक्षा कर रही थी इसके बाद इन चार कमरों का ठीक से हिसाब-किताब नहीं हो पाया वहाँ मौजूद रत्नों का मूल्यांकन करना भी असंभव हो गया था।

इस घटना के बाद रत्न भंडार के चार कमरों को तत्काल बंद कर दिया गया इसके पीछे का कारण यह बताया गया कि इन कमरों में मौजूद रत्नों की सुरक्षा और रहस्य को बरकरार रखने के लिए ऐसा किया गया इस घटना ने रत्न भंडार की रहस्यमयता और भी बढ़ा दी। लोग आज भी इस घटना को याद करके सोचते हैं कि आखिर इन कमरों में ऐसा क्या है जिसने इतने लोगों को भयभीत कर दिया था।

2018 जगन्नाथ रत्न भंडार की घटना

2018 में जब पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रहस्यमय रत्न भंडार को पुनः खोलने का प्रयास किया गया तो राज्य सरकार ने पूरी तैयारी की थी इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए ASI (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) सेवायत, डॉक्टर्स, स्नेक कैचर्स, रेस्क्यू टीम और राज्य सरकार के प्रतिनिधि सब मिलकर मंदिर में प्रवेश हुए। यह तैयारी इस बार अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित ढंग से की गई थी ताकि कोई भी अनहोनी घटना न हो सके।

लेकिन जब रत्न भंडार के द्वार को खोलने का प्रयास किया गया तो अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया टीम के एक सदस्य की तबीयत बिगड़ गई और उसे एंबुलेंस में ले जाना पड़ा बाकी सदस्य पसीने से लथपथ होकर सबसे मुंह छुपाकर भागने लगे यह दृश्य देखकर वहाँ मौजूद सभी लोग अचंभित रह गए।

राज्य सरकार ने मीडिया में घोषणा की कि रत्न भंडार का सर्वे 40 मिनट में ही समाप्त हो गया और अंदर सब कुछ सही है लेकिन कुछ दिन बाद सरकार ने एक और बयान दिया कि रत्न भंडार की चाबी गुम हो गई है जिसके कारण द्वार नहीं खोला जा सका फिर कुछ समय बाद कहा गया कि नकली चाबी मिल गई है।

इन विरोधाभासी बयानों ने जनता के मन में और भी संदेह उत्पन्न कर दिया इस लुक्का-छुप्पी में छिपे सच का पता लगाना और भी मुश्किल हो गया और 2018 का यह प्रयास भी रहस्यों में घिरा रहा जिससे रत्न भंडार की गुत्थी और भी उलझ गई। लोग आज भी यह सोचते हैं कि आखिर वह क्या कारण था जिसने इस प्रयास को विफल कर दिया और इस रहस्य को और भी गहरा बना दिया।

जगन्नाथ मंदिर पर भविष्यवाणी क्या कहती है

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का रहस्य केवल उसकी भव्यता और कीमती रत्नों तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें छिपे भविष्यवाणियों की कहानियां भी इसे और रहस्यमय बनाती हैं। 600 साल पुराने भविष्य मालिका के ग्रंथों में संत गुरु अच्युतानंद जी ने एक महत्वपूर्ण भविष्यवाणी की थी।

उन्होंने कहा था कि रत्न भंडार की चाबी चुरा ली जाएगी और बड़े-बड़े पदों पर बैठे लोग इसे लूट लेंगे यह भविष्यवाणी उस समय भले ही अजीब और असंभव लगती हो लेकिन आज के घटनाक्रम को देखते हुए यह और भी प्रासंगिक हो गई है।

भविष्य मालिका के ग्रंथों में लिखी इस वाणी को स्वयं महाप्रभु जगन्नाथ जी का माना जाता है इस भविष्यवाणी के अनुसार रत्न भंडार का चाबी चोरी होने और बड़े पदों पर बैठे लोगों द्वारा इसे लूटने का संकेत दिया गया था यह वाणी इस बात का इशारा करती है कि भविष्य में रत्न भंडार पर संकट आने वाला है और इसे बचाने के लिए भक्तों को सतर्क रहना होगा।

आज जब रत्न भंडार की चाबी गुम होने और नकली चाबी मिलने की घटनाएं सामने आती हैं तो यह भविष्यवाणी सच होती दिखाई देती है। संत गुरु अच्युतानंद जी की इस वाणी ने लोगों के मन में और भी संदेह और जिज्ञासा भर दी है क्या सच में रत्न भंडार की सुरक्षा खतरे में है? क्या महाप्रभु जगन्नाथ जी के रत्नों को लूटने की साजिश हो रही है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए लोग आज भी भविष्य मालिका के ग्रंथों का अध्ययन करते हैं।

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